ब्रिक्स चाइल्ड फ्यूचर्स फोरम ने बच्चों को केंद्र में रखकर मानव पूंजी विकास और मजबूत सहयोग की जरूरत पर जोर दिया

फोरम में बचपन के शुरुआती वर्षों में निवेश, बेहतर सेवाओं की व्यवस्था, युवाओं के नए विचार, डिजिटल समावेशन और BRICS देशों के बीच ज्ञान साझा करने की अपील की

24 अगस्त 2026
Senior officials seated at the BRICS Child Futures Forum panel, including Jesper Moller of UNICEF India and Cabinet Minister Smt. Baby Rani Maurya, in front of the BRICS India 2026 backdrop.
UNICEF Child Futures Forum - convened by the Observer Research Foundation (ORF), in partnership with UNICEF India, under India’s BRICS Presidency 2026, under the theme ‘Investing in Children, Securing the Future: Human Capital for the Next BRICS Decade.’

लखनऊ — ब्रिक्स चाइल्ड फ्यूचर्स फोरम ने आज ब्रिक्स देशों के मानव पूंजी सहयोग में बच्चों और किशोरों पर अधिक मजबूत और एकीकृत ध्यान देने का आह्वान किया। फोरम ने शुरुआती बाल्यावस्था में निवेश, अंतिम छोर तक प्रभावी सेवाओं की पहुंच, युवाओं के कौशल एवं नवाचार, लैंगिक समानता और सतत वित्तपोषण को इससे जोड़ने पर जोर दिया।

ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) ने भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत यूनिसेफ इंडिया के साथ साझेदारी में इस फोरम का आयोजन किया। फोरम की थीम थी-‘बच्चों में निवेश, भविष्य को सुरक्षित करना: ब्रिक्स के अगले दशक के लिए मानव पूंजी।’ इसमें भारत और अन्य ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, नीति विशेषज्ञ, शोधकर्ता, विकास साझेदार और युवा प्रतिनिधि शामिल हुए।

चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि ब्रिक्स देशों के बीच पहले से ही स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, युवा विकास, नवाचार और वित्तीय सहयोग के क्षेत्रों में काम हो रहा है। प्रतिभागियों ने इस बात पर विचार किया कि इन सभी क्षेत्रों को बच्चों और किशोरों को केंद्र में रखते हुए, जीवन के हर चरण के अनुसार बेहतर तरीके से जोड़ा जाए। जिसमें बच्चों और किशोरों को मानव पूंजी के विकास, आर्थिक मजबूती और समावेशी विकास के केंद्र में रखा जाए।

श्रीमती बेबी रानी मौर्य, कैबिनेट मंत्री, महिला कल्याण, बाल विकास एवं पोषण, उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा कि भले ही देशों की परिस्थितियां अलग-अलग हों, लेकिन हर बच्चे को आगे बढ़ने और बेहतर जीवन का अवसर देने की साझा आकांक्षा है। उन्होंने कहा कि यही साझा प्रतिबद्धता ब्रिक्स चाइल्ड फ्यूचर्स फोरम की चर्चाओं का केंद्र है, जिसका उद्देश्य बच्चों के कल्याण, विकास और भविष्य को बेहतर बनाने के लिए प्रयासों को आगे बढ़ाना है।

“ब्रिक्स देशों में एक अरब से अधिक बच्चे रहते हैं, जो दुनिया के कुल बच्चों की संख्या का लगभग आधा हैं। उनका स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल और निर्णय लेने की क्षमता ही ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्थाओं और समाजों की भविष्य की ताकत तय करेगी।”

जेस्पर मोलर मोलर, यूनिसेफ इंडिया कार्यवाहक प्रतिनिधि

उन्होंने आगे कहा, “साक्ष्य स्पष्ट हैं कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में निवेश से शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक भागीदारी और सामाजिक कल्याण, हर क्षेत्र में लाभ मिलता है। अब प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि इन साक्ष्यों को देशों की योजनाओं, वित्तीय फैसलों, मजबूत सेवा-प्रणालियों और ब्रिक्स देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग में बदला जाए।”

फोरम ने भविष्य के सहयोग के लिए तीन प्रमुख प्राथमिकताओं पर ध्यान केंद्रित किया:

  • जीवन के हर चरण में निवेश को सुरक्षित और मजबूत करना- मातृ स्वास्थ्य, पोषण और शुरुआती बाल विकास से शुरुआत करते हुए शिक्षा, कौशल विकास और युवाओं के उत्पादक वयस्क जीवन में प्रवेश तक।
  • एकीकृत, समान और जवाबदेह सेवा-प्रणालियों के जरिए क्रियान्वयन को बेहतर बनाना, ताकि अंतिम छोर तक बच्चों और परिवारों तक सेवाएं पहुंच सकें, खासकर उन लोगों तक जो कई तरह की वंचनाओं का सामना कर रहे हैं।
  • ब्रिक्स देशों के बीच व्यावहारिक सहयोग तंत्र विकसित करना, ताकि बच्चों-केंद्रित मानव पूंजी विकास से जुड़े साक्ष्य, नीतिगत मॉडल और योजनाओं को लागू करने के अनुभव साझा किए जा सकें।

चर्चा में यह भी रेखांकित किया गया कि सिर्फ वित्तीय संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। बच्चों के लिए प्रभावी परिणाम हासिल करने के लिए सरकार के विभिन्न विभागों और स्तरों के बीच बेहतर समन्वय, स्थानीय संस्थानों को मजबूत करना, बच्चों और समुदायों की सार्थक भागीदारी तथा कार्यक्रमों के निर्माण और क्रियान्वयन में महिलाओं की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना जरूरी है।

“ब्रिक्स देशों के पास यह सीखने के लिए बहुत कुछ है कि नीतिगत इरादों को अंतिम छोर तक ठोस परिणामों में कैसे बदला जाए। सहयोगात्मक शासन, विकेंद्रीकृत सेवा वितरण और महिलाओं की सक्रिय भूमिका सामाजिक और मानव पूंजी में बदलाव लाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।”

अमरजीत सिन्हा, भारत सरकार के पूर्व सचिव, प्रधानमंत्री के पूर्व सलाहकार और CSEP के सीनियर फेलो

फोरम की दो राउंडटेबल चर्चाओं में वक्ताओं ने बच्चों में निवेश से मिलने वाले लाभ, बेहतर परिणामों के लिए जरूरी शासन और वित्तीय सुधारों तथा भविष्य के लिए तैयार मानव पूंजी के निर्माण में युवाओं, डिजिटल प्रणालियों, नवाचार और साझेदारियों की भूमिका पर चर्चा की।

फोरम का समापन संवाद से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करने के आह्वान के साथ हुआ। इसमें ब्रिक्स की विभिन्न नीतिगत प्रक्रियाओं में बच्चों और किशोरों से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देने तथा सरकारों, थिंक टैंक, शैक्षणिक संस्थानों, नागरिक समाज, युवाओं और विकास साझेदारों के बीच निरंतर ज्ञान के आदान-प्रदान को मजबूत करने पर जोर दिया गया।

चर्चाओं का सारांश और प्रमुख निष्कर्ष ORF और यूनिसेफ के प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा किए जाएंगे।

संपादकों के लिए नोट्स

ब्रिक्स चाइल्ड फ्यूचर्स फोरम में ‘ब्रिक्स मानव पूंजी की नींव के रूप में बच्चों में निवेश’ और ‘बच्चों के भविष्य के लिए साझेदारी: युवा, नवाचार और मानव पूंजी का वित्तपोषण’ विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में भारत, दक्षिण अफ्रीका, चीन, ब्राजील, रूस, ईरान, मिस्र और ब्रिक्स संवाद से जुड़े अन्य देशों व संस्थानों के वक्ताओं और प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

कार्यक्रम की जानकारी और प्रमुख निष्कर्ष: https://www.orfonline.org/event/brics-child-futures-forum 

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Communication Specialist
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