टीकाकरण और बच्चों का स्वास्थ्य

बच्चों के जीवन और भविष्य की सुरक्षा के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी और किफायती तरीका

Vaccination of Shyamlata Madavi's baby.
UNICEF/UN076866/Sharma

बच्चों के जीवित रहने की कुंजी टीकाकरण बच्चों के जीवन और उनके भविष्य की सुरक्षा के लिए सबसे किफायती तरीकों में से एक है। भारत का टीकाकरण अभियान यूआईपी (यूनिवर्सल इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम) दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक है।
हर साल लगभग 2 करोड़ 60 लाख नवजात शिशुओं और 3 करोड़ 40 लाख गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण किया जाता है। बच्चों और गर्भवती महिलाओं को टीका लगाने के लिए देश भर में 1 करोड़ 30 लाख से अधिक टीकाकरण अभियान चलाये जाते हैं।

विगत दो दशकों में भारत ने स्वास्थ्य सूचकों, खास करके शिशु स्वास्थ्य से संबंधित सूचकों में सुधार करने के दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। भारत को 2014 में पोलियो मुक्त और 2015 में मातृत्व व नवजात टेटनस उन्मूलन का सर्टिफिकेट मिला।

देशभर में  खसरा-रूबेला, न्यूमोकोकल कॉन्जुगेट वैक्सीन (पीसीवी) और रोटावायरस वैक्सीन (आरवीवी) सहित नए टीके लॉन्च किये गये और बांटे गए।

इसके बावजूद चुनौतियाँ बनी हुई हैं। 2022 में 1 करोड़ 43 लाख शिशुओं को वैश्विक स्तर पर पहला डीपीटी टीका नहीं मिला, जो टीकाकरण और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं की कमी दिखाता है। इसके अलावा 6.2 मिलियन को थोड़ी-थोड़ी वैक्सीन दी गई।

जिन 20.5 मिलियन बच्चों को टीका नहीं लगाया गया है या थोड़ी वैक्सीन के रूप में टीका लगाया गया था। उनमें से लगभग 60 प्रतिशत बच्चे भारत सहित अंगोला, ब्राज़ील, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, इथियोपिया, इंडोनेशिया, मोज़ाम्बिक, नाइजीरिया, पाकिस्तान और फिलीपींस 10 देशों से हैं।

इस प्रगति के बावजूद भी भारत में शिशु मृत्यु दर और अस्वस्थता में संक्रामक बीमारियों की उच्च भागीदारी है। भारत में लगभग 10लाख बच्चे अपने पांचवा जन्मदिन मनाने से पहले ही मर जाते हैं। इनमें से अधिकांश को शिशु स्तनपान टीकाकरण एवं उपचार देकर बचाया जा सकता है।
भारत सरकार बच्चों और गर्भवती महिलाओं की रुग्णता और मृत्यु दर को कम करने और समुदायों को उन बीमारियों से बचाने के लिए समर्पित है जिन्हें टीके रोक सकते हैं। एनएफएचएस-5, 2019-21 के अनुसार, देश का पूर्ण टीकाकरण कवरेज 76.1 प्रतिशत है, जिसका अर्थ है कि हर चार में से एक बच्चा आवश्यक टीकों से वंचित है। हालांकि, अब वेब-आधारित स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (HMIS) पोर्टल के अनुसार 2021-22 के लिए पूर्ण टीकाकरण कवरेज 89 प्रतिशत था।

WUENIC वुएनिक (डब्ल्यूएचओ-यूनिसेफ एस्टीमेट्स नेशनल इम्यूनाइजेशन कवरेज) के अनुसार भारत ने 2021 की बजाय 2022 में जीरो डोज को 27 लाख से घटाकर 11 लाख कर दिया है। इसके अलावा जीवन रक्षक टीकाकरण में 16 लाख बच्चों को कवर किया गया है। 
 

भारत टीकाकरण एजेंडा 2030 तक जीरो-डोज के अपने लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रोग्रेसिव कदम उठा रहा है। हालांकि, लाखों बच्चे अभी भी टीकाकरण के इंतजार में हैं। भारत के विभिन्न राज्यों में टीकाकरण की दर अलग-अलग है। जीरो डोज के 63% शिशुओं संख्या बड़े राज्यों जैसे बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में रहते हैं।

कुल मिलाकर यह जन्म समूह का 55% बनता है। जीरो डोज वाले शिशुओं का उच्च अनुपास मेघालय में 17.8%, नागालैंड में 15.8%, मिजोरम में 14.5% और अरुणाचल प्रदेश में 13.4% है।

जीरो डोज वाले शिशुओं की संख्या में कमी का श्रेय मिशन इंद्रधनुष कार्यक्रम को जाता है। इसका मकसद चुनिंदा जिलों और शहरी क्षेत्रों में टीकाकरण के अंतर को कम करना था।

COVID-19 के प्रभावों से उभरने के लिए फरवरी 2022 में 0.4 IMI अभियान चलाया गया। इसमें टीकाकरण रहित और कम डोज के टीकाकरण वाले बच्चों को वैक्सीन दी गई। साथ ही ज्यादा प्रकोप वाले राज्यों की पहचान कर रोडमैप के जरिए खसरा और रूबेला कैचअप अभियान चलाया गया।

वर्ष 2023 में राष्ट्रव्यापी कवरेज सुधार के लिए अगस्त, सितंबर-अक्टूबर में IMI 5.0 अभियान आयोजित किया गया था। इसमें दो से पांच साल के बच्चों तक टीकाकरण पहुंच बढ़ाई गई थी। अभियान में विशेष रूप से ऐसे बच्चे शामिल किये गये, जिनकी एमआर खुराक छूट गई हो। इस तरह देश को एमआर उन्मूलन के लिए तैयार किया गया।

कवरेज को बेहतर बनाने के लिए हाशिये पर रहने वाले और कमजोर आबादी पर फोकस बढ़ाया जाता है। इसमें लक्षित रणनीतियों, वकालत, केंद्रित संचार हस्तक्षेप और सीएसओ/सीबीओ के साथ समुदाय-आधारित हस्तक्षेप के माध्यम से कार्य किया जाता है।

यूनिसेफ की भूमिका:

विगत 70वर्षों में टीकाकरण यूनिसेफ के कार्य के केंद्र में रहा है। विश्व भर में शिशुओं के लिए सेवाओं को प्रदान करने के लिए इससे बढ़कर कोई संस्था नहीं है। यूनिसेफ भारत सरकार के टीकाकरण कार्यक्रम का तकनीकी साझेदार है और यह सरकार को सहयोग करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टीकाकरण के द्वारा सुरक्षित किए जाने वाले बीमारियों से कोई भी शिशु प्रभावित न हो सके।

यूनिसेफ स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय एवं अन्य साझेदारों के साथ कवरेज और इक्विटी, डेटा निगरानी और अनुसंधान, मांग सृजन, एडवोकेसी और कोल्ड चेन को मजबूत करने के क्षेत्रों में जीरो डोज और कम टीकाकरण वाले बच्चों तक पहुंचने के लिए साझेदारी के साथ कार्य करता है। ताकि देशभर में बच्चे देश और पीएचसी इंटीग्रेटिड सेवाओं, सामुदायिक जुड़ाव और बहुक्षेत्रीय कार्यों के जरिये टीकाकरण का लाभ उठा सके।

यूनिसेफ, राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह, टीकाकरण एक्शन समूह और पोलियो विशेषज्ञ सलाहकार समूह में नीति विकास का एक सक्रिय सदस्य है।

सतत विकास लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए टीकाकरण का प्रसार महत्वपूर्ण है। एक समय हजारों बच्चों की जान लेने वाली बीमारियां,पोलियो और स्मॉल पॉक्स का उन्मूलन किया जा चुका है एवं प्राथमिक रूप से सुरक्षित व प्रभावी टीकों के कारण अन्य बीमारियां भी उन्मूलन के कगार पर हैं।

 

यूनिसेफ सभी जगह सभी लड़कों और लड़कियों के लिए नियमित टीकाकरण पहुँच में सुधार करके, उनके जीवन को बचा कर, बाल अधिकार की वचनबद्धता को सुनिश्चित करता है। यह अपने सहयोगी एवं साझेदारों के साथ मिलकर सभी भौगोलिक स्थानों, ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में गरीबों, वंचितों, कम पढ़े-लिखे समूहों में टीकाकरण की कमियों को समाप्त करने के लिए कार्यरत है। ऐसा करके यह सुनिश्चित करता है कि वह सभी शिशु जो टीकाकरण के लिए आते हैं उन्हें आवश्यक व पर्याप्त टीका के सभी डोज मिल सके।

ऐसा करने के लिए सभी स्तर पर टीकाकरणकर्ता, आपूर्ति, स्किल्ड प्रोफेशनल्स, मोटिवेशन और सामूदायिक सहभागिता के साथ सभी आवश्यक संसाधन मौजूद हों।

यूनिसेफ ने राष्ट्रीय संसाधन केंद्रों, NCCVMRC और NCCRC को मजबूत करने, उन्हें सरकारी प्रणाली के भीतर संस्थागत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये केंद्र भारत में टीकाकरण आपूर्ति श्रृंखला अनुसंधान, प्रशिक्षण, योजना और नीति पहल के लिए नोडल बिंदु के रूप में कार्य करते हैं।

यूनिसेफ कोल्ड चेन सुदृढ़ीकरण, मांग बढ़ाने और एडवोकेसी में अग्रणी भागीदार है। 2018 से 2022 में देश की कोल्ड चेन प्रणाली को समर्थन और मजबूत करने में स्वच्छ और हरित प्रौद्योगिकी का उपयोग महत्वपूर्ण रहा है।
इसके तहत 1100 से अधिक कोल्ड चेन तकनीशियनों और प्रबंधकों का क्षमता निर्माण किया गया है। इसके अलावा, 20 ईवीएम मूल्यांकन (प्रभावी वैक्सीन प्रबंधन) और निरिक्षण सहायक एप्लिकेशन के माध्यम से 180,000 से अधिक सत्रों की निगरानी भी की गई। यूनिसेफ कोल्ड चेन उपकरणों की आपूर्ति के साथ कोल्ड चेन को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कोल्ड चेन सिस्टम को मजबूत करने और हर बच्चे तक टीकाकरण की खरीद बढ़ाने के लिए 56 वॉक-इन कूलर, 2999 आईएलआर, 480 एसडीडी, 33,479 कोल्ड बॉक्स, 379,480 फ्रीज-फ्री वैक्सीन कैरियर, 202,641 वैक्सीन कैरियर, 8300 वोल्टेज स्टेबलाइजर्स, 350 टूलकिट, 28 डब्ल्यूआईएफ, 620 डीएफ और 48,700 फ्रीज टैग खरीदे गये।

भारत के 2014 में पोलियो मुक्त होने के बावजूद यूनिसेफ पोलियो के खिलाफ लड़ाई में संचार भागीदार के रूप में  लगातार सरकार का समर्थन करता है और सामाजिक गतिशीलता रणनीतियों के माध्यम से लाभ देता है। यह पोलियो राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस और उप-राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस के पालन में स्वास्थ्य मंत्रालय का समर्थन करता है।

टीकाकरण या किसी स्वास्थ्य कार्यक्रम का लाभ लोगों तक पहुंचाने के लिए लोगों का विश्वास जीतना जरूरी है। लोगों का विश्वास टीकों और स्वास्थ्य प्रणालियों में लगातार बना रहना चाहिए। इसके लिए यूनिसेफ मीडिया, रेडियो, आस्था-आधारित संगठनों और सामुदायिक नेताओं और प्रभावशाली लोगों के जरिए टीकाकरण के लाभों पर लगातार फैक्ट्स बेस्ड जानकारी साझा करता आया है।

टीकाकरण के बारे में जागरूकता फैलाने में यूनिसेफ अहम भूमिका निभाता है।  माता-पिता और बच्चों की देखभाल करने वालों को टीकाकरण और टीकाकरण चक्र के प्रति जागरूक करना भी जरूरी है। उन्हें पता होना चाहिए कि अपने बच्चों को टीकाकरण के लिए कब और कहां लेकर जाना है, खुराक के बीच की अवधि क्या हो और टीकाकरण के लिए विजिट का क्या महत्व है।

भारत सरकार ने हर बच्चे तक टीकों की पहुंच में सुधार, बाल मृत्यू दर और  रोगों की संख्या कम करने की प्रतिबद्धता ली है। सरकार के उच्चतम स्तर पर निर्णय लेने वालों के बीच टीकाकरण एक प्राथमिकता बनी हुई है।

टीकाकरण प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की डिलीवरी के लिए एक प्रवेश बिंदु की तरह है, और एक टीकाकरण अभियान चलाने में यूनिसेफ की भारत सरकार के प्रति प्रतिबद्धता देश भर में बच्चों को कई बीमारियों को खत्म करने में सक्षम होगी।