यूनिसेफ और (एनएफडीसी) ने 56वें IFFI में बच्चों और किशोरों पर आधारित कहानियों को सामने लाने के लिए की साझेदारी
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पणजी — इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ इंडिया (IFFI) 2025 के 56वें संस्करण में यूनिसेफ और एनएफडीसी ने लगातार चौथे वर्ष साझेदारी की है, ताकि बचपन और किशोरावस्था पर बनी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फिल्मों को मंच मिल सके। इन फिल्मों के माध्यम से बच्चों के जीवन, उनके अनुभवों और जिम्मेदार कहानी-कहानी (responsible storytelling) को केंद्र में लाया जा रहा है। यूनिसेफ इंडिया की ओर से प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री और कम्यूनिकेशन, एडवोकेसी, एंड पार्टनरशिप चीफ जाफ़रीन चौधरी ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
इस साझेदारी के तहत नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NFDC) और यूनिसेफ द्वारा चयनित पांच फ़िल्में फेस्टिवल के दौरान गोवा के सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जा रही हैं। ये फ़िल्में बच्चों और युवाओं की दृढ़ता, पहचान, समावेशन और उम्मीद जैसे विषयों को दर्शाती हैं।
इस वर्ष प्रदर्शित फ़िल्में:
- Odyssey of Joy | कोसोवो | 99 मिनट
- Happy Birthday | मिस्र | 90 मिनट
- The Beetle Project | कोरिया गणराज्य | 100 मिनट
- Kadal Kanni | भारत (तमिल) | 126 मिनट
- Putul | भारत (हिंदी) | 99 मिनट
यूनिसेफ इंडिया प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने Odyssey of Joy के कलाकारों के साथ रेड कार्पेट वॉक किया और फिल्म की स्क्रीनिंग में हिस्सा लिया। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा:
“सिनेमा दिलों और दिमागों को जोड़ने की शक्ति रखता है। जब बच्चों की कहानियाँ सम्मान और सच्चाई से दिखाई जाती हैं, तो फिल्में लोगों में सहानुभूति बढ़ाती हैं, रूढ़ियों को चुनौती देती हैं और सकारात्मक बदलाव को प्रेरित करती हैं। आईएफएफ में यूनिसेफ और एनएफडीसी की साझेदारी बच्चों के अधिकारों को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण मंच है।”
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव, पृथुल कुमार ने कहा कि: “यूनिसेफ और आईएफएफआई दोनों इस विश्वास पर आधारित हैं कि कला समाज को बदलने की ताकत रखती है। जब फिल्मों में बच्चों के जीवन को केंद्र में रखा जाता है, तो यह एक सहानुभूतिपूर्ण और जिम्मेदार संस्कृति को बढ़ावा देता है।”
यूनिसेफ और एनएफडीसी ने फिल्म बाज़ार नॉलेज सीरीज़ के तहत एक उच्च-स्तरीय पैनल चर्चा ‘The Future is Watching: Youth Audiences, Media Literacy & Ethical Storytelling’ का आयोजन भी किया। इस चर्चा में पृथुल कुमार, सिंथिया मैककैफ्री, फिल्म निर्माता अश्विनी अय्यर, निर्माता मितु भौमिक, युवा निर्देशक यशस्वी जूयाल जैसी प्रमुख फिल्म हस्तियों व नीति-निर्माताओं ने भाग लिया।
चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि तेजी से बदलती मीडिया दुनिया—स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और AI—कैसे बच्चों और युवाओं की सोच, कल्पना और समझ को प्रभावित कर रही है। साथ ही, जिम्मेदार और सुरक्षित कहानी-कहानी को बढ़ावा देने की आवश्यकता भी रेखांकित की गई।
आईएफएफआई 2025 में यूनिसेफ और एनएफडीसी की यह साझेदारी एक बार फिर यह साबित करती है कि सिनेमा सामाजिक बदलाव का एक सशक्त माध्यम है — जो लोगों को प्रेरित कर सकता है, संवाद को बढ़ावा देता है और बच्चों के अधिकारों के लिए जनता की सोच में सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
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