मध्य प्रदेश में उम्मीद और बदलाव का एक सफर

पहली फील्ड विजिट में देखा कैसे भोपाल में नवजात देखभाल से लेकर बाल संरक्षण तक सरकार, स्वास्थ्यकर्मी और समुदाय मिलकर हर बच्चे को बेहतरीन शुरुआत देने में जुटे

जेस्पर मोलर, डिप्टी रिप्रेजेंटेटिव, प्रोग्राम्स, यूनिसेफ इंडिया
UNICEF officials and hospital staff in navy blue and lavender gowns gather around a mother resting under a blanket in the Mother and Newborn Care Unit. Jesper Moller, UNICEF India's Deputy Representative for Programs, is present, with medical equipment visible in the background.
UNICEF Jesper Moller, Deputy Representative – Programmes, UNICEF India, visits the Mother and Newborn Care Unit (MNCU) in Gandhi Medical College, Bhopal. The MNCU uses a zero-separation approach, keeping mothers and newborns together to encourage maternal involvement in their care.
29 जुलाई 2026

पिछले महीने यूनिसेफ इंडिया से जुड़ने के बाद भारत के हृदय में बसे मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का यह मेरा पहला फील्ड मिशन था, और इसने मुझे ज़मीनी स्तर पर महिलाओं और बच्चों की भलाई के लिए हो रहे कामों की गहराई को दिखाया।

वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर स्वास्थ्यकर्मियों तक, हर मुलाकात में महिलाओं और बच्चों की ज़िंदगी बदलने के लिए किए जा रहे ईमानदार और प्रयास साफ नज़र आए। 

हमने कई तरह की ज़मीनी पहलें देखीं, जो एक ही साझा मकसद से जुड़ी थीं। सरकार और समुदाय मिलकर बच्चों को बेहतरीन शुरुआत देने और उनके जीवित रहने व फलने फूलने के बेहतर मौके देने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

Jesper Moller, Deputy Representative – Programmes, UNICEF India, watches as a senior doctor in a saree lifts the foil cover from a meal tray with rice, dal, vegetables, and curd in a pediatric ward, surrounded by doctors, nurses, and medical staff in white coats and scrubs, with children's ward decorations in the background.
UNICEF Jesper Moller, Deputy Representative – Programmes at UNICEF India, visits the Nutrition Rehabilitation Centre at AIIMS Bhopal, where he observes a therapeutic meal for children with Severe Acute Malnutrition. The centre supports complicated malnutrition cases and rehabilitation efforts across Madhya Pradesh.
माँ की गोद की ताकत

भोपाल से 85 किलोमीटर उत्तर पश्चिम में स्थित नरसिंहगढ़ से रेफर की गई एक बच्ची को साँस लेने में तकलीफ थी, और उसका इलाज सीपीएपी यानी कंटीन्यूअस पॉज़िटिव एयरवे प्रेशर तकनीक से किया गया।

चिकित्सा उपचार से परे एक बच्चे को अपनी माँ के स्पर्श को महसूस करना भी उतना ही ज़रूरी था। डॉक्टरों ने बताया कि एमएनसीयू में देखभाल मिलने के बाद से बच्ची की सेहत में काफी सुधार आया है। अपनी बेटी के पास लेटी समिता के चेहरे पर राहत भरी मुस्कान थी, वो खुश थीं कि पूरे इलाज के दौरान वो अपने बच्चे के पास रह सकीं।

इसी वार्ड में हमारी मुलाकात आरती से हुई, जो जुड़वां बच्चों की माँ हैं। जन्म के बाद उन्हें मैटरनल एंड नियोनेटल केयर यूनिट में भर्ती किया गया था, और अब वो धीरे-धीरे ठीक हो रही हैं।

"जुड़वां बच्चों का होना हमारे परिवार के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इलाज के दौरान हर दिन अपने बच्चों के साथ रहकर उन्हें देखती हूं, तो मुझमें उनकी देखभाल करने का हौसला आता है। डॉक्टर और नर्स हमेशा हमारे साथ खड़े रहते हैं, जब भी ज़रूरत हो हमारा मार्गदर्शन करते हैं।"

आरती

एमएनसीयू यूनिट का असली मकसद यही है, यहां ज़ीरो सेपरेशन का मतलब है कि इलाज के दौरान माँ को बच्चे से अलग नहीं किया जाता, बल्कि वो देखभाल में बराबर की भागीदार होती है।

पीडियाट्रिक्स विभाग की प्रमुख डॉ मंजूषा गोयल ने इसे कुछ यूँ समझाया कि, "एमएनसीयू में माँएं मेहमान नहीं होतीं, वो केयरगिवर होती हैं। हमारा काम है उन्हें सहारा देना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें अपने बच्चों की देखभाल में एक सक्रिय भागीदार बनाना।"

कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे

ज़मीनी स्तर पर दिख रही इस प्रगति को मज़बूत नेतृत्व का भी पूरा साथ मिल रहा है। यूनिसेफ टीम को मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मिलने का मौका मिला।

हमने मातृ और शिशु स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में राज्य के द्वारा किये जा रहे लगातार प्रयासों की चर्चा की। खास तौर पर शिशु और मातृ मृत्यु दर घटाने की रणनीतियों को और मज़बूत करने पर। उनका यह कहना कि "कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे" एक ऐसा संदेश था, जिसने मध्य प्रदेश में महिलाओं और बच्चों की जान बचाने की दिशा में भरोसा और उम्मीद दोनों जगाई।

Jesper Moller, the Deputy Representative for Programmes at UNICEF India, bends down with a warm smile to admire a drawing presented to him by a cheerful young boy in a pediatric ward. The child's mother and hospital staff, including doctors in white coats, watch happily in the background.
UNICEF A young boy proudly shows his drawing to Jesper Moller, UNICEF India's Deputy Representative, during a visit to the Nutrition Rehabilitation Centre at AIIMS Bhopal. Beyond therapeutic feeding, play and creative activities support children's recovery and overall development.
एम्स भोपाल का तकनीकी केंद्र

एम्स भोपाल के रीजनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन, रिसोर्स एंड ट्रेनिंग की विजिट में मैंने देखा कि गंभीर रूप से कुपोषित यानी सैम बच्चों के जटिल मामलों में किस तरह क्लीनिकल और थेरैप्यूटिक देखभाल दी जा रही है। 

इन बच्चों को सैम एडवांस्ड ट्रीटमेंट एंड रिसर्च यानी स्मार्ट यूनिट के ज़रिए उचित देखभाल मिल रही है। यह केंद्र पूरे मध्य प्रदेश में न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटरों को मार्गदर्शन और सहायता भी देता है।

एम्स के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग में स्थापित यह स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस राज्य की गंभीर कुपोषण के खिलाफ लड़ाई की रीढ़ है। यह खंडवा और नर्मदापुरम जैसे दो सघन ज़िलों में आंगनवाड़ी केंद्रों को गुणवत्तापूर्ण कम्युनिटी बेस्ड मैनेजमेंट ऑफ एक्यूट मालन्यूट्रिशन यानी सीएमएएम कार्यक्रम चलाने में सीधी मदद देता है।

एम्स मध्य प्रदेश भर में कम्युनिटी आधारित पोषण कार्यक्रमों को मज़बूत करने के लिए ज़रूरी तकनीकी विशेषज्ञता तैयार करने में मदद करता है। यह पहल दिखाती है कि जब नवाचार और साझा ज्ञान एक साथ आते हैं, तो बच्चों के लिए बेहतर और स्वस्थ नतीजे सामने आते हैं।

सुरक्षित और मज़बूत समुदायों का निर्माण

असली बदलाव सिर्फ अच्छी नीतियों से नहीं आता, इसके लिए ऐसे समुदाय चाहिए जो परवाह करें, ऐसा नेतृत्व चाहिए जो सुने, और ऐसी साझेदारियाँ चाहिए जो लोगों को साथ लेकर चले।

यह बात भोपाल की सेफ सिटी इनिशिएटिव के तहत काम कर रहे नगर निगम अधिकारियों, वार्ड पार्षदों और सिविल सोसाइटी संगठनों से बातचीत में साफ दिखी। यूनिसेफ की मदद से बनी यह साझेदारी साबित करती है कि बच्चों के लिए सुरक्षित और पोषक माहौल बनाना एक साझा ज़िम्मेदारी है, जो स्थानीय टीमवर्क से ही फल-फूल सकती है।

Jesper Moller, Deputy Representative Programmes, UNICEF India, and Soledad Herrero, Chief of Field Services, alongside Madhya Pradesh government officials, present the booklet 'बाल विवाह रोकथाम' (Child Marriage Prevention) at a meeting in Bhopal.
UNICEF Jesper Moller and Soledad Herrero from UNICEF India joined Madhya Pradesh government officials to release report on ending child marriage in Bhopal. This resource aims to enhance efforts against child marriage and reflects the joint commitment to safeguarding children's rights.

वहाँ हमारी मुलाकात 13 साल की आस्था से हुई, जिसकी ज़िंदगी सरकारी एजेंसियों और सिविल सोसाइटी संगठनों की साझा कोशिशों से पूरी तरह बदल गई। कुछ साल पहले तक वो और उसका परिवार सड़क किनारे मुश्किल हालात में रहते थे।

आस्था को समय पर मदद दी गई और लगातार सहयोग से उसे ज़रूरी सेवाओं से जोड़ा गया, और उसका स्कूल में दाखिला करवाया गया। अपनी उम्र के बाकी बच्चों के मुकाबले पढ़ाई देर से शुरू करने के बावजूद आस्था ने बड़े गर्व से बताया कि अब वो चौथी कक्षा में है, और अपने से छोटी उम्र के साथियों के साथ पूरे आत्मविश्वास और लगन से पढ़ रही है।

आस्था की बात सुनकर मुझे याद आया कि जब बच्चों को सीखने का सही मौका मिलता है, तो वो खुद में ऐसी क्षमता खोज लेते हैं जो कभी नामुमकिन सी लगती थी। एक नया मौका, जब उसमें सहानुभूति और उनकी क्षमताओं पर भरोसा भी जुड़ जाए, तो सिर्फ एक बच्चे का भविष्य नहीं बल्कि पूरे परिवार की कहानी बदल सकता है।

मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि कैसे कम्युनिटी पुलिसिंग महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा का एक मज़बूत ज़रिया बन गई है, न सिर्फ हिंसा पर प्रतिक्रिया देकर बल्कि उसे रोककर भी। इस बातचीत ने यह भी उजागर किया कि बदलाव तभी सच में टिकाऊ बनता है जब समुदाय खुद उस समाधान का हिस्सा बनते हैं।

आगे की साझा सोच

मध्य प्रदेश से लौटते हुए मेरे मन में उम्मीद थी कि हमने जिन जगहों का दौरा किया और जिन लोगों से मुलाकात हुई, उनमें समर्पित सरकारी अधिकारी, निष्ठावान स्वास्थ्यकर्मी, सक्रिय समुदाय के नेता, बच्चे, महिलाएं, जुनूनी साझेदार और वो समुदाय शामिल थे जिन्हें ये सेवाएं मिल रही हैं।

अपनी-अपनी भूमिकाओं में सब एक साझे मकसद से जुड़े हुए हैं। हर बच्चे को बेहतरीन शुरुआत पाने का अधिकार है। यूनिसेफ को मध्य प्रदेश सरकार के साथ इस अहम सफर में शामिल होने पर गर्व है।

ब्लॉग के बारे में

यूनिसेफ अपने हर काम में प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देता है। अपने साझेदारों के साथ मिलकर, यूनिसेफ बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित बचपन को व्यावहारिकता में बदलने के लिए 190 देशों और क्षेत्रों में काम कर रहा है।

यूनिसेफ इंडिया के और इसके कामों के बारे में अधिक जानकारी के लिए https://www.unicef.org/india/hi पर विजिट करें।

आप हमें ट्विटरफेसबुकइंस्टाग्राम, लिंक्डइन, यूट्यूब और गूगल प्लस पर फॉलो कर सकते हैं।

हमारे काम का अन्वेषण करें