यूनिसेफ के भारत के साथ 75 बेजोड़ वर्ष

देश के प्रत्येक बच्चे के अधिकार के लिए काम करते हुए यूनिसेफ की भारत सरकार के साथ 75वीं वर्षगांठ

भारत में यूनिसेफ के मानवता को बढ़ावा देने के 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

पिछले साढ़े सात दशकों से, भारत में यूनिसेफ विकास और मानवीय सहायता कार्यों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है, ताकि भारत सरकार को बच्चों के जीवन, स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के अधिकारों को साकार करने में सहयोग मिल सके। हमारा हर बच्चे के लिए स्वास्थ्य, सुरक्षा और खुशहाली का सपना है। पिछले 75 वर्षों में यूनिसेफ ने बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य, सुरक्षा और कल्याण के लिए मजबूत नींव रखी है।

भारत में पहले पेनिसिलिन संयंत्र से लेकर अमूल को महत्वपूर्ण तकनीकी सहायता देने तक। हमने एक साथ हाथ में हाथ डालकर यात्रा की। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक है। हमने हैंडपंपों की मार्क श्रृंखला स्थापित करने और देश में जल क्रांति लाने के लिए सरकार के साथ साझेदारी की।

सरकार और साझेदारों के साथ मिलकर, यूनिसेफ ने एकीकृत बाल विकास सेवाओं को लागू करने और टीकाकरण पर राष्ट्रीय मिशन शुरू करने में मदद की। जब सुनामी आई, तो यूनिसेफ आजीविका के पुनर्निर्माण के समर्थन में खड़ा हुआ।

सरकार, साझेदारों और अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर काम करते हुए, हमने भारत से चेचक और पोलियो को खत्म करने में मदद की। 1980 के दशक में 200,000 पोलियो मामलों से लेकर 2012 में शून्य मामले तक। हमने स्वच्छ भारत मिशन और भारत के खुले में शौच मुक्त होने के दृष्टिकोण का समर्थन किया। और हम COVID-19 के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार के साथ हाथ से हाथ मिलाकर खड़े रहे।

हमें भारत के सभी बच्चों के लिए 75 साल पहले सामूहिक रूप से देखे गए सपने को पूरा करने के लिए पहले से अधिक कड़ी मेहनत करनी चाहिए।

हमारा इतिहास गवाह है कि हम एक साथ मिलकर वो सब कर सकते हैं, जो हम ठान लें। इस सपने को साकार करने में हमारे साथ शामिल हों, जहां हर बच्चे को स्वस्थ, सुरक्षित और बीमारी, हिंसा और शोषण से मुक्त उज्ज्वल भविष्य मिले।

हम आराम नहीं करेंगे - हमारी यात्रा अभी शुरू हुई है। आइए हम सब मिलकर हर बच्चे के लिए एक निष्पक्ष दुनिया की फिर से कल्पना करें।

Embedded video follows
UNICEF@75 India logo
UNICEF

UNICEF@75 लोगो यूनिसेफ ब्रांड के सेकेंडरी पैलेट के रंगों में एक नाचते हुए बच्चे का प्रतिनिधित्व करता है। वह बच्चा पिछले 75 वर्षों में बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार की खुशी का प्रतिनिधित्व करने के लिए नृत्य कर रहा है।

बच्चा तरल और मोबाइल लाइनों में बनाया गया है, जो उस चपलता का प्रतिनिधित्व करता है जिसके साथ यूनिसेफ देश और दुनिया भर में विभिन्न स्थितियों में बच्चों की जरूरतों को पूरा करता है।

भारत के साथ यूनिसेफ के 75 वर्षों की वीडियो कहानियां

Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows
Embedded video follows

भारत के साथ यूनिसेफ की 75 वर्षों की कहानियाँ

सुरक्षा, सुकून और सम्मान की जगह बना सहेली कक्ष

बीएसवीपी (BSVP) महज एक पुरस्कार से कहीं बढ़कर बिहार के 60,000 स्कूलों में बदलाव ला रहा है। इसे साफ पानी, शौचालय, हाथ धोने की सुविधा और सहेली कक्ष जैसे सुरक्षित स्थानों के आधार पर आंका गया है। 

उत्तर प्रदेश में बच्चों के लिए हर दरवाजे पर हुई ममता की दस्तक

एक फोन कॉल पर घर-घर पहुंचकर दरवाजे पर दस्तक देकर गांव की एक आशा वर्कर और अभियान ने गोरखपुर की निराशा को बदला आशा में.... यह दस्तक है, निराशा पर आशा की!

 

आरंभ -जीवन की आनंदमयी शुरुआत

नन्हें कदमों को सहारा देने के लिए संपूर्ण पोषण, प्यार, देखभाल, लालन-पालन, परवरिश और सहयोग बच्चे के शुरुआती विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। यूनिसेफ का आरंभ कार्यक्रम महाराष्ट्र में बच्चों के जीवन के इन्हीं शुरुआती आनंदमयी पलों के लिए प्रयासरत है।

नवजातों को उम्मीद की सांसें देती विशेष नवजात देखभाल इकाईयां

देशभर में 1,000 से अधिक कमजोर नवजात शिशुओं को बचाती और माता-पिता के जीवन में आशा की किरण जगाती विशेष नवजात देखभाल इकाइयां (एसएनसीयू)

आखा: आशा की नाव

असम में कठिन नदियों और द्वीपों को पार करके हशिए पर खड़े लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में बोट क्लिनिक का अहम रोल है। सरल सोलर डायरेक्टर-ड्राइव रेफ्रिजरेशन (SD-DR) इकाइयों ने निरूपमा जैसे स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के लिए टीकाकरण सेवाओं को बेहतर किया है।

पश्चिम बंगाल में हर लड़की के लिए उज्जवल भविष्य की नींव रख रहा कन्याश्री प्रकल्प

सशक्त आवाजों के साथ कन्याश्री के साथ आगे बढ़ रही लड़कियां। मिलिए बीना, मीना, रिया और शताब्दी से…. ये चारों लड़कियां कन्याश्री प्रकल्प के माध्यम से एक साझे लक्ष्य से जुड़ी हुई हैं।

अनोखे अंदाज में लड़कियों को सशक्त बना रहा अद्विका

बाल विवाह पर रोक लगाने को यूनिसेफ के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे ओडिसावासी

राजस्थान में बाल-मित्र पंचायतों के ज़रिए सशक्त बन रहे बच्चे

बाल पंचायतों और बाल सभाओं में 10 से 18 वर्ष के युवा नेता अपनी आवाज़ उठाकर बाल विवाह, शिक्षा, और पर्यावरण जैसे मुद्दों में ला रहे बदलाव

यूनिसेफ के साथ भारत के 75 बेजोड़ वर्षों की पोस्ट

UNICEF@75 India logo

UNICEF

In 1985 in India, an elderly couple from the nomadic Banjari tribe sits smiling with their grandchildren in a dwelling near the south-central city of Hyderabad, capital of the state of Andhra Pradesh.

UNICEF/UNI124761/Isaac

UNICEF@75

UNICEF

During 1940s, Kaira Union (AMUL), a milk cooperative, faced a problem. Their surplus milk could not be sold.  The livelihood of thousands of milk farmers was in jeopardy. Dr. Verghese Kurien, the legendary “Father of the White Revolution”, convinced UNICEF and others that the surplus buffalo milk could be converted into powder. In 1954, UNICEF signed an agreement with the Government of India to fund the Aarey and Anand milk processing plants. In return, free and subsidised milk would be provided to needy ch

UNICEF/UN0314710/

UNICEF@75 India logo

UNICEF

A nationwide village–based Applied Nutrition Programme was introduced in 1963. India signed a master plan of operation with UNICEF and its sister agencies, WHO and FAO; UNICEF assisted ANP with equipment and supplies.

UNICEF

UNICEF@75

UNICEF

In 1970, the Government of India ran the world’s largest rural water supply programme. Previously,villages only supplied single-family hand pumps which weren't sturdy,  for large consumption    This led to a collaboration between UNICEF, Government's Mechanical Engineering Research and Development Organisation and Richardson and Cruddas to develop India Mark II. The design was inspired from  the Sholapur Pump which was strong and well-engineered.

UNICEF

UNICEF@75 India logo

UNICEF

UNICEF supported Prime Minister Rajiv Gandhi's National Mission on Immunization. At the end of 1990, India announced that immunization coverage for children under the age of one had surpassed 80 per cent

UNICEF

UNICEF@75

UNICEF

IDD - Iodine Deficiency Disorders Local anganwadi women workers are being involved in campaigning for the awareness of the IDD. Iodine tends to evaporate once washed or dried in sun. The storage and sale of salt also becomes a worrying issue as it is mostly sold in open and dirty surroundings. Once bought, consumers wash and dry these before finally crushing the salt for use. The IDD campaign is driven towards urging people to use iodized salt for the prevention of iodine deficiency. Iodine is needed in the

UNICEF/UNI70242/Das

UNICEF@75 India logo

UNICEF

Gujarat Earthquake

UNICEF

UNICEF@75

UNICEF

On 9 October 2012, Vaishnavi Navalji Dadmal, 9, poses for a photograph at her residential toilet in Chandrapur District, Nagpur.

© UNICEF/UN011915/Singh

UNICEF@75 India logo

UNICEF

COVID-19 supplies

UNICEF