महत्वपूर्ण आंकड़े (डाटा)

बच्चों के मामले में नए जोखिमों और मौकों के मूल्यांकन के लिए अलग-अलग आंकड़ों का संग्रह एवं विश्लेषण यूनिसेफ के सभी कार्यक्रमों का प्रमुख अंग है

  • प्रतिवर्ष 2.5 करोड़ बच्चों के जन्म के साथ भारत का हिस्सा विश्व के कुल बच्चों के जन्म का पांचवां भाग है।
  • भारत विश्व में ऐसा अकेला बड़ा देश है जहाँ शिशुओं में लड़कियों की मृत्यु दर लड़कों से ज्यादा है। बच्चों के जीवित बचने में लैंगिक अंतराल वर्तमान में 11 फीसदी है।
  • भारत में मातृत्व मृत्यु दर 8 अंक नीचे गिरकर 2014-16  के 130/ 100,000 जीवित जन्म से घटकर 2015-17 में 122/ 100,000 जीवित जन्म हो गया है, इसमें (6.2 प्रतिशत की कमी) आई है।
  • वैश्विक स्तर पर प्रतिवर्ष गर्भ एवं बच्चों के जन्म से संबंधित कारणों से होने वाली महिलाओं और लड़कियों की मृत्यु में व्यापक कमी आयी है, जो संख्या 2000 में 451,000 थी वह 2017 में घटकर 295,000 हो गई है।
  • भारत में प्रतिवर्ष गर्भ एवं बच्चों के जन्म से संबंधित कारणों से होने वाली महिलाओं और लड़कियों की मृत्यु में 55 फीसदी की व्यापक कमी आयी है, जो संख्या 2000 में 103,000 थी वह 2017 में घटकर 35,000 हो चुकी है।
  • लगभग 46 प्रतिशत मातृत्व मृत्यु और 40 प्रतिशत नवजात मृत्यु प्रसव के दौरान या जन्म के पहले 24 घंटों के दौरान होती हैं। नवजात शिशुओं की मृत्यु के प्रमुख कारण समय पूर्व प्रसव (35 प्रतिशत), नवजात संक्रमण (33 प्रतिशत) जन्म के दौरान दम घुटने से (20 प्रतिशत) और जन्मजात विकृतियां (9 प्रतिशत) हैं।

बाल सुरक्षा
•    बलात्‍कार के 94.6 मामलों में अपराधी अपने पीड़ितों के परिचित थे।
•    15-49 वर्ष आयु वर्ग की शारीरिक और यौन हिंसा का सामना करने वाली 83 प्रतिशत महिलाओं ने अपने वर्तमान पति को दोषी बताया है।
•    15-49 आयु वर्ग कि 34 प्रतिशत महिलाओं ने 15 वर्ष की आयु से घर पर हिंसा का सामना किया है।
•    5-14 वर्ष की आयु के प्रत्‍येक आठ में से एक बच्‍चा अपने परिवार अथवा किसी दूसरे के लिए काम करता है
•    15-49 आयु वर्ग की 31 प्रतिशत महिलाओं ने अपने पति की वजह से शारीरिक, यौन अथवा भावनात्मक हिंसा का सामना किया है
    
स्रोत:NFHS3 और 4, NCRB 2016
 

शिक्षा

  • भारत सरकार का शिक्षा का अधिकार अधिनियम की स्कूल न जाने वाले (ओओएससी) 6 से  14 वर्ष की आयु वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है।
  • स्कूल न जाने वाले ज्यादातर बच्चे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों सहित वंचित समुदाय से हैं।
  • स्कूल न जाने वाले ज्यादातर बच्चे छः राज्यों उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में केंद्रित हैं।
  • करीब 29 प्रतिशत लड़कियां और लड़के प्रारंभिक शिक्षा का सम्पूर्ण चक्र पूरा करने के पहले ही स्कूल छोड़ देते हैं। अगर इसमें प्रारंभिक शिक्षा के बाद की शिक्षा और हाई स्कूल भी जोड़ दिया जाये तो ये संख्या और भी विवादास्पद और चुनौती पूर्ण हो जाती है।

जल, स्वच्छता और साफ-सफाई (WASH)

  • 192  यूनिसेफ समर्थित जिलों में खुले में शौच मुक्त (ODF)  स्थिति बरकरार रखना।
  • यूनिसेफ का लक्ष्य सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल सेवा का उपयोग करने वाली ग्रामीण आबादी के अनुपात में 49 प्रतिशत से 69 प्रतिशत तक वृद्धि करना है।
  • यूनिसेफ का लक्ष्य समर्थित जिलों में लैंगिक संवेदनशीलता के साथ पर्याप्त और कार्यात्मक WASH सुविधाओं वाले स्कूलों के अनुपात में 48 प्रतिशत से बढ़ाकर 75 प्रतिशत वृद्धि करना है।
  • यूनिसेफ का लक्ष्य पर्याप्त और कार्यात्मक WASH सुविधाओं वाली आंगनवाड़ियों का अनुपात 42  प्रतिशत से बढ़ाकर 60  प्रतिशत तक करना है।
  • यूनिसेफ का लक्ष्य घर में उपलब्ध साबुन से हाथ धोने की सुविधा वाले ग्रामीण परिवारों के अनुपात को 34 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत करना है।

सामाजिक नीति और समावेश

  • भारत में अत्‍यधिक गरीबी (1.90 अमेरिकी डॉलर प्रतिदिन) से घटकर 21 प्रतिशत रह गई है।
  • वर्ष 2010 में शहरी परिवेश में रहने वाली जनसंख्या तकरीबन 55.3 प्रतिशत थी, जिनमें से बहुत सी अनौपचारिक बस्तियों में बहुत कम या कोई बुनियादी सेवाएं नहीं थीं।
  • सात कम आय वाले राज्यों में देश की लगभग 62 प्रतिशत गरीबी है।
  • वर्ष 2012-13 और 2016-17 के बीच, संघीय बजट में बच्‍चों के लिए हिस्सेदारी 4.8 प्रतिशत से घटकर 3.3 प्रतिशत रह गई।

किशोर विकास और सहभागिता

  • भारत में लगभग 72 प्रतिशत किशोर ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं
  • 15-19 वर्ष के आयु समूह की लगभग 42 प्रतिशत किशोरियां कुपोषित हैं (BMI<18.5 kg/m2)
  • 15-19 वर्ष आयु समूह की लगभग 54 प्रतिशत किशोरियों और 29 प्रतिशत किशोरों में खून की कमी है।

(स्रोत: जनगणना 2011, NHFS 3 और 4)

लैंगिक समानता

  • लिंगानुपात वर्ष 2001 में प्रति  1,000 लड़कों पर  905 लड़कियों से गिरकर वर्ष 2011 में 899 रह गया (सामान्‍य लिंगानुपात प्रति 1,000 लड़कों पर  40-960 लड़कियां है)2
  • भारत में पांच वर्ष से कम आयु की लड़कियों की मृत्‍यु दर वैश्विक दर से 11 प्रतिशत अधिक है, लड़कों के संबंध में पांच वर्ष से कम की मृत्‍यु दर 9 प्रतिशत अधिक है, जो पांच वर्ष से कम आयु की लड़कियों की मृत्‍यु में 20 प्रतिशत की असामान्‍यता दर्शाती है।3
  • 15 से 19 वर्ष की आयु के 30 प्रतिशत लड़कों की तुलना में लगभग 56 प्रतिशत लड़कियों में खून की कमी है।4
  • केवल 12.7 प्रतिशत जमीन ही महिलाओं के नाम है, जबकि 77 प्रतिशत महिलाओं की आय का प्राथमिक स्रोत कृषि पर निर्भर है।6