सूरत के मॉडल इम्यूनाइज़ेशन सेंटर से टीकाकरण को मिली नई गति

सूरत में टाइम मैनेजमेंट और समुदाय-केंद्रित देखभाल के ज़रिए लगातार टीकाकरण को रखा कायम

UNICEF
After receiving his vaccination, Tejas is gently handed over by Khushbu to his father, Sanjeev, as the family prepares to head home.
UNICEF/UNI782130/Jariwala
08 दिसम्बर 2025

सूरत, गुजरात — शाम के सात बज चुके हैं, लेकिन सूरत के पाल अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (यू-सीएचसी) में अब भी रौनक बनी हुई है। टीकाकरण कक्ष के अंदर एक युवा दंपति अपने दो महीने के बेटे को गोद में प्यार से झुला रहे हैं, जबकि नर्स अगला टीका लगाने की तैयारी कर रही है। 

इस परिवार में जहां माता-पिता दोनों नौकरी करते हैं, देर शाम तक खुला रहने वाला यह केंद्र उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है।

खुशबू गुप्ता बताती हैं कि, “अपने पहले बच्चे के समय हमें या तो छुट्टी लेनी पड़ती थी या टीकाकरण छूट जाता था। अब हम काम के बाद आ जाते हैं। यह बहुत सुविधाजनक है। तेजस और हमारी बेटी दोनों की एक भी खुराक नहीं छूटी है।” उनके पति संजीव भी सहमति में सिर हिलाते हैं।

एक बदलाव, जो मायने रखता है

यह बदलाव संयोग से नहीं, बल्कि सोच-समझकर किया गया है। फरवरी 2024 में, सूरत नगर निगम ने पाल यू-सीएचसी में मॉडल इम्युनाइजेशन सेंटर (MIC) की शुरुआत की। य इसका उद्देश्य शहरी इलाकों में रूटीन टीकाकरण (RI) को तेज़ और सुलभ बनाना था।

पाल यू-सीएचसी की मेडिकल ऑफिसर डॉ. क्रिना रवि पटेल बताती हैं कि, “पहले यहां टीकाकरण केवल हफ्ते में दो दिन होता था।”

At the Pal UCHC, Staff Nurse Nancy holds Tejas during his vaccination.
UNICEF/UNI782118/Jariwala At the Pal UCHC, Staff Nurse Nancy holds Tejas during his vaccination.
Khusbhu Gupta and Sanjeev understand the growth and development of their 2-month-old son, Tejas at the Model Immunization Centre in Pal UCHC, Surat.
UNICEF/UNI782127/Jariwala Khusbhu Gupta and Sanjeev understand the growth and development of their 2-month-old son, Tejas at the Model Immunization Centre in Pal UCHC, Surat.

“अब यह केंद्र सप्ताह में छह दिन, सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है। पिछले साल जहाँ हम महीने में लगभग 320 बच्चों को टीके लगाते थे, अब यह संख्या 700 से 800 तक पहुँच गई है।”

यह केंद्र विभिन्न वर्गों के लोगों को सेवाएँ देता है, जिनमें ज़ीरो-डोज़ बच्चे, कम आय वाले परिवार, निर्माण कार्य से जुड़े श्रमिक और प्रवासी मज़दूर शामिल हैं। लगभग 10 से 15 प्रतिशत परिवार प्रवासी हैं, जो अक्सर जिलों या राज्यों के बीच आते-जाते रहते हैं।

ऐसे परिवारों तक पहुँचने में एएनएम, शहरी आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता अहम भूमिका निभाते हैं। वे परिवारों को ट्रैक करते हैं, अभिभावकों को समझाते हैं और आने वाले टीकाकरण की याद दिलाते हैं, ताकि कोई भी बच्चा 11 बीमारियों से बचाव करने वाली 10 जीवनरक्षक वैक्सीन से वंचित न रह जाए। 

समय के साथ, सरकारी टीकाकरण व्यवस्था पर समुदाय का भरोसा काफ़ी बढ़ा है। कुछ साल पहले तक केवल लगभग हर पाँच में से एक परिवार ही सरकारी केंद्रों पर टीकाकरण के लिए आता था। आज लगभग हर दस में से सात परिवार ऐसा कर रहे हैं। यहाँ तक कि जिन बच्चों का जन्म निजी अस्पतालों में हुआ है, उनके माता-पिता भी अब टीकाकरण के लिए पाल अर्बन कम्युनिटी हेल्थ सेंटर जैसे सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों को चुन रहे हैं।

प्रशिक्षित स्टाफ और भरोसेमंद व्यवस्था

इस केंद्र की रोज़मर्रा की गतिविधियों की धुरी हैं नर्स नैन्सी क्रिश्चियन, जो यहां आने वाले हर बच्चे को टीका लगाती हैं।

नैंसी बताती हैं कि, “हमें सूरत नगर निगम से नियमित प्रशिक्षण और सुपरविजन मिलता रहता है। अगर किसी वैक्सीन में बदलाव होता है या नई वैक्सीन जुड़ती है, तो हमें तुरंत जानकारी दी जाती है।”

वह आगे बताती हैं कि, “हम गर्भवती महिलाओं को एएनसी के दौरान टीके देते हैं, किशोरों को टीडी वैक्सीन दी जाती है। विशेष ज़रूरत वाले बच्चों को बाल रोग विशेषज्ञ से सलाह लेकर सुरक्षित तरीके से टीकाकरण करते हैं। सरकार यह सुनिश्चित करती है कि हमारा ज्ञान और कौशल हमेशा अपडेट रहे।”

इस केंद्र पर लोगों का भरोसा सिर्फ प्रशिक्षित स्टाफ के कारण नहीं, बल्कि मजबूत वैक्सीन लॉजिस्टिक्स सिस्टम की वजह से भी है। यहाँ वैक्सीन को आइस-लाइनड रेफ्रिजरेटर (ILR) में रखा जाता है और E-VIN तथा वैक्सीन वायल मॉनिटर (VVM) के ज़रिए उनकी निगरानी होती है।

यह केंद्र सूरत नगर निगम के उन आठ मॉडल टीकाकरण केंद्रों में से एक है, जो यह दिखाते हैं कि मजबूत ढांचा और जवाबदेही मिलकर क्या बदलाव ला सकते हैं।

ऐसी व्यवस्था, जिससे सभी को मिला फायदा

खुशबू गुप्ता जैसे परिवारों पर इस केंद्र का असर साफ दिखाई देता है। उनका दो महीने का बेटा तेजस निजी अस्पताल में पैदा हुआ, लेकिन उसके टीके पाल यू-सीएचसी में लगे।

एक अन्य अभिभावक बताते हैं, “पहले मुझे अपनी साइकिल रिपेयर की दुकान बंद करनी पड़ती थी या किसी और से मदद लेनी पड़ती थी। अब मैं शाम 6 बजे दुकान बंद करता हूं और दोनों बच्चों को यहां ले आता हूं। सुबह 8 से रात 8 बजे का समय मेरे लिए और मेरे जैसे कई परिवारों के लिए बहुत सही है।”

The Model Immunization Centre team at Pal UCHC pictured with the UNICEF Gujarat team.
UNICEF/UNI782035/Jariwala The Model Immunization Centre team at Pal UCHC pictured with the UNICEF Gujarat team.

यूनिसेफ की भूमिका और साझेदारी

यूनिसेफ ने शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण कवरेज बेहतर करने के लिए मॉडल इम्युनाइजेशन सेंटर्स की स्थापना का समर्थन किया है। यूनिसेफ के हेल्थ ऑफिसर डॉ. श्रवण चेनजी कहते हैं कि, “शहरी नियमित टीकाकरण व्यवस्था को मजबूत करने की व्यापक रणनीति के तहत यूनिसेफ तकनीकी सहयोग, नीति-स्तरीय समर्थन और ज्ञान साझा करने का काम करता है।”

यूनिसेफ के हेल्थ स्पेशलिस्ट डॉ. नारायण गाओनकर कहते हैं कि, “यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लक्ष्य हासिल करने के लिए शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में नवाचार और निवेश बेहद ज़रूरी है।”

शहरी स्थानीय निकायों, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, निजी स्वास्थ्य क्षेत्र और यूनिसेफ जैसे विकास साझेदारों के बीच साझेदारी से लोगों पर केंद्रित, साझेदारी-आधारित और डेटा-आधारित प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं तैयार हो रही हैं। इससे समाज के हर वर्ग के लिए स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ बन रही हैं।

यह मॉडल दिखाता है कि सही समय, सही व्यवस्था और सही नीयत साथ मिलकर काम करें, तो बच्चों के टीकाकरण जैसी बुनियादी सेवा भी लाखों परिवारों के लिए आसान और भरोसेमंद बन सकती है।