यूनिसेफ इंडिया, पीआईबी पश्चिमी क्षेत्र और एम्स नागपुर ने बाल एनसीडी रिपोर्टिंग मज़बूत करने के लिए दो दिवसीय मीडिया कार्यशाला संपन्न की

एम्स नागपुर के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में मीडियाकर्मियों ने बच्चों में गैर संचारी रोगों की देखभाल को नज़दीक से जाना

17 जुलाई 2026
Group photograph from a two-day media workshop on childhood non-communicable diseases at AIIMS Nagpur, featuring around 45 participants, including journalists and health experts. Most are wearing blue lanyards with badges, some holding certificates, with branded standees on display.
UNICEF Media persons from Western India, along with officials from UNICEF India, the Press Information Bureau (Western Zone), and AIIMS Nagpur, at the conclusion of the two-day media capacity-building workshop on childhood non-communicable diseases (NCDs), held at AIIMS Nagpur on July 13–14, 2026.

नागपुर – बच्चों में होने वाले गैर संचारी रोगों यानी एनसीडी पर रिपोर्टिंग को मज़बूत बनाने के मकसद से पश्चिमी भारत के 30 से ज़्यादा मीडियाकर्मी एक साथ आए। यह दो दिवसीय मीडिया क्षमता निर्माण कार्यशाला आज एम्स नागपुर में संपन्न हुई।

इस कार्यशाला का आयोजन यूनिसेफ इंडिया, प्रेस सूचना ब्यूरो पश्चिमी क्षेत्र और एम्स नागपुर ने मिलकर किया। कार्यशाला के दौरान मीडियाकर्मियों को यह सीधे तौर पर देखने और समझने का मौका मिला कि बच्चों में एनसीडी की पहचान, इलाज और देखभाल कैसे की जाती है, साथ ही स्वास्थ्य रिपोर्टिंग को बेहतर बनाने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।

कार्यशाला का मकसद 5 से 9 साल के बच्चों और 10 से 19 साल के किशोरों में बढ़ते एनसीडी के खतरे को उजागर करना था। पश्चिमी और मध्य भारत के आदिवासी और ग्रामीण इलाकों में बच्चों में एनसीडी अक्सर जांच और विशेषज्ञ इलाज की सीमित पहुंच के साथ साथ सामने आते हैं, वहीं शहरी इलाकों में मोटापा, डायबिटीज़ और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियां भी उतनी ही तेज़ी से बढ़ रही हैं, जिसकी वजह है कम शारीरिक गतिविधि, स्क्रीन पर बीतता ज़्यादा समय और बदलती खानपान की आदतें। चाहे ग्रामीण इलाका हो, आदिवासी क्षेत्र हो या शहर, बच्चों की यह बीमारियां अक्सर तब तक पकड़ में नहीं आतीं जब तक जटिलताएं सामने न आ जाएं।

इस मौके पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रेस सूचना ब्यूरो पश्चिमी क्षेत्र की महानिदेशक स्मिता वत्स शर्मा ने कहा कि, "जन स्वास्थ्य से जुड़ी रिपोर्टिंग जागरूकता और जन कार्रवाई दोनों को आकार देती है। पत्रकारों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वो साक्ष्य आधारित जानकारी सामने लाएं और ऐसी कहानियां बताएं जो नागरिकों को बच्चों को प्रभावित करने वाली उभरती स्वास्थ्य चुनौतियों को समझने में मदद करें।"

"बच्चों में गैर संचारी रोगों की जड़ें बचपन से ही जुड़ी होती हैं और इनका असर लंबे समय बाद दिखता है, इसलिए समय पर पहचान, लगातार देखभाल और मज़बूत सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था की मांग करना बेहद ज़रूरी है। एम्स नागपुर ऐसे देखभाल मॉडल विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है जिन्हें पूरे देश में लागू किया जा सके। मीडिया परिवारों को लक्षण जल्दी पहचानने और समय पर इलाज कराने के लिए प्रोत्साहित करने में मदद कर सकता है।"

डॉ प्रशांत जोशी, कार्यकारी निदेशक, एम्स नागपुर

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के डीजीएचएस में एडीजी डॉ तुषार एन नाले ने सरकार के एनसीडी कार्यक्रम की जानकारी दी।

यूनिसेफ इंडिया की कम्युनिकेशन, एडवोकेसी और पार्टनरशिप प्रमुख ज़फरीन चौधरी ने कहा कि, "जब मीडिया बच्चों में होने वाले गैर संचारी रोगों पर सटीक और संवेदनशील तरीके से रिपोर्ट करता है, तो यह एक छुपे हुए मुद्दे को सामने लाता है, समय पर पहचान को बढ़ावा देता है, इससे जुड़ी कलंक की भावना को चुनौती देता है, और यह भी बताता है कि इन बीमारियों को रोका और ठीक किया जा सकता है। 

यूनिसेफ को पीआईबी, एम्स महाराष्ट्र और पत्रकारों के साथ मिलकर इन कहानियों को सामने लाने पर गर्व है। साथ मिलकर हम लोगों को जागरूक कर सकते हैं, कार्रवाई के लिए प्रेरित कर सकते हैं और बच्चों को जीवित रहने और फलने फूलने में मदद कर सकते हैं।"

इस साल की शुरुआत में महाराष्ट्र सरकार ने यूनिसेफ इंडिया के रणनीतिक सहयोग से एम्स नागपुर के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे, ताकि राज्य भर में बच्चों में गैर संचारी रोगों की रोकथाम और प्रबंधन को मज़बूत किया जा सके। इस साझेदारी के तहत एम्स नागपुर को इस काम के लिए तकनीकी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में स्थापित किया गया है।

यूनिसेफ महाराष्ट्र प्रमुख संजय सिंह ने कहा कि, "बच्चों में गैर संचारी रोगें अब दुर्लभ मामले नहीं रह गई हैं। यह एक उभरती हुई सार्वजनिक स्वास्थ्य प्राथमिकता बन चुकी हैं। एम्स नागपुर और महाराष्ट्र सरकार के साथ हमारी साझेदारी के ज़रिए, हम समय पर पहचान, रेफरल व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण देखभाल को मज़बूत करने पर काम कर रहे हैं ताकि हर बच्चे को ज़रूरी सहयोग मिल सके।"

कार्यशाला की एक खास बात एम्स नागपुर के बाल एनसीडी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की विजिट रही, जहां पत्रकारों ने डॉक्टरों, बच्चों और उनके देखभालकर्ताओं से मुलाकात की और लंबे समय तक चलने वाली देखभाल की असली तस्वीर को करीब से देखा। पत्रकारों ने एक इंटरैक्टिव क्विज़ में भी हिस्सा लिया जिसने बाल एनसीडी की उनकी समझ को परखा और मज़बूत किया, साथ ही समूहों में काम करते हुए उन्होंने ऐसे कहानी के आइडिया और रिपोर्टिंग एंगल भी तैयार किए जिन्हें वो अपने अपने न्यूज़रूम तक ले जा सकें।

कार्यशाला की शुरुआत एक परिचयात्मक सत्र से हुई, जिसमें एम्स नागपुर के पीडियाट्रिक्स विभाग की प्रोफेसर और हेड डॉ मीनाक्षी गिरीश ने बाल एनसीडी को समझने पर एक जानकारीपूर्ण संबोधन दिया।

कार्यशाला में भारत सरकार के उन संसाधनों पर भी रोशनी डाली गई जो मीडियाकर्मियों को स्वास्थ्य रिपोर्टिंग में मदद कर सकते हैं, और यह भी बताया गया कि पत्रकार कैसे पीआईबी का इस्तेमाल करके कई भाषाओं में नियमित और अपडेटेड स्वास्थ्य संबंधी सामग्री हासिल कर सकते हैं। खास ज़ोर दिया गया मंत्रालयों के आसानी से उपलब्ध संसाधनों पर, जैसे एनएफएचएस और एसआरएस सर्वेक्षण, पोषण ट्रैकर वेबसाइट और अन्य।

यह कार्यशाला एक लगातार चलने वाली पहल की शुरुआत है जो सितंबर 2026 में होने वाले एनसीडी सप्ताह तक जारी रहेगी। आने वाले महीनों में शामिल पत्रकारों को डेटा, विशेषज्ञों के संपर्क और कहानी के सुझाव लगातार मिलते रहेंगे, और वो अपनी प्रकाशित रिपोर्ट्स को एक खास ऑनलाइन डैशबोर्ड पर साझा भी कर सकेंगे। चुनिंदा रिपोर्टिंग को मुंबई में एनसीडी सप्ताह के दौरान होने वाले एक बड़े आयोजन में प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें 20 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

यह पहल बच्चों में गैर संचारी रोगों को लेकर लोगों की समझ बेहतर बनाने और साक्ष्य आधारित स्वास्थ्य रिपोर्टिंग को मज़बूत करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है।

मीडिया संपर्क

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Communication Specialist
UNICEF
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Sonia Sarkar
Communication Officer (Media)
UNICEF
टेल: +91-981 01 70289
ईमेल: [email protected]

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