राजस्थान में जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किया प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल

जल संरक्षण के लिए प्राकृतिक संसाधनों का स्थाई प्रबंधन करके लोगों में जगाई उम्मीद की लौ

Sumayyah Qureshi
The group of women pictured near tradition water body known as ‘Pokhar’ equipped with solar - based water pumps in Barki village in Karauli district in Rajasthan, India. The women have been part of the youth group which works actively to sustainable manage natural water bodies.
UNICEF/UNI592636/Magray
03 सितंबर 2024

करौली, भारत – चट्टानी इलाके में पहाड़ की चोटी पर बसा बरकी गांव कहने को तो (डांग) वन क्षेत्र है, लेकिन यहां प्राकृतिक संसाधनों और वनस्पतियों का अभाव है।

गांव में दूर-दराज कहीं झांडियां तो कहीं पेड़ों के झुरमुट ही दिखते हैं। दशकों से राजस्थान के करौली जिले के सुदूर बरकी गांव के लोग गर्मियों में पानी की कमी के चलते अपने घरों को बंद करके पशुओं के साथ निकल जाते थे।

हालांकि गांववासियों ने अपनी पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्षा के जल को इकट्ठा करके इस्तेमाल करने की कड़ी मशक्त भी की। लेकिन इसका कोई फायदा नहीं होता था। हर साल जनवरी-फरवरी में वर्षा का जल कम होने के साथ ही लोग अपने पशुओं को लेकर दूसरे गांवों में पानी की तलाश में निकल जाते थे। वहीं महिलाएं भी पीने के पानी के लिए रोजाना लंबी दूरी तय करके सिर पर मटके रखकर दूर-दराज से पानी लाती थी।

यहां के गैर सरकारी संगठन ग्राम गौरव संस्थान ने युनिसेफ के सहयोग से ग्रामीणों को समझाकर पोखरा और पारस (मिट्टी के बांध) जैसे मिट्टी और जल संरक्षण के तरीकों को गांव में लागू किया।

इससे चट्टानी पठार इलाके में भी किसान खेती करके फसलें उगाने लगे। ग्राम गौरव संस्थान के साथ यूनिसेफ के प्रयासों से अंतिम मील तक पानी पहुंचना सुनिश्चित हुआ। यूनिसेफ वर्ष 2023 से ग्राम गौरव संस्थान भागीदार रहा है, जो जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता के तत्वों को मजबूत करने के लिए संस्थान के साथ मिलकर काम कर रहा है।

Jagdish Gurjar, a member of the Gram Gaurav Sansthan, a community-based grassroots organization, with the youth of Barki village in the Karauli district of Rajasthan, India.
UNICEF/UNI592704/Magray Jagdish Gurjar, a member of the Gram Gaurav Sansthan, a community-based grassroots organization, with the youth of Barki village in the Karauli district of Rajasthan, India.

“हर साल वर्षा जल कम होने के बाद पुरूष अपने मवेशियों को लेकर जहां दूसरे गांवों का रूख करते थे। वहीं ग्रामीण महिलाएं भी पानी लाने के लिए रोजाना लंबी दूरी तय करती थी। महिलाएं और पुरुष अब खदानों में भी काम नहीं करते हैं, क्योंकि अब हालात बदल चुके हैं। गांव में पानी की उपलब्धता ने लोगों को गरीबी के जाल से बाहर निकलने में मदद की है और उन्हें सिलिकोसिस होने से बचाया है। अब लोग अपने खेतों में ही काम करते हैं। पानी की उपलब्धता से ग्रामीणों के पास खेती, पशुओं और गृहकार्यों के लिए पर्याप्त दूध, भोजन और पानी है,”

ग्राम गौरव संस्थान के सचिव जगदीश गुर्जर

पानी की भरपूर उपलब्धता ने महिलाओं की दूर-दराज से सिर पर पानी ढोने की समस्या का भी निदान कर दिया। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई भी सुचारू रूप से होने लगी है। सौर ऊर्जा द्वारा समर्थित स्त्रोतों ने जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय स्थिरता में मदद की। इससे सिंचाई और वन संरक्षण को सक्षम बनाने में मदद मिली। 

Bhautee Meena, 28, from Barki village is pictured while  harvesting crops in her field in  Daang forest region in Karauli district of Rajasthan, India.
UNICEF/UNI592709/Magray Bhautee Meena, 28, from Barki village harvesting crops in her field in Daang forest region in Karauli district of Rajasthan, India.

बरकी निवासी 25 वर्षीय कृष्णा कुमारी मीना बताती हैं कि तालाब के पानी ने हमें भोजन और चारा उगाने में मदद की है। पहले लोग खनन का काम करते थे, लेकिन अब उनमें से ज़्यादातर लोग गांव में कृषि करने लगे हैं। यहां तक की पानी की कमी के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती थी, क्योंकि माएं दूर से पानी लाने जाती थी। अब बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर हुआ है वह रोजाना स्कूल जाने लगे हैं। अब बच्चों बड़ों सभी को नल से पीने के लिए स्वस्थ पानी मिलता है और वे अपनी साफ-सफाई की ज़रूरतें भी पूरी कर पाते हैं,” 

मीना ने कहा कि गांव में पानी की ज़रूरतें ग्राम गौरव संस्थान के सहयोग से पूरी हुईं, जिसने तालाब में बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए ग्रामीणों के साथ मिलकर अथाह प्रयास किये। यह पहल गांव के युवाओं के सक्रिय समर्थन से संभव हुई है, जिन्होंने जल प्रबंधन को कामयाब बनाने के लिए पारंपरिक ज्ञान का उपयोग किया, जिससे हमारा समुदाय आत्मनिर्भर और राजस्थान में बढ़ते तापमान व जलवायु परिवर्तन के बीच सक्षम बन सका।

वहीं, बरकी निवासी 34 वर्षीय राकेश मीना ने बताया कि गांव के सभी युवाओं ने मिलकर पानी को संरक्षित करने के लिए तालाब के किनारे मिट्‌टी का बांध बनाने में मदद की। इसके लिए गांव के युवाओं ने मिलकर युवा समूह बनाया, जो तालाब के रख-रखाव में पुरी तरह से सक्रिय रहा।

बरकी में बदलाव के प्रतिनिधी 75 वर्षीय गोपाल मीना भी बने हैं। आज उनके दो कमरों के छोटे से घर के बरामदे में घर में ही उगाई गई सरसों और गेहूं की बोरियां रखी हुई हैं। गोपाल ने गांव में आजीविका के साधन खोजने में दूसरों को रास्ता दिखाया है।

A traditional water body known as a ‘Pokhar’ equipped with solar-based water pumps in Barki village in Karauli district in Rajasthan, India.
UNICEF/UNI592649/Magray A traditional water body known as a ‘Pokhar’ equipped with solar-based water pumps in Barki village in Karauli district in Rajasthan, India.

ग्राम गौरव संस्थान के संरक्षक मुरारी मोहन गोस्वामी ने बताया कि, "जल संरक्षण से संबंधित प्रयासों के कारण (बरकी में) लोगों के पलायन में काफी कमी आई है।" पारंपरिक जल संचयन स्रोतों ने दूरदराज के इलाकों में भी पानी उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

Nine-year-old Sachin  is captured drinking water from an earthen pot during a heatwave at his  home in Barki village, Karauli district, Rajasthan, India.
UNICEF/UNI592724/Magray Nine-year-old Sachin  is captured drinking water from an earthen pot during a heatwave at his  home in Barki village, Karauli district, Rajasthan, India.

यूनिसेफ सरकार, स्थानीय गैर सरकारी संगठनों के साथ मिलकर राजस्थान में समाज के सबसे वंचित वर्ग को पानी उपलब्ध कराने के लिए कार्य कर रहा है। विशेष रूप से पिछड़े क्षेत्रों से आने वाली महिलाओं और बच्चों को सरकारी योजनाओं के माध्यम से पानी उपलब्ध कराने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

यूनिसेफ सबसे कमजोर समुदायों व पिछड़े वर्गों में स्थाई परिवर्तन लाने के लिए काम करता है। इसमें लिंग समानता के साथ पर्यावरणीय स्थिरता, जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों को भी ध्यान में रखा जाता है।