लोढ़ा की आदिवासी बिनीता मलिक ने जगाई महिलाओं में पोषण के लिए जागरूकता

2019 से यूनिसेफ लोधा जनजाति के बच्चों और महिलाओं की पोषण स्थिति में कर रहा सुधार

UNICEF
UNICEF aimed to improve the nutritional status of the Lodha tribe in 2019.
Centre for Regional Education Forest and Tourism Development Agency (CREFTDA), February 2022.
27 सितंबर 2024

22 वर्षीय आदिवासी अशिक्षित बिनीता ने ओडिशा के लोढा समुदाय में अन्य महिलाओं को जो नई राह दिखाई, वो काबिले तारीफ है। 15 वर्ष की छोटी उम्र में ब्याही गई बिनीता के लिए अपने चार बच्चों का पालन-पोषण करना संघर्षपूर्ण रहा।

आज बिनीता 22 वर्षीय युवती है, लेकिन हर बार गर्भावस्था के दौरान उसका वजन गिर जाता था, जोकि मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक था । ऐसे में बिनीता के चारों बच्चों का वजन जन्म के समय से ही कम रहा और सबसे छोटे बच्चा जो फिलहाल मात्र एक वर्ष का है, वह कुपोषित पैदा हुआ।

अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ बिनीता को हर रोज मजदूरी भी करनी पड़ती थी। उसे अपने बच्चों का पेट पालने के लिए ओडिशा के जंगलों में भोजन, लकड़ी और पत्तियों की तलाश में भटकना पड़ता।

बिनीता का सौभाग्य ये रहा कि राज्य के पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) ने न सिर्फ उसकी बल्कि उसके बच्चों की जान बचायी। जहां उन्हें भरपेट भोजन, आराम, जरूरी दवाईयां प्राप्त हुई, जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ।

यूनिसेफ ने पोषण संसाधन केंद्र (एनआरसी) की स्थापना का सहयोग किया। जिसे ओडिशा पीवीटीजी सशक्तिकरण और आजीविका सुधार कार्यक्रम (ओपेलिप) और लोढ़ा विकास एजेंसी (एलडीए) द्वारा संयुक्त रूप से पोषण संसाधन केंद्र (एनआरसी) की स्थापना की गई है। एनआरसी बच्चों व महिलाओं में पोषण संबंधी कमियों को दूर करने के लिए कार्य करता है और पोषण में सुधार लाने के अपने लक्ष्य को पूरा करने की तरफ अग्रसर है।

महिलाओं की खराब स्थिति

बिनीता मलिक ओडिसा के मयूरभंज जिले के विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) लोढ़ा जनजाति की हैं। इसे जागरूकता की कमी कहें या अशिक्षित दर, बिनीता की कहानी कोई अलग नहीं है, बल्कि इस समुदाय में आमतौर पर सभी लड़कियों के विवाह छोटी उम्र में ही करवा दिये जाते हैं।

समुदाय में बाल विवाह के उचित प्रसार-प्रसार, असमय और बार-बार गर्भ धारण करने, कम आय, गिरते स्वास्थ्य, पोषण की कमी के कारण लोढ़ा जनजाति की महिलाओं की स्थिति खराब है। इस जनजाति की सैकड़ों महिलाओं का स्वास्थ्य और पोषण की खराब स्थिति अक्सर आजीविका के चलते कठिन शारीरिक श्रम, चारागाह और अन्य कार्यों को पूरा करने के बोझ तले खराब हो जाती है। ऐसे में इन महिलाओं के लिए अपने बच्चों की उचित देखभाल करना और उन्हें पर्याप्त पोषण देना एक चुनौती बन चुका है।

An Anganwadi worker is providing advice to Binita on maternal and child nutrition.
CREFDTA, February 2022. Binita with an Anganwadi worker (unnamed) from her village, who provided her with counselling on maternal and child nutrition.

एनआरसी के दिखाई जीने की राह

शुरूआत में बिनीता को एनआरसी पर भरोसा नहीं था और वह अपने बच्चों को केंद्र में नहीं भेजना चाहती थी। लेकिन, बिनीता के सबसे छोटे बच्चे के खराब स्वास्थ्य और कुपोषण ने उसकी राहें ना चाहते हुए भी एनआरसी के लिए खोल ही दी। गांव के (सीआरपी), एलडीए, मोराडा के सोशल मोबिलाइज़र और पोषण अधिकारी की बातचीत से उसे हौंसला मिला। उन्होंने बिनाता को बच्चों में पोषण की कमी और उनके समग्र कल्याण के लिए उचित पोषण और देखभाल की अहम जरूरतों से अवगत कराया।

लगातार प्रयासों के बाद, बिनीता अपने बच्चों के साथ एनआरसी का दौरा करने और केंद्र में नियमित दौरे जारी रखने और वीएचएसएनडी सत्र और माताओं की समूह बैठकों में भाग लेने के लिए सहमत हुई।

एनआरसी में, बिनीता को उसके बच्चों के लिए पोषणयुक्त भोजन पर परामर्श दिया गया, उसके बच्चों को शैक्षिक और खेलने के लिए क्रेच उपलब्ध कराया गया। इसके साथ ही बच्चों की पोषण संबंधी जरूरतों के लिए बिनीता को उचित जानकारी दी गई। इसी तरह बिनीता और उसके बच्चों में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी कमियों को पूरा किया गया। फिलहाल बिनीता के बच्चे कुपोषण से उभर चुके हैं और उनके शरीर का वजन भी बॉडी-मास इंडेक्स (बीएमआई) के अनुसार है।

बिनीता ने पकड़ी पोषण की राह

बिनीता ने अशिक्षित होते हुए ना सिर्फ सही गलत का अंतर समझा, बल्कि अपने बच्चों के उचित पालन पोषण के लिए अहम फैसले लेते हए अपने समुदाय के लिए मिसाल भी कायम करी। एक मां के रूप में बिनीता के प्रयास और उसके बच्चों की सुधरती हेल्थ कंडीशन ने लोढ़ा समुदाय के लोगों की आंखें खोलने का काम किया।

दूसरों के लिए मिसाल बनी बिनीता

आदिवासी महिला बिनीता की कहानी एक जीवंत उदाहरण है ना सिर्फ लोढ़ा समुदाय के लिए, बल्कि उन सभी के लिए जिनके बच्चों को उचित देखभाल और पोषण नहीं मिल पाता है। बिनीता ने ना सिर्फ कुपोषण से ग्रसित अपने बच्चों की जान बचाई, बल्कि एनआरसी से जुड़कर स्वयं को भी सशक्त बनाया। बिनीता की पहल एक छोटे प्रयास से आज सफल नेतृत्व का रूप ले चुकी है।

वह स्वयं घर घर जाकर समुदाय की दूसरी औरतों को संवेदनशीलता के साथ समझाती और प्रोत्साहित करती हैं। जिससे समुदाय की सभी महिलाएं अपने और अपने बच्चों की पोषण स्थिति में सुधार लाने के लिए निरंतर प्रयास कर सकें। यूनिसेफ को अपने प्रयासों पर गर्व है जहां लोढ़ा समुदाय की महिलाएं एनआरसी (न्यूट्रीशन रिसोर्स सेंटर) की पहल का सहयोग करते हुए ना सिर्फ स्वयं आती हैं, बल्कि अपने बच्चों को भी उचित पोषण दिलाती हैं।