शिक्षा

यूनिसेफ यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत में सभी बच्चों को समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा प्राप्त हो।

A joyful Indian schoolgirl in a khaki uniform laughs brightly beside a boy in a wheelchair, surrounded by smiling classmates in front of a blackboard a powerful image of inclusive education.
UNICEF/UN0272155/Singh

लड़कियों व लड़कों दोनों के लिए हो स्कूल और शिक्षा

भारत ने हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने में बहुत सुधार किये हैं। इसके साथ ही प्राथमिक विद्यालय में नामांकन बढ़ाने और स्कूलों से ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या को कम करने में अहम कदम उठाये हैं।

इन उपलब्धियों को कानूनों, नीतियों और जागरूकता कार्यक्रमों जैसे बच्चों का मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम (2009), राष्ट्रीय प्रारंभिक बचपन देखभाल और शिक्षा (ईसीसीई) नीति (2013) से मजबूती मिली। हालाँकि, चुनौतियाँ अब भी बरकरार हैं।

एसआरआई-आईएमआरबी सर्वेक्षण, 2009 और 2014 की रिपोर्ट के अनुसार 2014 में 61 लाख आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रन (OOSC) की संख्या 2016 में घटकर 13 लाख रह गई। 

100 छात्रों में से 29 प्रतिशत लड़कियां और लड़के प्राथमिक शिक्षा का चक्र पूरा करने से पहले स्कूल से बाहर निकल जाते हैं, और इनमें सबसे ज्यादा वंचित समुदाय के बच्चे होते हैं।

रैपिड सर्वे ऑफ चिल्ड्रेन 2013-2014 एमडब्ल्यूसीडी के आंकड़ों के मुताबिक लगभग 50% किशोर माध्यमिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाते हैं, जबकि लगभग 20 लाख बच्चे प्री-स्कूल नहीं जाते हैं।

राष्ट्रीय उपलब्धि सर्वेक्षण, एनसीईआरटी 2017 की रिसर्च के अनुसार चुनौतियां बनी हुई हैं क्योंकि प्राथमिक स्कूल में जाने वाले 5 करोड़ बच्चे अपनी कक्षाओं के स्तर के अनुरूप नहीं सीख रहे हैं। 

इसके अलावा 5 साल की उम्र में बच्चों की स्कूल के लिए तैयारी उनके स्तर से काफी कम है। देश के कार्यक्रम की पहली छमाही में, परिचालन वातावरण में कई बदलाव हुए हैं, जिन्होंने इस बात पर प्रभाव डाला है कि यूनिसेफ इंडिया शिक्षा कार्यक्रम आगे कैसे संचालित होगा।

समाधान

ये बदलाव नई शिक्षा नीति को सक्षम बनाने कोविड-19 में लॉकडाउन में हुई ऑनलाइन शिक्षा और शिक्षा सेवाओं पर इसके प्रभाव के कारण हैं।

यूनिसेफ के जनादेश, अन्य हितधारकों और भागीदारों की उपस्थिति और ज्ञान, क्षमताओं, उपलब्ध संसाधनों, जरूरतों और सीखे गए सबक के आधार पर 2018 में देश के कार्यक्रम की शुरुआत में प्राथमिकता वाले तीन प्रोग्रामिंग क्षेत्रों में कार्यक्रम चलाये गये:

बचपन में मिली शिक्षा

स्कूल न जाने वाले बच्चे

गुणवत्तापूर्ण शिक्षण एवं अधिगम

पश्चिमी भारतीय राज्य गुजरात में अग्रवाल विद्यालय (स्कूल) में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) हस्तक्षेप कार्यक्रम में भाग लेने वाली लड़कियां।
UNICEF/UN0269637/Hajra पश्चिमी भारतीय राज्य गुजरात में अग्रवाल विद्यालय (स्कूल) में मासिक धर्म स्वच्छता प्रबंधन (एमएचएम) हस्तक्षेप कार्यक्रम में भाग लेने वाली लड़कियां।

इन कार्यक्रमों का सबसे अधिक फायदा हाशिए पर रहने वाले लोगों को मिल सकेगा। इसाके साथ ही बच्चों को मूलभूत शिक्षा और जीवन कौशल सीखाने वाली गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से न्यायसंगत लाभ मिलेगा। यही यूनिसेफ शिक्षा कार्यक्रम का दृष्टिकोण है।

यूनिसेफ भारत सरकार, 17 राज्यों की राज्य सरकारों, नागरिक समाज, शैक्षणिक संस्थानों और निजी क्षेत्र के साथ मिलकर काम कर रहा है।

जबकि इन कार्यक्रमों के साथ पहला जुड़ाव शिक्षा मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ होगा। जनजातीय, अल्पसंख्यक और सामाजिक न्याय विभागों, आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के मंत्रालयों के साथ अधिक भागीदारी विशेष रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की डिलीवरी सुनिश्चित करने में आवश्यक होगी। सबसे अधिक हाशिए पर रहने वाले वंचित समुदाय के बच्चे ही यूनिसेफ का लक्ष्य हैं।

परिणामों के प्राप्ति के लिये यूनिसेफ यह सुनिश्चित करता है कि 2022 तक सभी बच्चे, विशेषकर सबसे वंचित समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा का लाभ मिला हो।

यूनिसेफ ने निम्नलिखित मध्यवर्ती परिणामों की पहचान की है:

  • उच्च सघनता वाले नौ राज्यों में स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या में कमी आई है।
  • प्री स्कूलों में बच्चों का नामांकन बढ़ा
  • चयनित राज्यों में सीखने के लिए बेहतर सक्षम वातावरण मुहैया करवाना।

संसाधनों

व्यापक जीवन कौशल तंत्र

सशक्तिकरण हेतु कौशल निर्माण के लिए अधिकार आधारित एवं जीवन चक्र पद्धति

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आरंभिक शिक्षा कार्यक्रम निर्माण एवं क्रियान्वयन हेतु निर्देश

विगत कुछ वर्षों में आगे की स्कूली शिक्षा हेतु बच्चों की मज़बूत नींव हेतु मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) प्री-प्राइमरी और आरंभिक कक्षाओं में आरंभिक शिक्षा

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स्कूली शिक्षा में मूलभूत बदलावों को गति प्रदान करना

15 लाख विद्यालयों, 85 लाख शिक्षकों एवं विभिन्न समाजार्थिक पृष्ठभूमि के 25 करोड़ बच्चों के साथ भारतीय शिक्षा प्रणाली विश्व में सबसे बड़ी शिक्षा प्रणालि है ।

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