जहाँ लगातार प्रगति तैयार कर रही बड़े बदलाव की नींव

झारखंड में बच्चों के लिए यूनिसेफ़, राज्य सरकार, साझेदारों और युवाओं द्वारा मिलकर किए जा रहे प्रयासों को देखना बेहद प्रेरणादायक है

सिंथिया मैककैफ़्री, प्रतिनिधि, यूनिसेफ़ इंडिया
Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, interacting with children in Toklo B Anganwadi Centre in West Singbhum in Eastern Indian state of Jharkhand, highlighting the importance of play For Every Child
UNICEF

Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, interacting with children in Toklo B Anganwadi Centre in West Singbhum in the eastern Indian state of Jharkhand, highlighting the importance of play For Every Child
 

03 दिसम्बर 2025

फील्ड नोट @ झारखंड | 

मेरी तीन दिन की झारखंड यात्रा पूरी हो गई। ज़मीनी स्तर पर हो रहा सहयोग, लोगों से बातचीत, और सीखने का अनुभव मेरे मन में गहरी छाप छोड़ गया। गाँवों में मिली मुस्कुराहटें, बच्चों और किशोरों से मुलाकातें, और फ्रंटलाइन वर्करों का समर्पण—सबने दिल छू लिया। मेरे लिए यह देखना बेहद उत्साहजनक था कि वे दूर-दराज़ इलाकों में जाकर बच्चों की भलाई के लिए जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं।

झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, विधानसभा अध्यक्ष, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव, महिला, बाल विकास एवं सामाजिक कल्याण विभाग की सचिव, और पश्चिम सिंहभूम के जिला कलेक्टर से मुलाकातों ने इस यात्रा को और खुशनुमा बना दिया। नेतृत्वकर्ताओं द्वारा कड़ी से कड़ी जोड़कर बच्चों, महिलाओं और समुदायों का जीवन बेहतर बनाने की दिशा में किये जा रहे कामों को समझना मेरे लिए प्रेरक रहा।

यूनिसेफ़ का झारखंड सरकार, साझेदार संगठनों और युवाओं के साथ मिलकर काम कर पाना दिल को छू लेने वाला था—खासकर राज्य की 26% आदिवासी आबादी तक समावेशी कार्यक्रम पहुँचाने में हमारी तकनीकी साझेदारी एक मजबूत कड़ी के रूप में काम कर रही है।

Accredited Social Health Activist (ASHA) -  Sukhsari, and Auxiliary Nurse Midwife, Indu with mother Suni and her daughter Suru
UNICEF Accredited Social Health Activist (ASHA) - Sukhsari, and Auxiliary Nurse Midwife, Indu with mother Suni and her daughter Suru in their village in West Singhbhum, in eastern Indian state of Jharkhand

टोकलो बी में एक दिन: जहाँ से शुरू होती है उपचार की राह

पश्चिम सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर ब्लॉक के लाल मिट्टी वाले गांवों में मैंने आंगनवाड़ी सेविका पालो, आशा कार्यकर्ता सुखसरी और एएनएम इंदु से मुलाकात की। वे नई माताओं को नवजात शिशुओं की देखभाल, उचित आहार, अतिरिक्त पोषण और नियमित वजन-नाप के जरिए कुपोषण रोकने में मदद कर रही हैं।

मैं एक प्री-स्कूल की कक्षा में भी शामिल हुई। जहाँ छोटे बच्चे खेल-खेल में सीख रहे थे। उनकी मुस्कुराहटें बता रही थीं कि यही शुरुआत उन्हें स्कूल के लिए तैयार कर रही है।

Sita Sardar, a tribal woman Mukhiya, who was previously a WASH Leader or  Jal Sahiya, and played a pivotal role in promoting menstrual hygiene, safe water practices, and sanitation in her village Ulidih
UNICEF Sita Sardar, a tribal woman Mukhiya, who was previously a WASH Leader or Jal Sahiya, and played a pivotal role in promoting menstrual hygiene, safe water practices, and sanitation in her village Ulidih in eastern Indian state of Jharkhand

नई माताओं से बातें और गुणवत्तापूर्ण देखभाल की सीख

दोपहर में चक्रधरपुर उप-मंडलीय अस्पताल में 21 वर्षीय करिश्मा गुइया से मुलाकात हुई, जो अपनी नवजात बच्ची को स्तनपान करा रही थीं। अस्पताल की नर्स, जो यूनिसेफ़ द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त है, उनसे लगातार सहयोग कर रही थी। यह अस्पताल झारखंड के 12 LaQshya कार्यक्रम वाले स्वास्थ्य केंद्रों में से एक है, जहाँ प्रसव कक्ष की देखभाल बेहतर की जा रही है। मैंने देखा कि छोटे-छोटे तकनीकी बदलाव बड़े परिणाम ला रहे हैं।

सीता दीदी से मुलाकात: जमीनी नेतृत्व की मिसाल

मैंने उलिदीह गाँव की सीता दीदी से मुलाकात की। सीता सरदार जो पहले महज एक गृहिणी थी, आज वो गांव की मुखिया, जल सहिया और एक मज़बूत आदिवासी WASH नेता हैं। 

सीता दीदी ने मासिक धर्म स्वच्छता पर खुलकर बात की, अपने गाँव को खुले में शौच से मुक्त बनाया और 350 से अधिक शौचालय निर्माण का नेतृत्व किया। झारखंड देश का एकमात्र राज्य है जहाँ एक संगठित, वित्त-पोषित महिला WASH कैडर है—और सीता इसका शानदार उदाहरण हैं।

Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India with students at Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya in Chaibasa Sadar in West Singhbhum, Jharkhand
UNICEF Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India with students at Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya in Chaibasa Sadar in West Singhbhum, Jharkhand

सुरक्षित स्थान बनाना: नुकसान होने से पहले रोकने की दिशा में कदम

झारखंड में यूनिसेफ़ का मुख्य काम बच्चों की सुरक्षा को मज़बूत करना है, और यह मैंने हर जगह महसूस किया। JSLPS और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकर्ताओं से मुलाकात हुई। वे बाल विवाह रोकने, पारिवारिक देखभाल बढ़ाने और महिलाओं के साथ पैरेंटिंग प्रशिक्षण करने में जुटे हुए हैं।

रूपा दास ने बताया कि यूनिसेफ़ के सहयोग से उन्हें बच्चों की सुरक्षा मुद्दों पर और बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिली है।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में सीख रही लड़कियां

मेरे इस दिन का अंत चाईबासा के KGBV स्कूल में हुआ—जहाँ 349 लड़कियाँ पढ़ रही हैं। अधिकांश आदिवासी और वंचित समुदायों से आने वाली ये लड़कियाँ STEM लैब, जीवन कौशल, इको क्लब और मासिक धर्म स्वच्छता सत्रों के जरिए आत्मविश्वास से भर रही हैं।

कक्षा 8 की छात्रा लवली ने बताया कि पहले उन्हें विज्ञान से डर लगता था, लेकिन प्रयोग आधारित सीखने की तकनीक ने सब बदल दिया। अब स्कूल हम बच्चों को सिर्फ सिखाता नहीं है, बल्कि सशक्त भी बनाता है।

Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, with a group of young journalists in the UNICEF Ranchi Office and four youth leaders who are part of UNICEF’s Child Reporters programme.
UNICEF Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, with a group of young journalists in the UNICEF Ranchi Office and four youth leaders who are part of UNICEF’s Child Reporters programme.

वे आवाज़ें जो मेरे साथ घर लौट रहीं हैं

मेरे साथ सिर्फ आँकड़े नहीं लौटे… बल्कि 14 वर्षीय ऋचा की कहानी—जो घर में भेदभाव के खिलाफ खड़ी हुई, बच्चों की पढ़ाई की वकालत करती है, और बराबरी के अधिकारों के लिए बोलने का साहस रखती है।

मेरे साथ लौट रही है... वो माँ, जो अब अपने बच्चे को पोषण देना जानती है, वह नर्स, जो ड्यूटी के बाद भी रुकी ताकि माँ की मदद हो सके, वह लड़की, जो वैज्ञानिक बनने का सपना देखती है।

मेरे लिए यही असली बदलाव है... वह बदलाव जो कभी पद या पहचान पर निर्भर नहीं होता, बल्कि साहस और सेवा की भावना पर खड़ा होता है। कभी-कभी बदलाव साड़ी में लिपटा हुआ गाँव की पगडंडियों से गुजरता है — एक हाथ में अपनी ड्यूटी और दूसरे हाथ में हिम्मत लिए हुए।

यही असली परिवर्तन है... और यही कारण है कि यूनिसेफ़ हर बच्चे के लिए काम करता है।

#ForEveryChild

ब्लॉग के बारे में

यूनिसेफ अपने हर काम में प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देता है। अपने साझेदारों के साथ मिलकर, यूनिसेफ बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित बचपन को व्यावहारिकता में बदलने के लिए 190 देशों और क्षेत्रों में काम कर रहा है।

यूनिसेफ इंडिया के और इसके कामों के बारे में अधिक जानकारी के लिए https://www.unicef.org/india/hi पर विजिट करें।

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