जल, सफाई एवं स्वच्छता

हम सरकार और सहयोगियों के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए कार्य करते हैं कि भारत में प्रत्येक बच्चे को साफ़ पानी तथा मूलभूत शौचालय उपलब्ध हो और वे स्वच्छता व्यवहार का अभ्यास करें |

A girl cups her hands under a tap and drinks clean water
UNICEF/UN0274895/Panjwani

स्थायी वॉश प्रोग्रामिंग को मजबूत करना

भारत ने देशभर में खुले में शौच को खत्म करने में तेज़ प्रगति की है, जिसका पानी, स्वच्छता और हाइजीन (WASH) सुधारने पर बड़ा असर पड़ा है। साल 2015 में, भारत की लगभग आधी आबादी यानी करीब 568 मिलियन लोग शौचालय की सुविधा न होने के कारण खेतों, जंगलों, तालाबों या अन्य सार्वजनिक जगहों पर शौच करने को मजबूर थे।

दक्षिण एशिया में खुले में शौच करने वाले लोगों में 90 प्रतिशत केवल भारत में थे, और यह संख्या दुनिया के कुल 1.2 अरब लोगों का लगभग आधा हिस्सा थी।

यूनिसेफ ने खुले में शौच खत्म करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हुए सभी शहरों और गांवों में गीले और सुखे कचरे का प्रभावी ढंग से विस्तारित किया। साल 2019 तक, ताज़ा अनुमान के अनुसार, शौचालय की सुविधा से वंचित लोगों की संख्या में लगभग 450 मिलियन की कमी आई है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री की अगुवाई में चलाए जा रहे स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) (स्वच्छ भारत अभियान) से संभव हुआ है। 

यूनिसेफ स्वच्छ भारत मिशन का एक गौरवपूर्ण भागीदार रहा है। भारत 2019 के अंत तक देश में खुले में शौच को समाप्त करने की उम्मीद करता है। हालाँकि, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हर समय शौचालयों का लगातार उपयोग हो और स्वच्छता की आदतें बनी रहें। साक्ष्य मौजूद है कि शहर हों या ग्रामीण इलाकें गरीब तबके से आने वाले लोगों को खुले में सोच करने का प्रचालन आम बात है।

हाथ धोने की आदत न होना और घरों व समुदायों में पानी का प्रदूषण, डायरिया और जलजनित बीमारियों के खतरे को और बढ़ा देता है। खुले में शौच की वजह से रोज़ाना बड़ी मात्रा में मल वातावरण में मिल जाता था, जिससे भारत के बच्चे लगातार गंदगी के संपर्क में आते रहे। इसकी वजह से भारत में पाँच साल से कम उम्र के लगभग 1 लाख बच्चों की डायरिया से मौत हो गई थी।

खराब स्वच्छता का असर सिर्फ सेहत पर ही नहीं, बल्कि देश के विकास पर भी पड़ता है। जब लोग बीमार रहते हैं और कम उम्र में ही अपनी क्षमता खो देते हैं, तो उनकी उत्पादकता और आय दोनों घट जाती हैं। इसके चलते वे अपने बच्चों की शिक्षा और बेहतर भविष्य पर निवेश नहीं कर पाते, जिससे गरीबी और असमानता का दुष्चक्र जारी रहता है।

भारत के स्वास्थ्य संस्थानों में पानी, स्वच्छता और हाइजीन (WASH) सेवाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है। यही कमी नवजात शिशुओं की ऊँची मृत्यु दर में योगदान देती है। वर्तमान में भारत में हर 1000 जीवित जन्मों पर लगभग 24 नवजात शिशुओं की मृत्यु हो जाती है।

सेप्सिस – जो मुख्य रूप से स्वास्थ्य संस्थानों में फैलता है – कुल नवजात शिशु मृत्यु दर का लगभग 15 प्रतिशत और मातृ मृत्यु दर का 11 प्रतिशत कारण बनता है। इसके अलावा, खतरे यहीं खत्म नहीं होते, क्योंकि जब यह संक्रमण उन समुदायों तक पहुँचता है जहाँ शौचालय की सुविधा नहीं है, तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। (स्रोत: लैन्सेट रिपोर्ट 2014)

भारत के स्कूलों में रिपोर्ट बताती है कि 22 प्रतिशत स्कूलों में लड़कियों के लिए उपयुक्त शौचालय नहीं थे, 58 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्रों (प्री-स्कूल) में शौचालय ही नहीं था और 56 प्रतिशत प्री-स्कूल में परिसर के भीतर पानी की सुविधा नहीं थी।

(स्रोत: रैपिड सर्वे ऑन चिल्ड्रन 2013-14)

Embedded video follows
UNICEF For 75 years, UNICEF has been at the heart of India’s water revolution—facilitating access to safe drinking water, sanitation, and hygiene #ForEveryChild.

भारत में पानी की रासायनिक अशुद्धियाँ, खासकर फ्लोराइड और आर्सेनिक के कारण, लगभग 19.6 लाख घरों में पाई जाती हैं। वहीं, सुरक्षित पेयजल (जो घर पर उपलब्ध हो, जरूरत पड़ने पर आसानी से मिले और प्रदूषण से मुक्त हो) तक पहुँच अभी भी आबादी के 50 प्रतिशत से कम लोगों को ही है।

इसके अलावा, भारत के 718 जिलों में से दो-तिहाई जिलों में पानी की भारी कमी की समस्या है, और वर्तमान में पानी की सुरक्षा और उपलब्धता की उचित योजना का अभाव एक बड़ी चिंता का विषय है।

समाधान

सहयोग और अभिसरण हमारे भारत देश कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता है, जहां वॉश को एक बच्चे के अस्तित्व, विकास और विकास के सभी पहलुओं में परिणाम के लिए योगदान करने वाले क्रॉस-कटिंग समर्थन के रूप में तैनात किया जाता है, विशेष रूप से कुपोषण और रोके जाने वाले रोगों को रोकने के लिए, नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए, और शिक्षा के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए। 

हम भारत सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रमों का समर्थन करते हैं, जिनमें स्वच्छ भारत मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (NRDWP), स्कूलों में वॉश (जिसमें 'प्री-ऑगनवाडी' कहे जाने वाले पूर्वस्कूली), स्वास्थ्य सुविधाओं में वॉश, और जिले में व्यापक वॉश हस्तक्षेप का समर्थन शामिल है योजना और कार्यान्वयन और व्यवहार को राज्य और राष्ट्रीय दिशानिर्देशों और लागत वाली योजनाओं में बदलना।

Pooja Namdev fetches drinking water supplied by the 900W solar panel which fills up a 5000L tank for 27 families in Kalajahi Thakar Vasti in Kanesar village, Khed, Pune.
UNICEF/UN0278901/Katragadda Pooja Namdev fetches drinking water supplied by the 900W solar panel which fills up a 5000L tank for 27 families in Kalajahi Thakar Vasti in Kanesar village, Khed, Pune.

पिछड़ने वाले राज्यों और जिलों का समर्थन करने के लिए, यूनिसेफ 16 राज्यों और 192 जिलों में काम करता है और तकनीकी रूप से सरकार का समर्थन करता है, वैकल्पिक सेवा वितरण दृष्टिकोणों की सहायता करता है, और वॉश सेवाओं के आसपास निजी क्षेत्रों सहित सार्वजनिक संस्थानों और भागीदारों को जुटाता है। 

हमने ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों में अपने कार्यक्रम का विस्तार करना शुरू कर दिया है, जहां शहरी गरीबों को अक्सर स्वच्छता समीकरण से बाहर रखा जाता है। यूनिसेफ भी निगरानी और मूल्यांकन का समर्थन करता है जिसमें मंत्रालय जल शक्ति द्वारा आयोजित वास्तविक समय की निगरानी और सूचना डैशबोर्ड को प्रमाणित करने में मदद करने के लिए तृतीय-पक्ष सत्यापन और स्पॉट चेक आयोजित करना शामिल है।

संसाधन

दक्षिण एशिया के स्कूलों में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन

यह रिपोर्ट भारत में MHM का एक देश स्नैपशॉट देती है।

पूरी रिपोर्ट देखें

स्वच्छता का स्वास्थ्य और सुरक्षा पर संभावित प्रभाव

यह साक्ष्य की समीक्षा पहले से किए गए शोध से निकलती है और विशेष रूप से सबसे गरीब और सबसे कमजोर लोगों के स्वास्थ्य और भलाई में सुधार पर स्वच्छता उपलब्धियों के

पूरी रिपोर्ट देखें

जल, मिट्टी और भोजन पर स्वच्छ भारत मिशन (एसबीएम) के पर्यावरणी

यूनिसेफ और पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय, श्री राम संस्थान के समर्थन से, एक मूल्यांकन किया।

पूरी रिपोर्ट देखें

खुले में शौच से मुक्ति का प्रभाव

सतत विकास लक्ष्यों (एस डी जी) ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और क्षमता निर्माण के लिए संकल्प लिया है |

पूरी रिपोर्ट देखें