बच्चों के टीकाकरण से संबंधित अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माता-पिता को अपने बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में सूचित करने और सकारात्मक निर्णय लेने में मदद करने के लिए उत्तर

UNICEF
Vaccinators immunising children at an Anganwadi centre
UNICEF/UNI296835/Narain
26 सितंबर 2024

भारत में टीकाकरण ने न सिर्फ समुदायों को चिकित्सा सहायता प्रदान की है, बल्कि वित्तीय और सामाजिक रूप से भी सबल बनाया है।

बचपन में होने वाली बीमारियां अक्सर विकलांगता का कारण बनती हैं, जिससे परिवारों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता हैं। टीकाकरण से बच्चों को स्वस्थ रखने और रोगाणुओं से होने वाली विभिन्न बीमारियों से सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

सक्रिय टीकाकरण अभियानों के कारण कुछ गंभीर बीमारियों पर नियंत्रण हो गया है, लेकिन साथ ही नई संक्रामक बीमारियां भी सामने आ रही हैं; इसलिए टीकाकरण पर ध्यान देना और भी जरूरी हो जाता है।

यहां हमने माता-पिता के लिए टीकाकरण पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों का एक सेट बनाया है, ताकि उन्हें अपने बच्चे के स्वास्थ्य के संबंध में सूचना और सकारात्मक निर्णय लेने में मदद मिल सके।

  1. टीकाकरण क्या है?

    टीकाकरण तब होता है जब किसी बच्चे को संक्रामक बीमारी के खिलाफ इंजेक्शन या मुंह द्वारा ओरल रूप से बूंदों द्वारा टीके की खुराक दी जाती है, इससे संक्रामक बीमारी के खिलाफ बच्चे के शरीर एंटीबॉडी विकसित होती है।

  2. मेरे बच्चे के लिए टीकाकरण के क्या फायदे हैं?

    टीकाकरण बच्चों को इंजेक्शन और ओरल बूंदों के जरिए दिया जाता है। यह बच्चे को गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रखता है। यदि टीकाकरण से बीमारियों को नहीं रोका जाता, तो ये बीमारियाँ संक्रमण का कारण बन सकती हैं। जो बच्चे के स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित करती हैं, यहां यहाँ तक कि मृत्यु का कारण भी बन सकती हैं।

  3. क्या मेरे बच्चे को बीमारियों से प्राकृतिक सुरक्षा प्राप्त है?

    बच्चों को मां के गर्भ में और जन्म के बाद मां के दुध से प्राकृतिक सुरक्षा मिलती है। मां का दूध कुछ बीमारियों के खिलाफ बच्चे की इम्यूनिटी को मजबुत बनाता है, लेकिन जैसे-जैसे बच्चा बढ़ता है, यह सुरक्षा धीरे-धीरे खत्म होने लगती है। जिससे बच्चे बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। टीकों और मौखिक खुराक द्वारा टीकाकरण इस घटती इम्यूनिटी को बढ़ाता है, और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा करता है।

Mayuresh Kadam with her mother at a routine immunization  at a Government hospital in Maharashtra
UNICEF/UN0558969/Singh Mayuresh Kadam with her mother at a routine immunization at a Government hospital in Maharashtra
  1. टीके मेरे बच्चे को रोग पैदा करने वाले जीवों से कैसे बचाते हैं?

    टीके रक्त में "एंटीबॉडी" के रूप में काम करते हैं। यह शरीर में एंटीबॉडी को सक्रिय करके संक्रमणों से बचाते हैं, और रोग पैदा करने वाले जीवों को मारते देते हैं या शरीर में प्रवेश करते ही बीमारी पैदा करने के उनके प्रभाव को खत्म कर देते हैं।

    टीकों में आमतौर पर रोग पैदा करने वाले बैक्टीरिया का कमजोर अंश होता है। जब टीके को बच्चे के शरीर में लगाया जाता है, तो वे बच्चे को बीमारी पैदा किए बिना विशिष्ट एंटीबॉडी देते हैं। ये एंटीबॉडीज़, एक बार शरीर में पैदा होने के बाद, संक्रमण के बाद होने वाली बीमारियों से बच्चे की सुरक्षा करते हैं।

  2. क्या टीकाकरण के कारण सुरक्षा बच्चे के पूरे जीवन भर रहती है?

    टीकाकरण के बाद शरीर में पैदा होने वाली एंटीबॉडी कई वर्षों तक रहती है, जो ज्यादात्तर टाइम बच्चों को बीमारियों से सुरक्षित रखती है। हालांकि टीका लगने के बाद अगर बच्चे को बीमारी हो भी जाती है तो उसके लक्षण बहुत ही हल्के होते हैं उन बच्चों की तुलना में जिन्हें कभी टीका नहीं लगाया गया।

    कुछ टीकों के लिए ज्यादा सुरक्षा बढ़ाने के लिए बूस्टर डोज दी जाती है।

  3. किसी भी बच्चे का टीकाकरण किस उम्र में शुरू होना चाहिए?

    यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम के तहत बच्चों का टीकाकरण बच्चे के जन्म के साथ ही शुरू हो जाता है। बचपन के तपेदिक (बीसीजी), पोलियो (ओपीवी) और मातृ संचारित हेपेटाइटिस बी (हेप बी टीका) के खिलाफ टीकाकरण बच्चे को जन्म के तुरंत बाद दिया जाता है।

    इसके बाद, राष्ट्रीय टीकाकरण अनुसूची में दी गई उम्र के अनुसार विशिष्ट टीके दिये जाते हैं।

  4.  मेरे बच्चे के लिए समय पर टीकाकरण क्यों महत्वपूर्ण है?

    सही उम्र में और आवश्यक संख्या में खुराक दिए जाने पर टीके अधिक सुरक्षा देते हैं। एक निश्चित उम्र में बच्चे कुछ बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। इसलिए, बीमारी से होने वाले नुकसान को रोकने के लिए उस विशेष उम्र में टीके लगाए जाते हैं।

    उदाहरण के लिए, पोलियो की बीमारी पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सबसे अधिक होती है; इसलिए, पोलियो के खिलाफ टीकाकरण अभियान चलाकर पांच साल से उससे कम उम्र के बच्चों को दिया जाता है। 

    इसी तरह, आवश्यक खुराक की संख्या गंभीर संक्रमण को रोकने के लिए और बीमारी से सुरक्षा करने के लिए जरूरी होती है। राष्ट्रीय टीकाकरण अनुसूची में विभिन्न टीकों, उन्हें दिए जाने की उम्र और टीके से बीमारियों के प्रति बचाव की पूर्ण सुरक्षा आदि की जानकारी दी गई है।

A child getting vaccinated at an anganwadi centre
UNICEF/UNI296834/Narain A child getting vaccinated at an anganwadi centre
  1. कुछ टीके उन बच्चों को क्यों नहीं लगाए जाते जो एक निश्चित उम्र तक पहुँच चुके हैं?

    किसी विशेष टीके के बच्चे की तय उम्र होती है। आमतौर पर, बच्चों को संक्रमित होने की सबसे अधिक संवेदनशील उम्र में ही टीके दिए जाते हैं।

    एक निश्चित उम्र में पहुंचने के बाद बच्चों को कुछ संक्रमणों जैसे बचपन का तपेदिक आदि से नेचुरल प्रोटेक्शन मिल जाता है और बच्चे उस अवधि को पार कर चुके होते हैं जब बीमारी जीवन के लिए खतरा हो सकती थी। इसीलिए एक तय उम्रसीमा के बाद बच्चों को टीकाकरण की जरूरत नहीं होती।

  2. यदि बच्चे को टीका लगवाने में देरी हो तो क्या करना चाहिए?

    यदि किसी कारण से बच्चे को टीका या टीके की कोई खुराक देने में देरी होती है, तो जल्द से जल्द टीकाकरण किया जाना चाहिए।

    टीकाकरण सुनिश्चित करने के लिए अपने एरिया की आशा और एएनएम से संपर्क करके अपने बच्चे को टीका लगवाएं। आपको यह समझना जरूरी है कि टीके की खुराक में हो रही के कारण पूरे टीकाकरण शेड्यूल को दोबारा शुरूआत से शुरू करने की जरूरत नहीं होती। इसकी बजाय बाकी बचे हुए टीकाकरण शेड्यूल को जारी रखकर उसे पूरा करना चाहिए।

  3. मेरे बच्चे को टीका लगवाने में कितना खर्च आएगा? 

    टीके बहुत महंगे होते हैं और सरकार उन्हें खरीदने, सही तापमान पर स्टोर करके रखने और कहीं भी सप्लाई पहुंचाने में बहुत पैसा खर्च करती है।

    हालाँकि, टीके, सीरिंज, माँ और बाल सुरक्षा कार्ड, और दवाएँ और पूरक (पैरासिटामोल, ओआरएस, जिंक और विटामिन ए) सहित सभी टीकाकरण सेवाएँ सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर मुफ्त दी जाती हैं। इसी तरह गर्भवती महिलाओं के लिए टीकाकरण सेवाएँ भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं पर निःशुल्क मुहैया कराई जाती हैं।

  4. हम अपने बच्चों का टीकाकरण कहां करा सकते हैं?

    आप अस्पतालों, मेडिकल कॉलेजों, शहरी औषधालयों, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी), उप-केंद्रों और आंगनवाड़ी केंद्रों सहित किसी भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा पर जा सकते हैं, अपने बच्चों का टीकाकरण करवा सकते हैं।

    गांवों और कुछ शहरी क्षेत्रों (जैसे मलिन बस्तियों और मोहल्लों) में, एएनएम टीकाकरण कैंप लगाकर बच्चों को टीकाकरण सेवाएं देती हैं।

    सरकारी स्वास्थ्य विभाग ने यह सुनिश्चित किया है कि टीकाकरण सेवाएँ आपके निकट उपलब्ध हों। पोलियो जैसे अभियानों को छोड़कर, राष्ट्रीय टीकाकरण अनुसूची के तहत घर-घर जाकर टीके नहीं दिए जाते हैं।

  5. नवजात शिशु को कौन से टीके लगाए जाते हैं?

    राष्ट्रीय टीकाकरण अनुसूची के अनुसार, इन तीन टीकों - ओपीवी, बीसीजी और हेपेटाइटिस बी में से प्रत्येक की एक खुराक नवजात शिशुओं को दी जाती है, चाहे प्रसव का स्थान कुछ भी हो।

Haat Bazar immunization camp in Charpal near Bijapur
UNICEF/2018/Altaf Ahmad Haat Bazar immunization camp in Charpal near Bijapur
  1.  हमने कई ऐसे केस भी देखे हैं जब बच्चा बीमारी के खिलाफ टीकाकरण के बावजूद बीमार हो गया, ऐसे में टीका लगवाने का क्या फायदा?

    टीकाकरण लंबे समय से होता आया है और यह बच्चों को बीमारियों से सुरक्षित रखने में कारगार भी साबित होते हैं। लेकिन कोई भी टीका 100 प्रतिशत प्रभावी नहीं होता।

    इसके अलावा हर बच्चे में एंटीबॉडी क्षमता भी अलग-अलग होती है। इसीलिए टीकाकरण होने के बावजूद कुछ बच्चों में बीमारी हो जाती है। हालांकि ऐसे केस बहुत ही कम होते हैं और ऐसे बच्चों में बीमारी के लक्षण बहुत ही हल्के होते हैं उन बच्चों की तुलना में जिन्हें टीकाकरण नहीं कराया जाता।

  2.  अगर कोई बच्चा पहले बीमारी से संक्रमित हो चुका है या किसी बीमारी से पीड़ित है, तो क्या उन्हें अब भी उस बीमारी के खिलाफ टीकाकरण की आवश्यकता होगी?

    हां बच्चे को बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद टीके की जरूरत होती है। ज्यादात्तर बीमारियाँ (उदाहरण के लिए, डिप्थीरिया, टेटनस, रोटावायरस डायरिया, हिब निमोनिया और जापानी एन्सेफलाइटिस) पूर्ण विकसित संक्रमण और बीमारी के बाद भी थोड़े समय के लिए सुरक्षा देती हैं। इसलिए ऐसे मामलों में टीकाकरण शेड्यूल के मुताबिक बच्चे को खुराक की जरूरत होती है।

  3. अपने बच्चे को टीका लगवाने के बाद मुझे क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?

    टीकाकरण के बाद होने के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए बच्चे को खुराक लगवाने के बाद तत्काल देखभाल के लिए टीकाकरण सत्र पर आधे घंटे तक इंतजार करें।

  • टीकाकरण के बाद या मौखिक टीके लगने के बाद भी स्तनपान या पूरक आहार जारी रखें।
  • आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि इंजेक्शन वाली जगह पर कोई दवा या जड़ी-बूटी न लगी हो।
  • यदि आपके बच्चे में साइड इफेक्ट के कोई सिमटम्स नजर आते हैं तो एएनएम/वैक्सीनेटर या नजदीकी किसी भी सरकारी स्वास्थ्य सुविधा के चिकित्सा अधिकारी से परामर्श लें।
  1. मेरे बच्चे का जन्म सर्जरी (सीजेरियन सेक्शन) द्वारा हुआ था और उसका जन्म नौ महीने से पहले हुआ था। क्या उन्हें टीका लगाया जा सकता है?

    हां, प्रीमच्यौर बच्चे को भी राष्ट्रीय टीकाकरण अनुसूची के अनुसार टीका लगाया जाना चाहिए। सभी बच्चों को टीकाकरण उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि बच्चे की डिलवरी सीजेरियन सेक्शन से या प्रीम्योर हुई है। मां किसी चिकित्सीय स्थिति से पीड़ित है या जन्म के समय बच्चे का वजन कम है।

  2. क्या टीके से एलर्जी हो सकती है?

    कुछ बच्चों को कुछ टीकों (जैसे एंटीबायोटिक्स या संरक्षक) से एलर्जी हो सकती है, और ऐसे बच्चों में टीका लगाने से एलर्जी के सिमट्म्स दिखने लग जाते हैं, जैसे टीकाकरण के बाद खुजली या शरीर पर लाल धब्बे का दिखना।

    यदि एलर्जी का कोई इतिहास है, तो कृपया किसी भी टीकाकरण से पहले एक योग्य चिकित्सक से चिकित्सा सलाह जरूर लें।