विश्व बाल दिवस के अवसर पर भारत ने ‘भारत के हर बच्चे के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन’ आयोजित कर बाल अधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता सुदृढ़ की

19 नवंबर 2019

नई दिल्‍ली, 19 नवंबर 2019 - संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा बाल अधिकारों पर कन्वेशन (सीआरसी) के अपनाए जाने के 30 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 20 नवंबर को भारत दुनिया के साथ मिलकर विश्व बाल दिवस मनाएगा।

भारत में इस उत्सव को शुरू करते हुए राष्ट्रीय संसद में ‘भारत के हर बच्चे के लिए राष्ट्रीय सम्मेलन’ का आयोजन किया जाएगा। बाल सांसद और देश भर के बाल अधिकारों के समर्थकों के साथ मुख्य अतिथि होंगे, उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू; माननीय अध्यक्ष, लोकसभा, श्री ओम बिरला; तथा माननीय संचार मंत्री, सूचना प्रौद्योगिकी, कानून और न्याय, श्री रविशंकर प्रसाद। साथ ही यूनिसेफ और बच्चों के लिए सांसद समूह की संयोजक, माननीय संसद सदस्य, राज्य सभा, श्रीमती वंदना चव्हाण भी शामिल होंगी।

बाल सांसद और बाल अधिकार रक्षक, राष्ट्रीय बाल अधिकार अभियान, "नाइन इज माइन" का हिस्सा हैं। इस अवसर पर बच्चे अपने समुदायों में बाल अधिकारों के रक्षक और चैंपियन के रूप में अपनी बात कहेंगे और बाल अधिकारों के समर्थन में एक नए ‘रैप’ संगीत की रचना प्रस्‍तुत करेंगे।

राज्य सरकार के सहभागियों, नागरिक समाज, समुदाय के नेताओं, और विशेष रूप से बच्चों और युवाओं के साथ मिलकर यूनिसेफ भारत में ‘बच्चों के द्वारा बच्चों के लिए’ इस विश्वव्यापी दिन को मनाने में भाग ले रहा है। बाल अधिकारों के समर्थन में देश भर के ऐतिहासिक स्थल और स्मारक नीले रंग से सजाए जाएंगे।

डॉ. यास्मीन अली हक, यूनिसेफ इंडिया राष्ट्र प्रतिनिधि ने कहा "विश्व बाल दिवस एक मनोरंजक दिन होने के साथ-साथ हमें संदेश भी देता है।"

“भारत और दुनिया भर में, बच्चे अपने अधिकारों की मांग कर रहे हैं। विश्व बाल दिवस पर, वे हमसे पूछते हैं, ‘आप क्या करेंगे?’”

विश्व बाल दिवस इस वर्ष विशेष है क्योंकि इस बार बाल अधिकारों पर कन्वेशन, जो दुनिया भर के बच्चों के जीवन में बदलाव लाया है, के विश्व-भर के नेताओं द्वारा अपनाने के 30 वर्ष पूरे हो रहे हैं।

वर्ष 1992 में भारत ने सी.आर.सी. अपनाया और अनेक उपाय किए जिससे बच्चों को उनके अधिकार मिलने में बड़ी मदद मिली। उदाहरण के लिए:

  • जीवित जन्‍में शिशुओं की मृत्‍यु दर 1990 के 117 प्रति 1000 से गिरकर 2016 में 39 हुई, जिससे पांच वर्ष से कम उम्र के बच्‍चों की मृत्‍यु में कमी आई।
  • अधिक बच्चों को पीने का स्वच्छ पानी मिला, जो वर्ष 1992-1993 में 62 प्रतिशत से बढ़कर 2019 में 92 प्रतिशत हो गया।
  • प्राथमिक विद्यालय में अधिक लड़कियाँ जाने लगी, वर्ष 1990 में 6-10 वर्ष की लड़कियों की उपस्थिति दर 61 प्रतिशत से बढ़कर आज लगभग सर्वव्‍यापी हो गई है।

डॉ. हक ने कहा कि, "भारत बच्चों को जीवित रखने, लाखों की गरीबी दूर करने और पहले से कहीं अधिक बच्चे स्‍कूल जाएं, इसे सुनिश्चित करने जैसी कई चुनौतियों के लिए लड़ रहा है और सफलता प्राप्त कर रहा है।"

"यह उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि जहां राजनैतिक इच्छाशक्ति, सार्वजनिक समर्थन और सामूहिक दृढ़ संकल्प हो, वहां बच्चों के जीवन में सुधार होता है। जहां हम बच्चों के लिए इन बड़ी उपलब्धियों का उत्सव मनाते हैं, वहीं हमें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।”

तीस वर्ष गुज़र गए है, पर बाल अधिकार नहीं बदले, उनकी कोई समापन तारीख नहीं है। हालांकि, बचपन बदल गया है। दुनिया में पर्यावरण और तकनीकी बदलाव तेजी से हुए हैं, जिसके कारण बच्चों को नए खतरों का सामना करना है। वर्ष 1989 में, कोई विश्वव्यापी वेब नहीं था, जलवायु परिवर्तन की पूरी जानकारी नहीं थी और बड़ी संख्‍या में लोगों को अपनी ज़मीन छोड़ने पर मज़बूर करने वाले संघर्ष कम थे।

भारत में यूनिसेफ, नागरिक समाज, समुदायों, और सरकार के सभी स्तरों के साथ-साथ खुद युवा और बच्चों के साथ मिलकर बाल अधिकारों की चुनौतियों से निपटने के लिए काम करता है, खासकर सबसे गरीब और संवेदनशील बच्चों के लिए लेकिन हमें यह भी ध्यान रखना है कि लाखों बच्चों के पास अब भी पर्याप्‍त स्वास्थ्य सुविधाएँ, पोषण, शिक्षा और हिंसा से सुरक्षा नहीं है।

  • अब भी लगभग 600,000 नवजात शिशुओं की मृत्यु होती है।
  • कुपोषण, स्टंटिंग और एनीमिया से अभी भी भारत के बच्चे त्रस्त है। भारत में हर वर्ष पैदा होने वाले 1 करोड़ बच्चों का बचाव, रोके जा सकने वाली बीमारियों के खिलाफ टीकाकरण से नहीं किया जाता।
  • 60 लाख बच्चे स्कूल नहीं जाते और जो स्कूल जाते हैं, उनके सीखने का स्‍तर कम है।
  • लड़कियों के साथ जन्म से ही बुनियादी स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा देने में भेदभाव होता है।
  • बाल विवाह बड़े स्तर पर मौजूद है और हर वर्ष 18 वर्ष से कम उम्र की लगभग 15 लाख लड़कियों का विवाह कर दिया जाता है।

डॉ. हक ने कहा कि, "मैं यह जानकर उत्साहित हूं कि संसद के राष्ट्रीय नेता और प्रतिष्ठित मंत्री, बाल अधिकारों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने के लिए इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होंगे।"

यह ज़रूरी है कि राष्ट्रीय नेता, बच्चों और युवाओं से बाल अधिकारों के बारे में उनके अनुभव सुनें, तथा हर बच्चे की बात सुनने और हर बच्चे को साथ लेकर चलने की मांग का समर्थन करें।

बाल अधिकारों के लिए अपना समर्थन प्रदर्शित करने के लिए जागरूक और छोटे, मगर महत्वपूर्ण कार्य करने के लिए यूनिसेफ हर किसी को आमंत्रित कर रहा है। शिक्षा, लिंग समानता, स्वच्छता और पीने के पानी तक पहुंच, बाल श्रम समाप्त करने सहित हर बच्चे को हर अधिकार दिलाने में मदद करने के लिए और भारत में बाल विवाह की समाप्ति के अलावा, भारतीय बाल अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए ऑनलाइन हस्ताक्षर कर रहे हैं। प्रतिज्ञा लेने के लिए आप: https://help.unicef.in/childrights पर जा सकते हैं।

 

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