खेल का विज्ञान

खेलना सिर्फ मौज-मस्ती नहीं, बच्चे के शारीरिक-मानसिक विकास के लिए भी जरुरी

UNICEF
Right to Play
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13 जून 2024

खेलना बस मौज-मस्ती और सीखना ही नहीं होता, यह आपके बच्चे के विकास का आधार होता है। क्या आप जानते हैं कि पहले तीन वर्षों में आपके बच्चे का दिमाग पूरी उम्र की तुलना में ज्यादा विकसित होता है। अच्छी खबर यह है कि आपके बच्चे के विकास में सहायता करने का सबसे अच्छा तरीका वास्तव में आप दोनों के लिए काफी सरल और मज़ेदार है।

हमें ऐसा लगता है कि खेल सिर्फ मनोरंजन के लिए होते हैं, लेकिन नवजात शिशु व पांच साल तक के बच्चों के लिए यह आनंद से कहीं ज्यादा हैं। खेलों से बच्चे समस्याओं का समाधान करना, अपने विचारों को व्यक्त करना सीखते हैं, खेलों से आपके व आपके बच्चे के बीच का बंधन मजबूत होता है। आप ही अपने बच्चे के पहले गुरू और पहले दोस्त होते हैं।
 

खेल मौज मस्ती से बढ़कर है। यह सीखने का तरीका है, इसे एक्सप्लोर करते हुए एक खुशहाल और स्वस्थ जीवन का निर्माण कर सकते हैं।

बच्चों के साथ खेलना परवरिश का आधार है। बच्चों के साथ खेलने से उनके दिमाग का विकास होता है, खेल आजीवन स्वास्थ्य का आधार होते हैं और यह रोग प्रतिरोधक शक्ति पैदा करते हैं।

खेल आंनदायक होते हैं, लेकिन बच्चों को सीखाने का भी यह अच्छा माध्यम हैं। खेलों के जरिये बच्चे पर्यावरण से जुड़ते हैं, फैसले लेने की क्षमता बढ़ती है और सामाजिक समझ का विकास होता है, संबंध बनाते हैं और उनमें कलप्नाशक्ति के साथ साथ रचनात्मकता और जिज्ञासा बढ़ती है।

खेल नेचुरल तरीके से बच्चों को एक्टिव रखने के साथ उन्हें खुश और स्वस्थ भी रखते हैं। अन्य आयु वर्ग की अपेक्षा जीवन के शुरूआती पांच वर्षों में खेलों के जरिए बच्चों का दिमाग तेजी से विकसित होता है।

इसके बाद खेलों से बच्चा जोखिम उठाना सीखता है, प्रयोग करना सीखता है और अपनी दायरा बढ़ाना सीखता है। बच्चे अपनी लीमिट में रहते हुए स्वयं का मुल्यांकन करते हैं।

Neural Connections
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खेल और बच्चे का मानसिक स्वास्थ्य

खेल-खेल में बच्चे अपने आसपास की दुनिया को समझते हैं। जब वे मौज-मस्ती कर रहे होते हैं, तो उनका मानसिक विकास हो रहा होता है। खेलों से ही बच्चे अपने आसपास के वातावरण को समझते और सीखते हैं। जब वह खेल में आंनद लेते हुए किसी विशेष अंग का विकास करते हैं, तब वह अपने मस्तिक में सीखने, समझने व भावनात्मक कौशल का विकास करते हैं।

लेकिन खेल की शक्ति जल्दी सीखाने के साथ-साथ अन्य अहम रोल भी प्ले करती है। खेल से बच्चे व आपका मानसिक स्वास्थ्य सुधरता है। आपको खेल के लिए समय निकालना सीखना चाहिए, क्योंकि यह आनंददायी ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है।

जो बच्चे हर रोज अपने माता-पिता के साथ खेलते हैं, उनमें चिंता, डिप्रेशन, गुस्सा और नींद की कमी जैसी समस्याएं होने की संभावना कम हो जाती है।

Play helps to strengthen the bond between you and your child
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अपने बच्चे को प्यार करके, उसकी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान देकर आप उसकी मानसिक, सोशल स्किल और भावनात्मक नींद को मजबूती देते हैं। जो आगे जाकर उसकी भलाई और एक बेहतर भविष्य बनाने में मददगार साबित होगी। 

यहां तक की अक्सर बच्चों के साथ खेलने और समय बिताने के दौरान बड़े भी अक्सर अपनी चिंताओं, अवसाद, काम और अन्य दूसरी कमिटमेंट्स को भूल जाते हैं। खेलने में वक्त बिताना न सिर्फ बच्चों बल्कि बड़ों के लिए भी मददगार साबित होते हैं।

Play helps reduce stress levels
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एक रिसर्च के अनुसार खेलने के लिए समय निकालने वाले बच्चों को लंबे समय तक तनाव जैसी कोई शिकायतें नहीं होती। लंबे समय तक तनाव में रहना बच्चे के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। अपने माता-पिता के साथ खेलने से बच्चों को पॉजिटिव तरीके से ऐसी समस्याओं से निपटने में मदद मिलती है।

Play helps children process difficult emotions
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कई बार बच्चे खेल के जरिए अपने साथ हुए हादसे को दोहरा रहे होते हैं, और माता-पिता होने के नाते हमें इसे समझने की जरुरत होती है। जैसे, अगर आपके बच्चे ने कभी दो बड़े लोगों को आपस में झगड़ते हुए देखा होगा तो वह अपने खिलौनों के साथ इस हादसे को दोबारा दोहरा सकता है।

अपने बच्चे के साथ खेलते हुए आपको हर पल का आनंद उठाना चाहिए और मुस्कुराते हुए अपने बच्चे पर पूरा ध्यान देना चाहिए। आपके बच्चे के साथ समय बिताने से उसे महसूस होगा कि आप उनसे प्यार करते हो और आपके लिए वह जरूरी हैं।

Play helps to build confidence
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