खेलो और सीखो: बच्चों के विकास में शिक्षकों के लिए उपयोगी सुझाव

प्री-स्कूल से प्राथमिक कक्षाओं तक—जब सीखना मज़ेदार होता है, बच्चे और होशियार, मज़बूत और आत्मविश्वासी बनते हैं

UNICEF
Doman Lal Sahu, a teacher,  engages grade-two students in a discussion about story characters illustrated on a poster in Halbi language at Government Primary School in Pendalnar village, Sukma district, Chhattisgarh, India.
UNICEF/UNI625962/Magray
08 दिसम्बर 2025

बच्चों के सोचने, महसूस करने और आगे बढ़ने में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। जब कक्षा का माहौल प्यार, जिज्ञासा और खेल पर आधारित होता है, तो हर बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है।

खेल के रूप में हो या पढ़ाई के रूप में हर छोटी-बड़ी गतिविधि जन्म से लेकर 11 वर्ष की उम्र तक बच्चों के मस्तिष्क के विकास, आत्मविश्वास और संवाद कौशल को मजबूत करती है।

यहाँ कक्षा में खेल के ज़रिए सीखने को बढ़ावा देने के लिए उम्र के अनुसार कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।

फाउंडेशन स्टेज: 3–8 वर्ष (प्री-स्कूल से कक्षा 2)

इस उम्र के बच्चे जिज्ञासा से भरे होते हैं। उनका मस्तिष्क तेज़ी से विकसित हो रहा होता है और वे सबसे बेहतर तब सीखते हैं जब उन्हें छूने, देखने, हिलने-डुलने और दोहराने का मौका मिलता है।

सीखने में कैसे मदद करें:

  • खेल-आधारित गतिविधियाँ अपनाएँ
    बच्चों को आवाज़ और हाव-भाव (एक्सप्रेशन) के साथ कहानियाँ सुनाएँ, कविताएँ गाएँ, कठपुतलियों या हाथों के इशारे करें। मिलान, छँटाई या पैटर्न वाले खेल खेलें। बाज़ार जाना या घर में मदद करना जैसे रोज़मर्रा के दृश्य रोल-प्ले से सिखाएँ।
  • स्वागत करने वाला माहौल बनाएँ
    बच्चों के लिए आरामदायक बैठने की व्यवस्था, फ़र्श पर चटाइयाँ और उनकी बनाई हुई ड्रॉइंग कक्षा में लगाएँ। बच्चों को बिना डर के बोलने, सवाल पूछने और भाग लेने का अवसर दें। जहां उनको गलत होने का डर न हो।
  • स्थानीय और कम-खर्च सामग्री का उपयोग करें
    बीज, बटन, बोतलों के ढक्कन, कागज़ के टुकड़े, मिट्टी, रेत या टहनियों का इस्तेमाल गिनती, छँटाई या कला गतिविधियों में करें। इससे सीखना मज़ेदार होता है और बच्चों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़ता है।
  • कला, संगीत और गतिविधि से अभिव्यक्ति बढ़ाएँ
    बच्चों को चित्र बनवाएँ, गवाएँ या अभिनय करवाएँ। इससे याददाश्त, रचनात्मकता और भावनात्मक स्वास्थ्य बेहतर होता है।
  • खेल के ज़रिए पढ़ने और गिनती की नींव रखें
    चित्र पुस्तकों, संख्या खेलों, कहानियों और वस्तुओं की गिनती का प्रयोग करें। रटने के बजाय “क्यों” और “कैसे” समझने में मदद करें।

सुझाव: बच्चों को खुलकर खेलने दें। अगर वे गलती करें, तो प्यार से समझाएँ—यही सीखने की प्रक्रिया का हिस्सा है।

तैयारी चरण: 8–11 वर्ष (कक्षा 3–5)

इस उम्र में बच्चे सोचने, तुलना करने और अपने आसपास की दुनिया से चीज़ों को जोड़ने लगते हैं। वे अब भी खेल पसंद करते हैं, लेकिन साथ-साथ समस्याएँ सुलझाने और समूह में काम करने का आनंद भी लेते हैं।

सीखने में कैसे मदद करें:

  • समूह गतिविधियाँ कराएँ
    छोटे समूहों में खेल, विज्ञान प्रयोग या समूह कहानी लेखन कराएँ। इससे सहयोग, संवाद और साझा ज़िम्मेदारी सीखते हैं।
  • खुले सवाल पूछें
    “तुम्हें क्या लगता है आगे क्या होगा?” या “तुम ऐसा क्यों सोचते हो?” जैसे सवाल गहरी सोच और सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देते हैं।
  • पढ़ाई को वास्तविक जीवन से जोड़ें

    गणित में स्थानीय बाज़ार के उदाहरण लें, विज्ञान में मौसम चार्ट का उपयोग करें, या EVS में समुदाय के लोगों और उनकी भूमिकाओं पर चर्चा करें।

  • रचनात्मकता को बढ़ावा दें
    बच्चों से पोस्टर बनवाएँ, छोटी नाटक प्रस्तुतियाँ कराएँ या पाठ से जुड़ी कविताएँ लिखवाएँ। इससे सीखना यादगार और आनंददायक बनता है।
  • चर्चा और साझा करने का अवसर दें
    बच्चों को अपनी राय रखने और सवाल पूछने का समय दें। “सर्कल टाइम” या समूह चर्चा से आत्मविश्वास और सुनने का कौशल बढ़ता है।

सुझाव: जब बच्चों को सम्मान और सुने जाने का एहसास होता है, तो वे बेहतर सीखते हैं। उनके विचारों को महत्व दें।

हर शिक्षक बदलाव ला सकता है

जब बच्चे खुद को सुरक्षित, पहचाना हुआ और समर्थ महसूस करते हैं, तो वे खुलकर सीखते हैं, बोलते हैं और आगे बढ़ते हैं। आप ऐसी कक्षा बना सकते हैं जहाँ हर बच्चा खुशी, आत्मविश्वास और अपनापन महसूस करते हुए सीख सके।

आपका सहयोग बच्चों में सीखने का आजीवन प्रेम जगा सकता है।