नीतियों और बजट में बच्चों को प्राथमिकता

यूनिसेफ: विश्व के बच्चों की स्थिति रिपोर्ट 2025 बच्चों के कल्याण में निवेश की वकालत

20 नवंबर 2025
UNICEF launches the State of the World’s Children 2025 report in New Delhi, calling for greater investment in children’s wellbeing and prioritising child-focused policies and budgets.”
UNICEF UNICEF launches the State of the World’s Children 2025 report in New Delhi, calling for greater investment in children’s wellbeing and prioritising child-focused policies and budgets.”

नई दिल्ली — यूनिसेफ की प्रमुख रिपोर्ट स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2025: एंडिंग चाइल्ड पॉवर्टी – आवर शेयर्ड इम्पेरेटिवजो आज विश्व बाल दिवस पर जारी की गईके अनुसार निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हर पाँच में से एक से अधिक बच्चा—लगभग 400 मिलियन बच्चे विश्व स्तर पर—कम से कम दो ऐसे क्षेत्रों से वंचित हैं जो उनके स्वास्थ्यविकास और कल्याण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। 

विश्व स्तर पर लाखों बच्चों को अब भी शिक्षास्वच्छ पानीसुरक्षित स्वच्छताआवासस्वास्थ्य और पोषण जैसी बुनियादी सेवाओं तक पहुँच नहीं है। यह असमानता को बढ़ाती हैविकास को धीमा करती है और सामाजिक ताने-बाने को कमजोर करती हैजिसका असर पीढ़ियों तक बना रहता है। 

रिपोर्ट में बताया गया है कि सबसे छोटे बच्चेदिव्यांग बच्चे और संकटग्रस्त क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे विशेष रूप से असुरक्षित हैं। जलवायु आघातराजनीतिक संकट और राष्ट्रीय ऋण परिवारों को और अधिक कठिनाई की तरह धकेल रहे हैंजिससे बच्चों के कल्याण में हासिल की गई उपलब्धियाँ खतरे में पड़ रही हैं। 

भारत विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है और यहाँ लगभग 460 मिलियन बच्चे 18 वर्ष से कम आयु के हैं। मुख्य प्रस्तुति में यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने भारत द्वारा गरीबी उन्मूलन में की गई उल्लेखनीय प्रगति और बच्चों में निवेश को बढ़ावा देने वाले भारत के प्रमुख कार्यक्रमों को रेखांकित कियाजिससे भारत 2030 की समयसीमा से पहले ही एसडीजी 1.2 की दिशा में अग्रसर है। 

नीति आयोग के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI 22, Niti Ayog 2025)[1] के अनुसारभारत ने 2013–14 से 2022–23 के बीच 248 मिलियन नागरिकोंजिनमें बच्चे भी शामिल हैंको बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला। राष्ट्रीय एमपीआई दर 29.2% से घटकर 11.3% हो गई। सामाजिक सुरक्षा कवरेज में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है—2015 में 19% से बढ़कर 2025 में 64.3% तकजिससे 940 मिलियन नागरिकों तक पहुँचा गया। सतत सामाजिक क्षेत्र निवेश ने गरीबी उन्मूलन (ILOSTAT and GOI 2025) में इस प्रगति को संभव बनाया।[2] 

सिंथिया मैककैफ्री ने कहा, “स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2025 रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि हमारे पास मौजूद उपकरणों और ज्ञान से चाइल्ड पावर्टी का अंत संभव है। बच्चों में निवेश से अधिक लाभकारी कोई निवेश नहीं है। भारत की प्रगति दिखाती है कि प्रभावी कार्यक्रमों में और तेजी लाकर हम अंतिम छोर तक पहुँच सकते हैं और भारत की विज़न 2047 को साकार कर सकते हैं। बच्चों के कल्याण में सुधार केवल संसाधनों का प्रश्न नहीं हैबल्कि यह सामूहिक इच्छाशक्ति और नेतृत्व का विषय है कि हम हर निर्णय में बच्चों को प्राथमिकता दें।” 

भारत के प्रमुख कार्यक्रम जैसे पोषण अभियानसमग्र शिक्षापीएम-किसानमिड-डे मील योजनाबेटी बचाओ बेटी पढ़ाओस्वच्छ भारतजल जीवन मिशन और भारत की विश्व-अग्रणी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना ने मिलकर पोषणशिक्षाआय सहायतास्वच्छता और वित्तीय समावेशन को बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराया है। 

राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान (NIPFP) के विज़िटिंग डिस्टिंग्विश्ड प्रोफेसर डॉ. पिनाकी चक्रवर्ती ने कहा, “सामाजिक क्षेत्र में सतत सार्वजनिक निवेश बच्चों के कल्याण के लिए आवश्यक है। बच्चों के कार्यक्रमों के लिए वित्तीय स्थान सुरक्षित करना और स्वास्थ्य व शिक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों में कुल खर्च बढ़ाना भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।” 

ऑब्ज़र्वर रिसर्च फ़ाउंडेशन (ORF) के विकास अध्ययन के उपाध्यक्ष एवं कोलकाता प्रमुख डॉ. नीलांजन घोष ने कहा, “विकसित भारत @2047 को केवल प्रति व्यक्ति जीडीपी के संकीर्ण दृष्टिकोण से परिभाषित नहीं किया जा सकता। एक सच्चे विकसित अर्थतंत्र को अपनी दृष्टि में समानतावितरणात्मक न्याय और स्थिरता को शामिल करना होगा। भारत का वास्तविक परिवर्तन इंजन बच्चों में सतत निवेश है—भविष्य की मानव पूंजी और सामाजिक-आर्थिक प्रगति का सबसे महत्वपूर्ण भंडार। आज उनके स्वास्थ्यपोषणशिक्षा और अवसरों को पोषित करके हम जनसांख्यिकीय लाभांश को खोल सकते हैं और एक लचीले व समावेशी राष्ट्र की नींव रख सकते हैं। बच्चों में निवेश के आर्थिक और सामाजिक प्रतिफल अत्यंत ऊपर हैं।” 

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि भारत में लगभग 206 मिलियन बच्चों को अब भी कम से कम छह आवश्यक सेवाओं—आवासस्वच्छतापानीपोषणशिक्षा और स्वास्थ्य—में से किसी एक तक पहुँच नहीं है। इनमें से 62 मिलियन बच्चे दो या अधिक वंचनाओं का सामना कर रहे हैंजिससे उनकी पूरी क्षमता तक पहुँचने में बाधा उत्पन्न होती है। 

रिपोर्ट सरकारों और साझेदारों से आह्वान करती है कि वे: 

चाइल्ड पावर्टी को समाप्त करने को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाएं और नीतियों व बजट में बाल अधिकारों को शामिल करें 

समावेशी सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों का विस्तार करें ताकि कमजोर परिवारों की रक्षा हो सके 

गुणवत्तापूर्ण शिक्षास्वास्थ्य सेवापोषणस्वच्छता और आवास तक समान पहुँच सुनिश्चित करें 

देखभाल करने वालों के लिए सम्मानजनक कार्य और आर्थिक सुरक्षा को बढ़ावा देंजो बच्चों के कल्याण के लिए आवश्यक है 

बच्चों को उन निर्णयों में भाग लेने के लिए सशक्त करें जो उनके भविष्य को प्रभावित करते हैं 

कार्यक्रम का समापन इस स्मरण के साथ हुआ कि दुनिया के पास पहले से ही चाइल्ड पावर्टी को कम करने के लिए आवश्यक प्रमाणउपकरण और अनुभव मौजूद हैं—अब केवल सामूहिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता है।  

[1] MPI 22, Niti Ayog 2025

[2] ILOSTAT and GOI 2025

फोटो के लिंक के लिए यहां क्लिक करें: https://weshare.unicef.org/Package/2AM408QPAX6Q  

स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2025 रिपोर्ट यहाँ से डाउनलोड करें: https://www.unicef.org/reports/state-of-worlds-children/2025 

मीडिया संपर्क

Alka Gupta
Communication Specialist
UNICEF
टेल: +91-730 325 9183
ईमेल: [email protected]
Sonia Sarkar
Communication Officer (Media)
UNICEF
टेल: +91-981 01 70289
ईमेल: [email protected]

About UNICEF

UNICEF strives to uphold the rights of every child, protecting them from harm and all forms of discrimination, so that they can grow up healthy and educated to reach their full potential. This work is in line with UNICEF’s globally recognized mandate and its support of national priorities

For more information on UNICEF India and its work visit https://www.unicef.org/india/. Follow us on TwitterFacebookInstagramGoogle+ and LinkedIn