स्वच्छ पेयजल

हर बच्चे के लिए सभी परिस्थितियों में जीवित रहने के तरीके और बेहतर नतीजे सुनिश्चित करना।

A child drinking water from water tab at his school in western Indian state of Maharashtra.
UNICEF/UN016418/Dhiraj

सुरक्षित जल आपूर्ति एक स्वस्थ अर्थव्यवस्था का आधार होती है, लेकिन फिर भी दुर्भाग्यवश विश्व स्तर पर इसे प्रमुखता नहीं दी गई है।

अनुमान के अनुसार जल से होने वाले रोगों के लिए भारत पर प्रति वर्ष लगभग 42 अरब रुपये का आर्थिक बोझ है। यह विशेष रूप से सूखे और बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों की एक कड़वी सच्चाई है, जिसका देश के एक तिहाई हिस्से पर पिछले कुछ वर्षों से असर पड़ा है।

भारत में 50% से भी कम आबादी के पास पीने का सुरक्षित पानी उपलब्ध है। 1.96 करोड़ आवासों में मुख्य रूप से फ्लोराइड और आर्सेनिक के माध्यम से पानी का रासायनिक संदूषण मौजूद है।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के अनुसार, भारत में अतिरिक्त फ्लोराइड 19 राज्यों में करोड़ों लोगों को प्रभावित कर रहा है, जबकि समान रूप से चिंताजनक बात यह है कि अतिरिक्त आर्सेनिक अकेले पश्चिम बंगाल में 1.5 करोड़ लोगों को प्रभावित कर रहा है।

इसके अलावा, भारत के 718 जिलों के दो-तिहाई हिस्से पानी की अत्यधिक कमी से प्रभावित हैं। वर्तमान में पानी की सुरक्षा और इसके लिए योजना की कमी एक प्रमुख चिंता का विषय है।

भारत को भूजल का दुनिया का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता माना जाता है। हालांकि, पिछले कुछ दशकों में बोरिंग के अत्यधिक इस्तेमाल के कारण इस स्त्रोत में तेज़ी से कमी हो रही है। 3 करोड़ से अधिक भूजल आपूर्ति केंद्रों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पीने के पानी की 85 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 48 प्रतिशत आवश्यकताओं की पूर्ति होतीहै।(स्रोत: जे एम पी 2017)

सभी बच्चों को स्वच्छ पानी और बुनियादी स्वच्छता का अधिकार है, जैसा कि बाल अधिकारों पर सम्मेलन (कंवेशन ऑन द राइट्स ऑफ अ चाइल्ड) में उल्लेख किया गया है। पानी, सफाई और स्वच्छता (वॉश) में यूनिसेफ के कार्य का अंतिम उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सभी बच्चों को यह अधिकार मिलता हो तथा कोई भी बच्चा इससे पीछे न रहे।

जब परिवारों के पास सुरक्षित और उचित जल स्रोत नहीं होते है, जो उनके घर तक स्वच्छ जल पहुँचाए। आमतौर पर देखा गया है कि पानी इकट्ठा करने की ज़िम्मेदारी घर की महिलाओं और बच्चों की ही होती है।

जब बच्चे पानी भरने के लिए घंटों गुजारते हैं तो स्कूलों में उनकी उपस्थिति स्वयं ही कम हो जाती है। सूखा-प्रभावित राज्यों में स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में 22% की वृद्धि दर्ज की गई है। तकरीबन 54% ग्रामीण महिलाओं के साथ-साथ कुछ किशोर लड़कियां - अनुमानित तौर पर हर दिन पानी इकट्ठा करने के लिए 35 मिनट खर्च करती हैं, जो साल में 27 दिनों की मजदूरी के नुकसान के बराबर है।(स्रोत: एनालिसिस ऑफ़ द सिचुएशन ऑफ़ चिल्ड्रेन, एडोलैसैंट्स एंड वीमेन इन इंडिया 2016)

वर्ष 2015 में, भारत ने ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर जलापूर्ति की दिशा में 93% तक पहुँच की व्याप्ति को हासिल कर लिया है। हालांकि, सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों (एमडीजी) से सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) में बदलाव के साथ, नई आधार-रेखा का अनुमान है कि 49 प्रतिशत से कम ग्रामीण आबादी सुरक्षित रूप से प्रबंधित पेयजल का उपयोग कर रही है (परिसर में स्थित बेहतर जल आपूर्ति की उपलब्धता, जो आवश्यकतानुसार सुलभ और संदूषण से मुक्त हो)। (स्रोत: जे एम पी 2017)

स्वजल का समर्थन: भारत में प्रत्येक बच्चे को स्वच्छ जल उपलब्ध कराना

साल 2019 में, प्रधानमंत्री श्री मोदी के फिर से चुने जाने के बाद, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय का पुनर्गठन एक नए मंत्रिस्तरीय अंग के तहत किया गया। इसके तहत पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय के जनादेश को एक नए मंत्रालय का एक स्तंभ बनाया गया, जिसका नाम जल शक्ति (अर्थात “पानी की ताकत”) रखा गया।

एक ओर जहां स्वच्छता प्राथमिकता है, वहीं चौबीसों घंटे पाइप लाइन जलापूर्ति के प्रावधान पर भी ध्यान दिया जा रहा है। यूनिसेफ भारत सरकार के लिए 'पसंदीदा विकास भागीदार' रहा है, और हमने भारत सरकार के प्रमुख राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के पुनरूद्धार और कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

जल शक्ति मंत्रालय के साथ यूनिसेफ के निरंतर पक्ष-समर्थन, तकनीकी सहायता और सहभागिता के परिणामस्वरूप भारत सरकार के नए एजेंडे में सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता उच्च प्राथमिकता पर हैं। यूनिसेफ वर्तमान में जल शक्ति अभियान और जल जीवन अभियान पर जल शक्ति मंत्रालय के साथ मिलकर काम कर रहा है।

यूनिसेफ एनआरडीडब्ल्यूपी के समर्थन में जल सुरक्षा और सुरक्षा योजना सहित सामुदायिक प्रबंधित पेयजल पर विशेष ध्यान देता है। संस्थागत स्तर पर, यूनिसेफ बेहतर जल गुणवत्ता निगरानी प्रणाली विकसित करने और जल आपूर्ति अवसंरचना के संचालन और रखरखाव को मजबूत करने पर भी विशेष ध्यान देता है।

इस दिशा में एक वर्तमान पहल ‘स्वजल’ है, जो समुदायों को अपनेरिहायशीइलाकों के भीतर सुरक्षित जल स्रोतों का प्रबंधन करने में सक्षम बनाने का प्रयास करती है, और यह नीति विकास, प्रशिक्षकों के प्रशिक्षण और संचार अभियानों के माध्यम से यूनिसेफ द्वारा समर्थित है।

जल शक्ति मंत्रालय ने ‘स्वजल’नामकएक पायलट परियोजना आरंभ किया है, जिसे एक मांग-संचालित कार्यक्रम के रूप में तैयार किया गया है। इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित पेयजल की सतत पहुंच प्रदान करने हेतु समुदाय को शामिल किया गया है। स्वजल कार्यक्रम समुदायों को एकल ग्राम पेयजल आपूर्ति योजनाओं की योजना बनाने, परिकल्पना, कार्यान्वयन और निगरानी करने और इसके संचालन और रख-रखाव के लिए सामुदायिक स्वामित्व को संगठित करने केलिए सशक्तकरताहै।

देश के 28 राज्यों के 117 जिलों में स्वजल के लिए लक्ष्य जनसंख्या प्रति वर्ष लगभग 5 लाख है। इस कार्यक्रम ने अधिकांश वंचित आकांक्षी जिलों में एकीकृत जल सुरक्षा योजना के कार्यान्वयन, व्यवहार परिवर्तन और सामुदायिक भागीदारी को प्राथमिकता देने और जल गुणवत्ता निगरानी (डब्ल्यूक्यूएम) के लिए भी मदद की है। इससे एक करोड़ छियासी लाख लोगों को सुरक्षित पीने का पानी सुलभ करवाने में योगदान मिला है।

यूनिसेफ जल शक्ति मंत्रालय को राष्ट्रीय स्तर पर और 14 राज्यों में स्वजल और राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूपी) को मजबूत बनाने में सहयोग कर रहा है। आने वाले चार वर्षों के दौरान यूनिसेफ 20 लाख की आबादी तक पहुंचने में योगदान देगा।

यूनिसेफ ने स्वच्छ जल के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्तर दिशा-निर्देश बनाने में तकनीकी सहायता दी है, जो समुदाय की भागीदारी, प्रौद्योगिक विकल्पों और संचालन एवं रख-रखाव पर केंद्रित है।

ये दिशा-निर्देश योजना निर्माण, कार्यान्वयन और योजनाओं के प्रबंधन के विभिन्न चरणों में महिलाओं की भागीदारी पर भी विशेष ज़ोर देते हैं। उदाहरण के लिए, इसके नियमित संचालन और छोटी-मोटी मरम्मत के लिए ज़िम्मेदार स्थानीय व्यक्ति अधिकतर गांव की एक महिला होती है, जिसे प्रशिक्षित करके और कार्य-आधारित भुगतान के माध्यम से कार्य में लगाया जाता है।

तकनीकी विकल्पों के साथ सामुदायिक प्रबंधन पहलुओं को मजबूत करने की दिशा में स्वजल की सीखों को एनआरडीडबल्यूपी तक विस्तारित किया जाएगा। जल आपूर्ति के सामुदायिक प्रबंधन के लिए यूनिसेफ जल शक्ति मंत्रालय को प्रदान किए जा रहे अपने समर्थन को और अधिक मजबूत करेगा।

अपने संशोधित कार्यक्रम-संबंधी दृष्टिकोण के साथ, एनआरडीडबल्यूपी ने क्षमता निर्माण को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें प्रशिक्षण सामग्री बनाने और प्रशिक्षण देने में सहायता शामिल है। यूनिसेफ मानव संसाधन और संस्थागत क्षमता, तकनीकी कौशल विकास और सामुदायिक प्रबंधन तथा व्यवहार परिवर्तन के क्षेत्रों में कमी को कम कर रहा है, ताकि महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित रहे।