बच्चों को एआई टूल्स पर अत्यधिक निर्भरता से बचने की सलाह

सुरक्षित, समावेशी और सशक्त एआई ढांचा तैयार करने पर एक्सपर्ट्स का जोर

23 फ़रवरी 2026
A group picture of the panellists at the Indi.ai summit 2026
UNICEF

नई दिल्ली - भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद ने कहा कि भारत में डिजिटल पहुँच तेजी से बढ़ रही है और बच्चे अब एआई  आधारित प्लेटफॉर्म्स के संपर्क में आ रहे हैं। इसलिए उनके विकास को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित, समावेशी और सशक्त एआई  ढांचा तैयार करना आवश्यक है।

‘एआई  इम्पैक्ट  समिट  2026’ के दौरान फिक्की  और यूनिसेफ के एआई सत्र एआई  एआई एंड चिल्ड्रेन टर्निंग  प्रिंसिपल्स  इन टू  प्रैक्टिस  फॉर  सेफ , इंक्लूसिव  एंड  एम्पावरिंग  एआई  को संबोधित करते हुए प्रो. सूद ने कहा कि एआई  अब बच्चों की सीखने की शैली, सूचना तक पहुँच और व्यवहार को प्रभावित कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि एआई  टूल्स पर अत्यधिक निर्भरता बच्चों की आलोचनात्मक सोच और स्वतंत्र समस्या-समाधान क्षमता को कमजोर कर सकती है।

उन्होंने कहा कि एआई  एक दोधारी तलवार की तरह है— शासन का उद्देश्य अवसरों को मजबूत करना और जोखिमों को कम करना होना चाहिए। भारत ने एआई  गवर्नेंस के क्षेत्र में इंडिया  एआई  मिशन , एआई  गवर्नेंस  फ्रेमवर्क  और टेक्नो-लीगल ढांचे के तहत एआई  सुरक्षा को मजबूत करने जैसे कदम उठाए हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि हमें एआई  को डर की नजर से नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य को बदलने वाले अवसर के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि ऐसा गवर्नेंस तंत्र विकसित किया जाए जो बच्चों को संभावित जोखिमों से बचाए और उन्हें एआई  के अधिकतम लाभ उठाने का अवसर दे।

भारत, श्रीलंका, भूटान और मालदीव में नॉर्वे की राजदूत मे‑एलिन स्टेनर ने कहा कि बच्चों के लिए सुरक्षित और समावेशी एआई  नॉर्वे की प्राथमिकता है। डिजिटल और एआई -आधारित वातावरण विश्वसनीय और बच्चों के अधिकारों को सशक्त बनाने वाला होना चाहिए।

फिक्की  की महानिदेशक ज्योति विज ने कहा कि एआई  शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन में गहराई से समाहित हो रहा है और भारतीय एडटेक उद्योग बच्चों के लिए व्यक्तिगत सीखने के अनुभव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

यूनिसेफ  ऑफिस ऑफ इनोवेशन के ग्लोबल डायरेक्टर थॉमस डेविन ने कहा कि एआई  बच्चों की दुनिया को तेजी से बदल रहा है और इसके दीर्घकालिक प्रभावों को समझने के लिए जिम्मेदार और बाल-केंद्रित गवर्नेंस जरूरी है।

सत्र की शुरुआत यूनिसेफ  इंडिया यूथ एडवोकेट प्रसिद्धि सिंह द्वारा बच्चों और युवाओं के वक्तव्य पढ़कर की गई, जिसमें 184 देशों के 54,000 बच्चों के विचार शामिल थे।

वक्ताओं ने जोर दिया कि एआई  के डिजाइन, उपयोग और गवर्नेंस में बच्चों को केंद्र में रखा जाए ताकि अवसर बढ़ें और डिजिटल जोखिमों से सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकारें एआई  सिस्टम की निगरानी के लिए बहु-विषयक वॉचडॉग संस्थाएं मजबूत करें, जिनमें तकनीक, कानून, बाल अधिकार, शिक्षा और डेटा संरक्षण के विशेषज्ञ शामिल हों। 

पैनल चर्चा में हेनरिएटा रिडली, डॉ. संजीव शर्मा, गोकुल वी. सुब्रमण्यम, हेक्टर डी रिवोइर, अजय विज और कुमार अनुराग प्रताप ने भी अपने विचार साझा किए।

संपादकों के लिए नोट:

बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने वाली एआई नीतियों और प्रणालियों के निर्माण हेतु सरकारों और व्यवसायों के लिए अद्यतन दिशा-निर्देश यहाँ उपलब्ध हैं: https://www.unicef.org/innocenti/reports/policy-guidance-ai-children

एआई पर बच्चों और युवाओं का वक्तव्य: https://www.generationunlimited.org/documents/statement-children-and-young-people-safe-inclusive-and-empowering-ai-future

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