यूनिसेफ ने जारी की “द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024” रिपोर्ट

बच्चों के भविष्य को प्रभावित करने वाले वैश्विक चलन (मेगाट्रेंड) पर प्रकाश डालती यूनिसेफ की रिपोर्ट

20 नवंबर 2024
SOWC 2024 Report launch India
UNICEF/UNI686473/Parashar Zafrin Chowdhury [ Chief Communication, Advocacy and Partnership, UNICEF India], Kartik Verma [UNICEF India Youth advocate ], Suruchi Bhadwal [Director, Earth Science and Climate Change, The Energy Research Institute (TERI)], Arjan De Wagt [ Deputy Representative UNICEF India ] and Cynthia McCaffrey, UNICEF India Representative ) at the India SOWC Report launch on 20 November 2024, UNICEF office, New-Delhi, India.

नई दिल्ली, 20 नवंबर 2024 - यूनिसेफ ने वैश्विक फ्लैगशिप रिपोर्ट 'द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024' जारी कर दी है। 'बदलती दुनिया में बच्चों का भविष्य' शीर्षक से इस रिपोर्ट को यूनिसेफ के भारत प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे (Cynthia McCaffrey) ने द एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (TERI) के पृथ्वी विज्ञान और जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम के निदेशक सुरुचि भदवाल के साथ जारी किया। इस दौरान यूनिसेफ इंडिया के युवा अधिवक्ता कार्तिक वर्मा और बच्चे भी उपस्थित रहे।

यूनिसेफ की रिपोर्ट में मध्य शताब्दी में बच्चों के जीवन में आने वाले बदलावों का खाका खींचने का प्रयास किया गया। यह रिपोर्ट 2050 के दशक में तीन वैश्विक स्तर के बड़े प्रचलन/प्रवृत्ति (megatrends) का उल्लेख करती है, जिनमें जनसांख्यिकीय बदलाव, जलवायु और पर्यावरणीय संकट तथा सीमांत प्रौद्योगिकियों पर रिसर्च की गई है। इन अध्ययनों के आधार पर वर्तमान और इस सदी के मध्य के बीच (अब से 2050 तक) बच्चों का जीवन, उनके अधिकार और बच्चों के लिए अवसर नए स्वरूप में होंगे।

यूनिसेफ भारत की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्रे ने रिपोर्ट में जारी अनुमानों पर अपने विचार रखते हुए कहा कि 'द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024' रिपोर्ट में उल्लेखित तीन मेगाट्रेंड हमें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि बेहतर होती दुनिया में हम कैसे एक शानदार भविष्य बना सकते हैं जहाँ हर बच्चा अपने अधिकारों को सुरक्षित कर सके।

उन्होंने कहा कि यह रिपोर्ट बताती है कि हर बच्चे के अधिकारों को बढ़ाने वाले भविष्य का निर्माण करने में देशों का समर्थन कैसे किया जाए। मैककैफ्रे ने कहा कि आज लिए गए हमारे निर्णय ही वर्ष 2050 में हमारे बच्चों को विरासत में मिलेंगे और एक नई दुनिया को आकार देंगे। इसलिए हमारे पास सभी बच्चों के लिए एक समृद्ध और टिकाऊ भविष्य बनाने का अवसर और जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा हमें बच्चों और उनके अधिकारों को ध्यान में रखकर ही अपनी नीति व रणनीति तैयार करनी होगी।  इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर हम बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य बना सकते हैं।

'द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन' रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वर्ष 2050 तक दुनिया में बच्चों की आबादी लगभग 2.3 बिलियन (230 करोड़) हो जाएगी।  उम्मीद जताई जा रही है कि 2050 तक बच्चों की वैश्विक जनसंख्या में एक-तिहाई से अधिक हिस्सेदारी भारत, चीन, नाइजीरिया और पाकिस्तान की होगी।

आज की तुलना में 2050 में भारत में बच्चों की आबादी 35 करोड़ होगी। बच्चों की बढ़ती आबादी के साथ नित नई चुनौतियाँ भी बढ़ेंगी। इसलिए इन चुनौतियों से निपटने के लिए बच्चों और युवाओं की शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और कौशल विकास में अधिक निवेश करना बहुत जरूरी है।

लगभग 100 करोड़ बच्चे पहले से ही जलवायु संबंधी खतरों के अधिक जोखिम वाले देशों में रहते हैं। अगर कई बड़ा हस्तक्षेप नहीं होता है तो यह आंकड़ा और भी अधिक हो जाएगा। बच्चे जलवायु और पर्यावरणीय संकट के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, विशेष रूप से वे बच्चे जो ग्रामीण और कम आय वाले समुदाय में रहते हैं। जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरों से बहुत अधिक गर्मी, बाढ़, जंगल में आग और चक्रवात जैसी घटनाओं में आठ गुना वृद्धि होने का अनुमान है और इनका सीधा असर बच्चों पर पड़ेगा।

ये जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियाँ बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा और शुद्ध पेयजल जैसी मूलभूत जरूरतों पर विपरीत असर डालेंगी। इससे हमारे बच्चे ना केवल कमजोर होंगे, बल्कि उनका भविष्य भी अंधकारमय होगा। बच्चों के जलवायु जोखिम सूचकांक (सीसीआरआई) के अनुसार, वर्ष 2021 में वैश्विक स्तर पर 163 रैंक वाले देशों में से भारत 26वें स्थान पर था। इस रैंकिंग में उन देशों को शामिल किया जाता है जिनके बच्चे अत्यधिक गर्मी, बाढ़, सूखा और वायु प्रदूषण जैसे जोखिमों से जूझ रहे होते हैं। 

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UNICEF Let’s listen to the future, and act on it.

यूनिसेफ भारत की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने कहा कि यूनिसेफ पिछले 75 वर्ष से भारत के साथ साझेदारी कर रहा है। बच्चों को उनकी महत्वाकांक्षाओं को साकार करने में समान पहुँच और अवसर प्रदान करने में सहायता कर रहा है, जहाँ युवा भारत को दूसरी शताब्दी में ले जाने के लिए सशक्त बनाया गया है।

द एनर्जी रिसर्च इंस्टीट्यूट (TERI) के पृथ्वी विज्ञान और जलवायु परिवर्तन कार्यक्रम के निदेशक सुरुचि भदवाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष, दोनों माध्यम से अलग-अलग प्रभाव डालता है, जिससे वे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में बच्चों को शामिल करने की सख्त जरूरत है। बच्चे परिवर्तन के सक्रिय एजेंट बनकर जलवायु एजेंडे में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि निश्चित ही आजकल के बच्चे नई तकनीक के साथ बड़े हो रहे हैं। नए-नए ऐप्स, गैजेट्स, वर्चुअल असिस्टेंट, गेम्स और लर्निंग सॉफ्टवेयर में जुड़ी एआई (AI) तकनीक ने बच्चों के सामने रचनात्मकता की नई दुनिया के दरवाजे खोल दिए हैं, लेकिन ये बात भी सच है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज बच्चों के लिए अच्छी उम्मीद और जोखिम दोनों ही साथ लेकर आती है। इस मामले में बच्चों में ही गहरा अंतर खड़ा हो गया है।

सुरुचि भदवाल ने कहा कि बच्चों में डिजिटल विभाजन स्पष्ट देखा जा सकता है। वर्ष 2024 में उच्च आय वाले देशों में 95 प्रतिशत से अधिक लोग इंटरनेट से जुड़े हुए हैं, जबकि कम आय वाले देशों में लगभग 26 प्रतिशत लोग ही इंटरनेट से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में दर्शाए गए तीन बड़े रुझानों (megatrends) का प्रभाव बच्चों के अस्तित्व और जीवन के प्रति उम्मीद में किए जाने वाले सरकारी निवेश द्वारा निर्धारित किया जाएगा। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सामाजिक आर्थिक विकास; शिक्षा; लैंगिक समानता; शहरीकरण और पर्यावरण के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किए जाने की आवश्यकता है। क्योंकि इन क्षेत्रों में निवेश ही बच्चों का बेहतर कल तैयार करने में मदद करेंगे।

रिपोर्ट के निष्कर्ष भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह अनुमान लगाया गया है कि कुल वैश्विक बाल आबादी का 15 प्रतिशत भारत में होगा। भारत के लिए भविष्य की योजना बनाना महत्वपूर्ण है ताकि बच्चे अपनी पूरी क्षमता हासिल कर सकें।

निश्चित ही भारत ने बच्चों के अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इस पथ पर आगे बढ़ने के लिए, हमें स्वास्थ्य, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल और नौकरी के अवसरों में निरंतर बाल केंद्रित निवेश के माध्यम से चुनौतियों का सामना करना होगा। हर बच्चे की प्रौद्योगिकी तक समान पहुँच के लिए डिजिटल विभाजन की खाई को पाटना होगा। आने वाले दशकों में, भारत की लगभग आधी आबादी के शहरी क्षेत्रों में रहने का अनुमान है। बच्चों के अनुकूल टिकाऊ शहरी बुनियादी ढांचे में निवेश की आवश्यकता होगी।

इस सब में सबसे अधिक महत्वपूर्ण है कि हम बच्चों और युवाओं से उनके सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में सुनने की क्षमता विकसित करें। उनकी समस्याओं को ध्यान से सुनें, ताकि हम जो भविष्य बना रहे हैं वह टिकाऊ, न्यायसंगत और शांतिपूर्ण हो।

यूनिसेफ इंडिया के युवा अधिवक्ता कार्तिक वर्मा ने COP29 में अपनी हालिया भागीदारी से अंतर्दृष्टि साझा की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक बाल अधिकार संकट है- यह हमारे स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र कल्याण को प्रभावित कर रहा है। COP29 में उन्होंने दुनिया भर के युवाओं को नवोन्वेषी समाधान प्रस्तुत करते और तत्काल कार्रवाई की माँग करते देखा था। उन्होंने कहा कि जलवायु शिक्षा को स्कूलों में पाठ्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना चाहिए, ताकि अधिक बच्चे समाधान का हिस्सा बन सकें।

'द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024' रिपोर्ट तीन मेगाट्रेंड्स द्वारा उत्पन्न चुनौतियों और अवसरों को पूरा करने का आह्वान करती है:

  • शहरों में बच्चों के लिए शिक्षा, स्थायीत्व और सेवा में निवेश करना।
  • बुनियादी ढांचे, प्रौद्योगिकी, आवश्यक सेवाओं और सामाजिक सहायता प्रणालियों में बेहतर जलवायु सिस्टम (climate resilience) का विस्तार करना।
  • सभी बच्चों के लिए कनेक्टिविटी और सुरक्षित प्रौद्योगिकी का खाका प्रदान करना।

20 नवंबर को विश्व बाल दिवस के अवसर पर इस बार 'द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स चिल्ड्रन 2024' रिपोर्ट लॉन्च की गई है। यूनिसेफ इस मौके पर 'भविष्य को सुनें' के जरिए बच्चों और युवाओं की आवाज पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान करता है, ताकि हम एक ऐसी दुनिया की रचना कर सकें, जैसी हमारे बच्चे चाहते हैं। लेकिन, इसके लिए हमें अपने बच्चों की बात सुननी होगी।

विश्व बाल दिवस की पूर्व संध्या पर हर साल की तरह इस बार भी नई दिल्ली सहित देशभर की एतिहासिक इमारतें बाल अधिकारों के समर्थन में नीली रोशनी से जगमगा उठी। राष्ट्रपति भवन, इंडिया गेट, संसद भवन, रायसीना हिल के उत्तरी और दक्षिणी ब्लॉक, कुतुब मीनार से लेकर संयुक्त राष्ट्र कार्यालय #For EveryChild एकजुटता प्रदर्शित करते हुए नीली रोशनी में नहाए। वहीं #GoBlue ने समावेशन, समानता और गैर-भेदभाव का महत्व समझाया, जो हर बच्चे के लिए उज्जवल भविष्य की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

विश्व के बच्चों की स्थिति पर 2024 रिपोर्ट डाउनलोड करने के लिए https://www.unicef.org/reports/state-of-worlds-children/2024 पर क्लिक करें।

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यूनिसेफ के बारे में

यूनिसेफ अपने हर काम में प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देता है। अपने साझेदारों के साथ मिलकर, यूनिसेफ बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित बचपन को व्यावहारिकता में बदलने के लिए 190 देशों और क्षेत्रों में काम कर रहा है।

यूनिसेफ इंडिया भारत में सभी लड़के-लड़कियों के लिए स्वास्थ्य, पोषण, शुद्ध जल उपलब्धता, स्वच्छता, शिक्षा और बाल संरक्षण कार्यक्रमों को बनाए रखने और विस्तारित करने के लिए लोगों के समर्थन और दान पर निर्भर है। हर बच्चे को जीवित रहने और आगे बढ़ने में मदद करने के लिए हमारा समर्थन करें!

यूनिसेफ इंडिया के और इसके कामों के बारे में अधिक जानकारी के लिए https://www.unicef.org/india/ पर विजिट करें।

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