अनोखे अंदाज में लड़कियों को सशक्त बना रहा अद्विका
बाल विवाह पर रोक लगाने को यूनिसेफ के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रहे ओडिसावासी
- English
- हिंदी
हर किसी ने मेरी मां से कहा इसकी शादी कर दो। लोगों ने कहा, "इस छोटी सी दुकान से अपना गुजारा तो हो नहीं रहा, बेटी की इंजीनियरिंग कॉलेज की फीस कहां से दोगी? इसके हाथ पीले कर दो सारे झमेले से छुटकारा मिल जाएगी! जब बड़ी बेटी की शादी कर दी है, तो छोटी की भी शादी कर दो।"
अद्विका की एक युवा सदस्या आशा साहू अपनी आपबीती बताते हुए कहती हैं कि, ऐसे माहौल में मैंने मजबूती से अपनी बात रखते हुए आगे पढ़ाई जारी रखने और शादी करने से मना कर दिया। क्योंकि मैं कामयाब होकर अपने पैरों पर खड़ी होना चाहती हूं, लेकिन मेरी मां मेरी बात से सहमत नहीं थी।
ओडिसा के तटीय इलाके गोपालपुर में उगने वाला सुरज बच्चों के लिए नई सुबह लेकर आता है। यहां बच्चों के लिए शिक्षा वह मौका है जिसके द्वारा वह अपने सपनें और अकांक्षाओं को पूरा कर सकते हैं। खासकर लड़कियों के लिए, क्योंकि लड़कियों को पहली माहवारी होते ही उनके लिए दुनिया जैसे रूक सी जाती है।
10 से 19 वर्ष के बच्चों की 83 लाख की आबादी समेटे ओडिसा में बाल विवाह के सबसे ज्यादा 20.5 प्रतिशत मामले सालाना रिकॉर्ड में दर्ज होते हैं। जो राष्ट्रीय औसत डेटा 20.3 प्रतिशत (एनएफएचएस 5 डेटा) से कम है। ओडिसा में लड़के-लड़कियों के जन्म का लिंग अनुपात 1000 लड़कों पर 894 लड़कियों से गिरावट का है। लेकिन, यहां हैरानी की बात ये है कि 7.6 प्रतिशत लड़कियां 19 वर्ष की आयु तक गर्भवती हो जाती हैं या मां बन चुकी होती हैं। गोपालपुर जैसे ग्रामीण एरिया में लड़कियों की छोटी उम्र में शादी हो जाना जैसे आम बात है।
ओडिसा में लड़की को पहली बार माहवारी होना किसी जश्न से कम नहीं। यहां परिजन और रिश्तेदार एकत्रित होकर भोज का आयोजन करते हैं, पुरे सात दिनों तक लगातार संगीत और नृत्य का लुत्फ उठाया जाता है। इसे लड़की को महिला के रूप में तैयार होने का संकेत मानकर उसकी शादी की तैयारियां शुरू कर दी जाती हैं।
“मेरे नारीत्व के इस जश्न का हिस्सा कुछ ऐसे लोग भी बने, जो मुझे एक नजर में पसंद करके अपने घर की बहु बनाना चाहते थे, लेकिन 14 साल की उस कच्ची उम्र में मुझे तो यह तक नहीं पता था शादी क्या होती है? शादी अच्छी होती है या बुरी होती है? मुझे कुछ भी नहीं पता था। जो लड़का मुझसे शादी करना चाहता था वह अपने साथ लहंगा भी लेकर आया था।”
इस एरिया में बाल विवाह एक गंभीर मुद्दा है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सुजाता सुभदर्शनी ने बताया कि, “पहले बाल विवाह को कोई गंभीरता से नहीं लेता था और बाल विवाह होना एक आम बात थी। मैं सभी को बाल विवाह और कम उम्र में गर्भधारण करने के खतरों के बारे में सचेत करती थी। लोगों को जागरुक करने के लिए मैं घर-घर जाकर बताती थी कि छोटी उम्र में शादी करके बच्चे पैदा करोगी तो बच्चा मृत पैदा होगा और इंफेक्शन से मां की जान भी चली जाएगी। लेकिन कोई मेरी बात नहीं सुनता था।”
अद्भूत है अद्विका
वर्ष 2019 मेंयूनिसेफ के सहयोग से ओडिशा सरकार ने बाल विवाह समाप्त करने की पहल की। राज्य में 2030 तक बाल विवाह को खत्म करने के लिए पांच वर्षीय (2019-24) रणनीतिक कार्य योजना (एसएपी) शुरू की गई।इस योजना में विभिन्न विभाग, समाज, समुदाय, परिवार, किशोर और बच्चे शामिल हैं। इसी मुहिम के तहत अक्टूबर 2020 में अद्विका अभियान शुरू किया गया।
“पहले लड़कियों को यहां बोझ समझा जाता था और परिजन जल्द से जल्द बाल विवाह करवा कर उससे छुटकारा पाना चाहते थे। परिजनों को मानना था कि जितनी जल्दी हो बेटी का ब्याह करके गंगा नहा लेना चाहिए।''
आबिदा परवीन, जिला समन्वयक, समाज कल्याण विभाग, ओडिशा।
अद्विका का मकसद रणनीतियां बनाकर बाल विवाह को रोकना है। इसके लिए राज्य संरचनाओं और तंत्रों को मजबूत करना, विभिन्न विभागों के बीच बैठकें और चर्चाएं सुनिश्चित करना, बाल संरक्षण मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाना, किशोरों को सशक्त बनाना और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना शामिल हैं।
अदविका योजना के तहत लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए मल्टी सेटक्टर टास्क फॉर्स तैयार की गई हैं। जिला और उप जिला प्रणालियों को बेहतर बनाने के लिए उनकी क्षमता बढ़ाने पर कार्य किया जा रहा है। लड़कियों को सशक्त व शिक्षित बनाने के लिए प्रशिक्षण पैकेज निर्धारित किया गया है। इसके लिए पर्याप्त संसाधनों को बांटा गया है और सभी कार्यों को सुचारु रुप से कार्यान्वित कराने के लिए राज्य स्तर पर संचालन समिति की स्थापना की गई है।
इस मुहिम के तहत किशोरों की शिक्षा, कौशल विकास, लीडरशिप ट्रेनिंग आदि के जरिए उन्हें सशक्त बनाने पर ध्यान दिया जाता है। सामुदायिक जुड़ाव में उनकी भागीदारी बढ़ाने और नागरिक जुड़ाव के लिए प्लेटफॉर्म मुहैया कराए जाते हैं।
बाल विकास संरक्षण अधिकारी सोनप्रभा दास बताती हैं कि, “यूनिसेफ और एसएनटी की मदद से हमने राज्य में जागरूकता अयान चलाए। अपने कर्मचारियों और श्रामिकों को प्रशिक्षण दिया। अद्विका क्लब और सखी सहेली जैसी हालिया सरकारी योजनाओं में हम लैंगिक असमानता को कम करने के लिए लड़कों को भी शामिल करते हैं।”
अद्विका एक सामाजिक जिम्मेदारी
सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में अद्विका सभी वर्गों, सभी समुदायों को एक साथ लाकर रखा कर देती है और बाल विवाह को समाप्त करने के लिए उन्हें सशक्त बनाती है।
हालाँकि, कई बार समुदाय इस बात को स्वीकार नहीं करना चाहते कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों के लिए विरूद्ध है। अपने बच्चों पर अपना अधिकार समझने वाले अभिभावकों को यह समझाना किसी चुनौती से कम नहीं।
सरपंच (ग्राम प्रधान) सस्मिता कुमारी बताती हैं कि, “आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (एडब्ल्यूडब्ल्यू) घरों में जाती थीं और लोग उनके साथ बहुत बुरा व्यवहार करते थे। वे उन्हें अपशब्द बोलकर परेशान करने के साथ साथ कई बार मारपीट जैसे कदम उठाकर हिंसक प्रतिक्रिया देते थे।”
ऐसे में सरपंच ने स्वयं आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के साथ घर-घर जाने का जिम्मा उठाया। अब, यदि बाल विवाह का कोई मामला सामने आता है, तो वे जानते हैं कि वे सहायता पाने के लिए उनसे संपर्क कर सकते हैं।
सस्मिता बाल विवाह के खतरों और परिणामों को दोहराने के लिए अपने समुदाय में रैलियां निकालती है और लोगों को आगाह करती है। वह बताती हैं कि,“रैलियों के जरिए हम अपने समाज की अधिक से अधिक समस्याओं को उजागर करते हैं। हम लोगों को अपने छोटे बच्चों की शादी न करने के लिए जागरुक करते हैं। उन्हें बताते हैं कि यदि वे इसकी उपेक्षा करेंगे, तो इसे गैरकानूनी और अपराध माना जाएगा।”
वह बताते हैं कि “जब मैं इस मुहिम से जुड़ा, तो हमें किशोर लड़कियों और उनके माता-पिता के साथ एक संयुक्त बैठक भी करनी पड़ी। हम बच्चों और उनके माता-पिता सभी को एकसाथ मीटिंग करके बच्चों का कम उम्र में बाल विवाह का विरोध करते हैं।
हम इसमें बच्चों को शामिल करते हैं, ताकि वह स्वयं भी बाल विवाह के बाद होने वाले खतरों के प्रति जागरुक हो सकें। पीटीए बैठक में, हम विशेष रूप से माता-पिता को शामिल करते हैं और इसके सकारात्मक और नकारात्मक पहलुओं को समझाते हैं।
अधिकारों के हक में आवाज उठाती अद्विका
अद्विका के प्रयासों से अब गोपालपुर बाल विवाह मुक्त हो चुका है। हालाँकि अभी भी एकआध मामला सामने आ जाता है। यहां जो प्रणाली लागू की गई है वह तुरंत प्रभाव के साथ बाल विवाह रोकने पर जोर देती है।
“राज्य में बाल विवाह रोकने में अद्विका का योगदान सबसे ज्यादा है। अब हर शनिवार को आंगनवाड़ी केंद्रों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में हिस्सा लेने वाली महिलाएं हों या स्कूल के बाहर खड़ी होकर आपस में बातचीत करने वाली छात्राएं हों। अब सभी यहां बाल विवाह जैसे मुद्दे पर खुलकर चर्चा करती हैं। अब महिलाओं व लड़कियों के बीच कम उम्र से होने वाली शादी के बाद लड़की के शरीर व दिमाग पर होने वाले दुष्प्रभावों की चर्चा खुलेआम होती है। इससे भी बाल विवाह पर एक हद तक अंकुश लगा है।
लड़कियों के जीवन में सुखद बदलाव लाई अद्विका पहल
अद्विका पहल से 2.5 मिलियन से अधिक किशोर जुड़े हुए हैं। इसके लिए 448,000 से अधिक फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया है, जिनमें 300,000 से अधिक सहकर्मी नेता शामिल हैं, जिन्हें सखी-सहेलियों और सखा-बंधु के नाम से जाना जाता है, जिन्हें बाल विवाह, दुर्व्यवहार, बाल श्रम, बाल तस्करी और बाल यौन उत्पीड़न सहित बाल अधिकारों और संरक्षण के मुद्दों को पहचानने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। उन्होंने नेतृत्व, संचार और जीवन कौशल में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इसके अलावा बाल संरक्षण मुद्दों पर प्रगति की समीक्षा के लिए 'बच्चों के लिए एक दिन' नामक नियमित त्रैमासिक बैठकें आयोजित की जाती हैं।
प्रदेश में अब 11,000 से अधिक गांवों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है। 2022 में, लगभग 950 बाल विवाह रोके गए थे। इस पहल को 2020-21 में गवर्नेंस और इनोवेशन के लिए SKOCH (गोल्ड) अवार्ड से सम्मानित किया गया था।
“लोगों की सोच बदलने के लिए यह जरुरी है कि अद्विका जैसे कार्यक्रम सभी गांवों में चले। लड़की बोझ है और बोझ से छुटकारे के लिए उसकी शादी कर दो, लोगों को अपनी यह सोच बदलनी होगी। क्योंकि, ऐसी मानसिकता पुरे समाज को खोखला करती है।
आशा अपने दोस्तों के बीच खड़े होकर जुनून से कहती है कि, “हमें यह साबित करके दिखाना होगा कि लड़की किसी लड़के से कम नहीं है। वह वही काम कर सकती है जो एक लड़का कर सकता है। वह नौकरी पा सकती है, परिवार चला सकती है और अपने लिए भविष्य बना सकती है।”
सस्मिता ने बाल विवाह जैसी कुप्रथा के कारण अपनी सबसे अच्छी दोस्त को खो दिया। वह इस दर्द को अच्छे से समझती है। वह बताती है कि, “एक बच्चे को बड़ा करके के लिए महज एक परिवार की नहीं, बल्कि एक गांव की भी भागीदारी होती है। जिसमें पड़ोसी, शिक्षक, अभिभावक, सभी शामिल होते हैं। इसके बाद ही एक बच्चा अच्छे से विकसित हो पाता है। बच्चे को समृद्धि और विकास के लिए सभी के आशीर्वाद की जरुरत होती है।”