मेरी थाली सेहतवाली
कितने स्वस्थ हैं आप; आपके स्वस्थ आहार में क्या-क्या शामिल है
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‘मेरी थाली सेहतवाली’ डिजिटल अभियान आपके व आपके परिवार की हेल्दी डाइट और उसके विकल्पों को बढ़ावा देने के लिए जागरूक करेगा।
"जो आहार हम खाते हैं और जो खानपान का व्यवहार हम अपनाते हैं, वही हमारे विकास और सेहत का मूलमंत्र होते हैं। बच्चों और युवाओं को संतुलित खानपान अपनाना चाहिए, वहीं जीवन के विभिन्न पड़ावों जैसे किशोरावस्था और गर्भावस्था में महिलाओं और किशोरियों को अतिरिक्त व पौष्टिक आहार लेना चाहिए।"
भारत को सुपोषित बनाने और खानपान की आदतों में सुधार करने के लिए यूनिसेफ की पहल है। इस डिजिटल अभियान का उद्देश्य आकर्षक पोस्ट, वीडियो और जिंगल के जरिए संदेश देकर हर घर तक अपनी बात पहुंचाना है।
दुनियाभर में आज कम वजन, पोषक तत्वों की कमी के अलावा अधिक वजन और मोटापा भी अब वैश्विक चुनौतियां बन चुके हैं। शुगर, हाई बीपी, और ह्दय संबंधी जैसी 56% बीमारियों का कारण अनहेल्दी खानपान ही है। विविध प्रकार का स्वस्थ खानपान ही हमें बीमारियों से बचा सकता है।
"कई बार हम नहीं जानते कि हमारे परिवार के लिए हेल्दी खानपान क्या है। इसीलिए हम ये डिजिटल अभियान आपके लिए लेकर आए हैं। यूनिसेफ इस अभियान के जरिए आपके और हमारे बीच की खाई पाटकर जागरुकता बढ़ाएगा। अब हमारे 6 फूड कैरेक्टर्स आपसे रूबरू होंगे और स्वस्थ आहार की जानकारी देंगे।"
#MeriThaliSehatwali अभियान का उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना है, जिससे पूरे जीवन-चक्र में स्वस्थ भोजन को बढ़ावा मिल सके और हम स्वस्थ रहें।
मिलिए हमारे कैरेक्टर्स से
कूल तरबूजा
पोषक तत्व: विटामिन और खनिज
शांत और बुद्धिमान, तुकमिजाज और हमेशा पोइटिक अंदाज में बात करने वाला।
फ्रेंडली दूध
पोषक तत्व: तरल पदार्थ
खुशमिजाज, मौज-मस्ती और देखभाल करने वाला, आपसे मजेदार तथ्य और किस्से शेयर करने वाला।
क्यूरियस अंडा
पोषक तत्व: प्रोटीन
मासूम और क्यूरियस, हमेशा सवाल पूछने और सीखने के लिए उत्सुक रहने वाला।
स्ट्राँग पालक
पोषक तत्व: विटामिन और खनिज
मोटिवेशनल और अनुशासित, सीधा बात No बकवास।
एर्नेजेटिक मक्का
पोषक तत्व: कार्बोहाइड्रेट
उत्साही और व्यावहारिक सलाहकार समाधानों से भरा, हमेशा ऊर्जावान रहने वाला।
नर्चरिंग रोटी
पोषक तत्व: कार्बोहाइड्रेट
पोषण से भरपूर और बुद्धिमान, हमेशा प्यार देने वाली, ममता से भरी हुई।
स्वस्थ आहार के बारे में जो आपको जानना चाहिए
पोषण मायने रखता है — “पहली खुराक से ही हमारा आहार हमारी ज़िंदगी की कहानी लिखता है। अच्छा पोषण सिर्फ पेट भरने के लिए नहीं, बल्कि भविष्य संवारने के लिए है। सही संतुलन में विटामिन, मिनरल और पोषक तत्व मज़बूत शरीर, तेज़ दिमाग और मजबूत आत्मविश्वास बनाते हैं।”
माँ का दूध केवल भोजन नहीं है—यह पहली नेचुरल वैक्सीन है, जो शिशु के मस्तिष्क को मज़बूत बनाता और उसे मानसिक व बौद्धिक रूप से विकसित करने के साथ संपूर्ण पोषण देता है। यह सफ़र जन्म के पहले “सुनहरे घंटे” से शुरू होता है। न पानी, न फार्मूला, न जानवर का दूध — सिर्फ माँ का दूध, जो एंटीबॉडी और पोषक तत्वों से भरपूर होता है।”
“बच्चे की सेहत की शुरुआत जन्म के पहले घंटे से होती है। अगर स्तनपान तुरंत शुरू किया जाए और छह महीने तक केवल माँ का दूध दिया जाए — बिना पानी, जानवर के दूध या किसी और विकल्प के — तो बच्चे को पूरा पोषण और मज़बूत रोग प्रतिरोधक क्षमता मिलती है।”
“ताज़ा, स्थानीय और मौसमी भोजन शरीर को मज़बूत और दिमाग को तेज़ बनाता है, जबकि जंक फूड इसका उलटा असर करता है। ज़्यादा नमक, चीनी और तेल से बने प्रोसेस्ड फूड भूख शांत करने के लिए एक बार आसान विकल्प लग सकते हैं, लेकिन धीरे-धीरे सेहत बिगाड़ते हैं — जैसे डायबिटीज़, हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियाँ।”
“कई घरों में आज भी एक अनकही परंपरा चलती है — औरतें और लड़कियां सबसे बाद में खाना खाती हैं और अक्सर उन्हें बचा-खुचा खाना ही मिलता है। इस रिवाज़ की जड़ें बहुत गहरी हैं, लेकिन इसका सीधा असर लड़कियों-महिलाओं की सेहत के साथ आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचता है। ये मुद्दा बराबरी का नहीं, बल्कि — समानता का है और परिवारों को मज़बूत बनाने व कुपोषण के चक्र को तोड़ने की सोच है।”
आजकल मोबाइल पर स्क्रोल करना टहलने की जगह ले चुका है और क्लिक ने खेलकूद को पीछे कर दिया है। इसका असर हमारे शरीर पर पड़ रहा है। उपाय आसान है — बाहर निकलो, टहलो, दौड़ो, नाचो — बस हिलो-डुलो!
“किशोरावस्था, गर्भावस्था और स्तनपान जैसी स्टेज पर शरीर को अतिरिक्त पोषण चाहिए होता है। फिर भी कई लड़कियाँ और महिलाएँ कमज़ोर या खून की कमी से पीड़ित रहती हैं, जिससे उनकी और उनके बच्चों की सेहत खतरे में पड़ जाती है।”