भारत में बच्चे

भारत में पिछले दो दशकों में हुई बढ़ोतरी ने वैश्विक मानव विकास में अभूतपूर्व रूप से योगदान दिया है

Children react during an activity at an Anaganwadi center in Cherki, Bihar.
UNICEF/UN0280934/Vishwanathan

भारत में बच्चों की स्थिति – चुनौतियाँ और अवसर

भारत में पिछले दो दशकों में हुए विकास ने वैश्विक मानव विकास (global human development) में सराहनीय योगदान दिया है। भारत में गरीबी में 21 प्रतिशत के स्तर तक आ गई है, साथ ही साथ नवजात शिशुओं की  मृत्यु दर भी आधी हो गयी है। 

80 प्रतिशत महिलाओं का प्रसव अब स्वास्थ्य केन्द्रों में सुरक्षित वातावरण एवं परिवेश में हो रहा है, यही नहीं पहले की तुलना में अब स्कूल ना जाने वाले बच्चों की संख्या में 20 लाख की कमी आई है अर्थात अब स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की संख्या में भी काफी कमी आयी है ।

ये आंकड़े एक ऐसे देश के लिए विशेष उपलब्धि हैं, जो विश्व की आबादी का लगभग छठा हिस्सा है। अभी भी बहुत सारी चुनौतियाँ हैं, क्योंकि भारत की अब तक की आर्थिक उपलब्धियों से अभी तक जीवन स्तर में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ है। सभी की सामान जीवन शैली, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों के जीवन की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों, मलिन बस्तियों और शहरों में गरीबी रेखा के नीचे की आबादी, अनुसूचित जातियों, जनजातीय समुदायों और अन्य वंचित आबादी के बच्चे गरीबी, कुपोषण,  स्वास्थ्य सेवाओं का अभाव,बाल विवाह, स्कूलों में कम उपस्थिति,  ख़राब शैक्षणिक परिणाम, स्वच्छता, स्वच्छ पेयजल की कमी आदि से संबंधित कई अभावों से पीड़ित हैं। 

बिहार के चेरकी के एक आंगनवाड़ी केंद्र में एक गतिविधि के दौरान बच्चे प्रतिक्रिया करते हैं।
UNICEF/UN0280935/Vishwanathan बिहार के चेरकी के एक आंगनवाड़ी केंद्र में एक गतिविधि के दौरान बच्चे प्रतिक्रिया करते हैं।

भारत में अन्य देशों की तुलना में दुनिया की सबसे ज्यादा किशोर आबादी जो वर्तमान में 253 मिलियन है और यहाँ हर पांचवां व्यक्ति 10 से 19 साल के बीच है। 

गौरतलब है कि भारत को सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक रूप से इस बात का लाभ मिल सकता है, यदि यहाँ बड़ी संख्या में मौजूद किशोर आबादी सुरक्षित, स्वस्थ, शिक्षित हो और देश के विकास को गति देने के लिए सूचना और कौशल से परिपूर्ण हो।

हालांकि, किशोर लड़कियां विशेष रूप से खराब पोषण, बाल-विवाह और कम उम्र में बच्चे पैदा करने की वजह से कमजोर हो जाती हैं, जिससे उनकी एक सशक्त एवं स्वस्थ जीवन जीने की क्षमता प्रभावित होती है, जिससे आने वाली पीढ़ी भी प्रभावित होती हैं ।

लड़कियों के सन्दर्भ में भारत में बाल विवाह का आंकड़ा भी सबसे अधिक है। दक्षिण एशिया के आठ देशों (बांग्लादेश, नेपाल और अफगानिस्तान के बाद) में भारत बाल विवाह के प्रचलन के मामले में चौथे स्थान पर है।

देश के विकास दर को यहाँ घटित होने वाली लगभग सभी आपदाएं जैसे कि बाढ़ , सूखा, भूकंप, शरणार्थियों का आगमन तथा जलवायु परिवर्तन आदि  प्रभावित करता हैं।