महाराष्ट्र में अल नीनो के साए के बीच समुदाय की अगुवाई वाली मज़बूती
जब बारिश कम हुई तो, ग्राम पंचायतों, महिलाओं, किसानों और युवाओं ने मिलकर अपने हाथ में ली पानी की सुरक्षा
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खरीफ का मौसम खत्म हो चुका था, लेकिन ग्रामीण महाराष्ट्र में एक अनकही बेचैनी बनी हुई थी। अल नीनो के आने की चर्चा धीरे धीरे तेज़ होती जा रही थी। कमज़ोर मानसून का मतलब था समुदायों की पानी की सुरक्षा और बच्चों से जुड़े ज़रूरी संसाधनों पर सीधा खतरा।
2026 में अल नीनो का यह साया महाराष्ट्र के उन सूखाग्रस्त इलाकों के हालात और बिगाड़ सकता था, जहां पहले से ही पानी की किल्लत रहती है। छोटे किसान परिवारों में रहने वाले लाखों बच्चों के लिए कुपोषण बढ़ने और पानी से होने वाली बीमारियां फैलने का खतरा था।
इन बढ़ते जोखिमों को देखते हुए एक साझेदारी बनी। यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग और वाटरशेड ऑर्गेनाइजेशन ट्रस्ट (डब्ल्यूओटीआर) के ज़मीनी अनुभव के साथ एक पहल शुरू हुई, ताकि स्थानीय स्तर पर आपदा से निपटने की ताकत बढ़ाई जा सके और गांवों में पानी की सुरक्षा बनी रहे।
हर गांव तक पहुंचने की कोशिश
यह पहल 9 ज़िलों में चली, जिनमें धाराशिव, गढ़चिरौली, छत्रपति संभाजीनगर, पुणे, नासिक, सांगली, अहिल्यानगर, बुलढाणा और ठाणे शामिल हैं। इसका दायरा 364 ग्राम पंचायतों तक फैला।
- स्थानीय नेतृत्व को मज़बूत करना: पांच गहन कार्यशालाएं हुईं, जिनमें ग्राम पंचायत सदस्यों, महिलाओं, किसानों और युवाओं को जलवायु से जुड़े खतरों और जोखिम की मैपिंग की जानकारी दी गई।
- गांव का 'जल बजट': 35 चुनिंदा गांवों में प्रशिक्षित युवाओं और संसाधन व्यक्तियों ने जल बजट की शुरुआत की। इसमें गांव में उपलब्ध पानी और उसकी खपत का हिसाब लगाया जाता है, जिससे खेती का पैटर्न और घरेलू इस्तेमाल के लिए पानी का भंडार समझदारी से तय किया जा सका।
सबकी मेहनत, श्रमदान की मिसाल
जो सीखा गया, वो जल्द ही ज़मीन पर दिखने लगा। विश्व पर्यावरण दिवस पर गांवों में श्रमदान की एक बड़ी लहर चली। किसान, युवा और गांव के प्रमुख लोग कंधे से कंधा मिलाकर अपने आसपास के पर्यावरण को संवारने में जुट गए।
- बहते पानी की रफ्तार धीमी करने के लिए लगातार कंटूर ट्रेंच खोदे गए।
- नमी रोकने के लिए ढीले पत्थरों के ढांचे और मिट्टी के बांध बनाए गए।
- पुराने चेक डैम और पानी की नालियों से गाद निकाली गई।
- झरनों को फिर से जीवित करने का काम किया गया और पेड़ लगाए गए।
इन कोशिशों से पानी रोकने की अतिरिक्त क्षमता तैयार हुई। अनुमान है कि इससे करीब 2,10,426 लीटर बारिश का पानी रोका जा सकेगा।
हर बच्चे के लिए सुरक्षित कल
इस कार्यक्रम से सीधे तौर पर 1,260 से ज़्यादा लोग जुड़े और 15,000 से ज़्यादा लोगों को इसका अप्रत्यक्ष फायदा मिला। लोगों की आदतों में बदलाव लंबे समय तक टिके, इसके लिए डब्ल्यूओटीआर ने स्थानीय ज़रूरतों के हिसाब से सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री तैयार की, जिसमें गांव के जल बजट के फॉर्मेट भी शामिल हैं।
जब अल नीनो की परीक्षा आई, तो कुएं सूखे नहीं और पानी के टैंकरों की ज़रूरत नहीं पड़ी। स्थानीय स्तर पर की गई योजना और समुदाय की अपनी ज़िम्मेदारी के भाव की वजह से इन 364 ग्राम पंचायतों के बच्चों की पानी की सुरक्षा बनी रही।