खास समय के लिए खास आहार

किशोरियों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली माताओं को क्यों चाहिए ज़्यादा पोषण

UNICEF
Adolescents, Pregnant, and Lactating Women Need More Nutrition
UNICEF
01 सितंबर 2025
ज़्यादा खाना, ज़्यादा ताक़त

भोजन हर किसी का बुनियादी हक़ है — लेकिन हर किसी को बराबर हिस्सा नहीं मिलता। भारत के कई घरों में महिलाएँ और लड़कियाँ अक्सर सबसे बाद में खाती हैं और उन्हें कम खाना या कम पोषण वाला हिस्सा मिलता है। यह “सबसे बाद और सबसे कम” की परंपरा, जो सामाजिक मान्यताओं, समय की कमी और असमान फैसलों से जुड़ी है, चुपचाप उन्हें उस पोषण से वंचित कर देती है जिसकी उन्हें सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है।

यूनिसेफ़ इंडिया की Advocacy for Healthy Diets सीरिज की तीसरी ब्रीफ़ इस असमानता पर रोशनी डालती है। IHDS, NFHS, CNNS और अन्य अध्ययनों से मिले साक्ष्यों के आधार पर यह दिखाती है कि खाने की इन परंपराओं से महिलाओं के आहार की गुणवत्ता में लगातार कमी बनी रहती है। इसका असर महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ता है और पोषण कार्यक्रमों का प्रभाव भी घट जाता है। नतीजा? किशोरियाँ कुपोषित अवस्था में युवावस्था में पहुँचती हैं, गर्भावस्था ज़्यादा जोखिमपूर्ण हो जाती है, और माताएँ प्रसव के बाद स्वस्थ होने या अपने बच्चों को पोषण देने में संघर्ष करती हैं।

फिर भी इसका हल बहुत सरल है: परिवार के इन रीति-रिवाज़ों को पहचानना और यह सुनिश्चित करना कि महिलाओं और लड़कियों को समय पर और पर्याप्त भोजन मिले। पोषण विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि रोज़ के नाश्ते, दोपहर और रात के खाने के अलावा एक अतिरिक्त पौष्टिक नाश्ता और एक हेल्दी स्नैक शामिल किया जाए। यह छोटा-सा कदम किशोरियों, गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को ज़रूरी मात्रा और गुणवत्ता वाला पोषण देने में मदद करता है, खासकर जीवन के इन महत्वपूर्ण चरणों में।

“दिन में बस दो अतिरिक्त भोजन — एक नाश्ता और एक स्नैक — सेहतमंद माताएँ, मज़बूत बच्चे और उज्जवल भविष्य बना सकते हैं।”

किशोरावस्था में शरीर तेजी से बढ़ता है, जिसके लिए अधिक कैलोरी, प्रोटीन और आयरन व कैल्शियम जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों की ज़रूरत होती है। गर्भवती महिलाओं को माँ और शिशु, दोनों के स्वास्थ्य और विकास के लिए अतिरिक्त पोषण चाहिए। वहीं स्तनपान कराने वाली माताओं को अतिरिक्त ऊर्जा और पोषक तत्व चाहिए होते हैं ताकि वह पर्याप्त और पौष्टिक माँ का दूध बना सके — जो बच्चे का पहला और सबसे ज़रूरी आहार है।

लेकिन यह बढ़ी हुई ज़रूरतें अक्सर सामाजिक हकीकतों से टकराती हैं: महिलाओं और लड़कियों के पास अक्सर खाने के समय निर्णय लेने की ताक़त, समय या पहुंच नहीं होती कि उन्हें प्राथमिकता दी जाए। जब तक परिवार, स्कूल, कार्यस्थल और सरकारी कार्यक्रम मिलकर इन कमियों को दूर नहीं करते, कुपोषण का यह चक्र पीढ़ी दर पीढ़ी चलता रहेगा।

ये अतिरिक्त भोजन कैसा होना चाहिए?
  • नाश्ते में: दूध, अंडा, दाल, अनाज या फोर्टिफ़ाइड सीरियल।
  • स्नैक में: फल, मेवे, दही, हरी सब्ज़ियाँ या साबुत अनाज।

दूध और दही से कैल्शियम, हरी सब्ज़ियों व दालों से आयरन, और फलों-सब्ज़ियों से फाइबर मिलता है जो मज़बूती और सेहत के लिए बहुत ज़रूरी है। किशोरियों के लिए पौष्टिक स्नैक ध्यान और ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है और जंक फूड की आदत से बचाता है,  जबकि माताओं के लिए ये माँ और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं।

खाना हर इंसान का बुनियादी अधिकार है, चाहे वह पुरुष हो या महिला। किशोरावस्था, गर्भावस्था और स्तनपान के दौरान सही पोषण सिर्फ़ स्वास्थ्य का मामला नहीं है — यह समानता और अधिकारों का सवाल भी है। संतुलित आहार, सहायक पारिवारिक आदतें और सभी के लिए समावेशी पोषण कार्यक्रम अनिवार्य माने जाने चाहिए।

यूनिसेफ की रिपोर्ट कुछ व्यावहारिक रणनीतियाँ बताती है: घर में महिलाओं की निर्णय लेने की शक्ति को मज़बूत करना, सहायक सेवाओं के ज़रिए समय की कमी (टाइम पॉवर्टी) को कम करना, समानता पर आधारित भोजन की आदतों को बढ़ावा देना और मज़बूत निगरानी प्रणाली बनाना। इन सब प्रयासों से मिलकर उन रुकावटों को दूर किया जा सकता है जो महिलाओं और लड़कियों को हमेशा “सबसे बाद में और सबसे कम” खाने पर मजबूर करती हैं।

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UNICEF Take special care of your body by adding extra meals during essential stages of life.
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UNICEF Special Diets During Adolescence and Pregnancy

“दिन में दो अतिरिक्त भोजन — एक भरपूर नाश्ता और एक पौष्टिक स्नैक — एनीमिया रोक सकते हैं, गर्भावस्था सुरक्षित बना सकते हैं और आने वाली पीढ़ी का भविष्य उज्ज्वल कर सकते हैं।”

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UNICEF Healthy Diets for Teens: Extra Meals for Growing Needs

“पोषण सिर्फ खाना नहीं, बल्कि अवसर है। कुपोषित लड़की अक्सर कुपोषित माँ बनती है, तो उसका बच्चा भी कमज़ोर होता है। लेकिन अच्छा आहार लड़कियों और महिलाओं को स्वस्थ, मज़बूत और समाज की ताक़त बना देता है।”

इन जीवन चरणों में सही पोषण सुनिश्चित करना बराबरी का सवाल है। संतुलित आहार, सुरक्षित स्वास्थ्य सेवाएँ और स्वस्थ खाने की जानकारी हर किसी का बुनियादी अधिकार होना चाहिए, न कि कोई विशेष सुविधा।

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UNICEF Healthy Diets & Extra Meal

"महिलाओं और लड़कियों के पोषण में आज किया गया निवेश ही एक स्वस्थ और मज़बूत कल की गारंटी है।"

एक छोटा कदम, बड़ा असर

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UNICEF Healthy Diets for Teens: Extra Meals for Growing Needs

एक अतिरिक्त नाश्ता और स्नैक खाने में जोड़ना भले ही मामूली लगे, लेकिन यह जीवन बदलने वाला अहम कदम है।

  • किशोरियों को मज़बूत बनाता है और एनीमिया से बचाता है।
  • गर्भवती महिलाओं और उनके बच्चों को सुरक्षित रखता है।
  • स्तनपान कराने वाली माताओं को ताक़त देता है ताकि वे अपने बच्चों को सही पोषण दे सकें।

“गर्भवती महिलाओं के लिए अतिरिक्त भोजन माँ और बच्चे दोनों की सुरक्षा करता है, जिससे गर्भावस्था सुरक्षित और बच्चा स्वस्थ रहता है। स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए यह भोजन ज़रूरी ऊर्जा और पोषण देता है, ताकि वे बच्चे को माँ का दूध पिला सकें — जो शुरुआती सालों में शिशु का सबसे अच्छा आहार है।

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UNICEF Take special care of your body by adding extra meals during essential stages of life.

“रोज़ दो अतिरिक्त भोजन — किशोरियों की सुरक्षा, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और माताओं को अपने बच्चों को पोषण देने की ताक़त देता है।”