प्लास्टिक, ट्रेंड और धरती: असल में हम क्या खरीद रहे हैं?

युवा पीढ़ी अपनी आदतें बदलकर, खपत के चक्रव्यूह को तोड़कर, धरती के लिए सही कदम उठा सकती है

Ajita Darshan, Youth Content Creator, #Youth4UNICEF
Plastic, Trends & the Planet: What are we really buying?
Ajita Darshan, Youth Content Creator
03 सितंबर 2025

क्या आप एक ऐसी कहानी सुनना चाहेंगे जो आपकी रोज़मर्रा की आदतों पर सवाल उठाए, आपको सोचने पर मजबूर करे और टिकाऊ जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा दे?

एक समय की बात है, दो युवा लड़कियां थी—रिया और जिया.... रिया एक बड़े महानगर की भागदौड़ और शोरगुल के बीच रहती थी, जबकि जिया शहर से दूर शांत और हरे-भरे उपनगर में अपना जीवन बिताती थी।

रिया एक बड़े शहर में रहते हुए भी भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच अपनी रोज़मर्रा की जिंदगी में जागरूक रहते हुए सकारात्मक चुनाव करती है। वह पानी पीने के लिए अपनी दादी का दिया तांबे का गिलास इस्तेमाल करती है, कॉफी के लिए स्टील का टंबलर और टिफिन बॉक्स साथ रखती है, ताकि प्लास्टिक का इस्तेमाल कम हो।

वह बाज़ार जाने के लिए टैक्सी या ऑटो लेने की बजाय पैदल चलना पसंद करती थी और छुट्टियों में घर पर रहते हुए अक्सर पौधों पर आधारित आहार (प्लांट-बेस्ड डाइट) अपनाती थी।

Plastic waste litter roads in Jalpaiguri, West Bengal, highlighting the challenge of effective waste management.
UNICEF/UNI812055/Biswas Plastic waste litter roads in Jalpaiguri, West Bengal, highlighting the challenge of effective waste management.

वहीं, जिया ने अपना अधिकांश जीवन एक उपनगरीय कस्बे में बिताया था, जहाँ अब भी घनी हरियाली और पेड़ों की भरमार थी (आह! कितनी राहत की बात है)। लेकिन, जिया बचपन से नए-नए ट्रेंड्स से प्रभावित रहती और सोशल मीडिया की चकाचौंध भरी दुनिया का एक हिस्सा बन चुकी है।

जैसे-जैसे वह बड़ी हुई और युवावस्था में पहुँची, उसके कमरे में सजे हुए प्यारे-से सजावटी सामान ज़्यादातर सस्ते प्लास्टिक से बने हुए हैं, न कि मिट्टी या सिरेमिक से। उसके बिस्तर पर इंटरनेट पर मशहूर हुआ बड़ा-सा प्लास्टिक का सिपर भी रखा रहता है, जिसे उसने “जरूरी चीज़” मानकर खरीद लिया था।

वह हर ट्रेंडिंग आउटफिट खरीद लेती है, ज़्यादातर ऐसे ऑनलाइन स्टोर से जो सस्ते कपड़े और माइक्रोप्लास्टिक से बने फैशन आइटम बेचते हैं। उसका जीवन शॉर्टकट्स पर टिका हुआ है—फिर चाहे वो इंस्टेंट खाना-पीना हो, पैकेज्ड सामान लेना हो, बिना सोचे-समझे खरीदारी करना हो या इंटरनेट पर चर्चित “सजावटी चीज़ें” इकट्ठा करना। इन सब आदतों से उसके आस-पास प्लास्टिक कचरे का ढेर बढ़ता जा रहा है।

दो अलग-अलग जीवनशैली, एक सच्चाई

रिया की आदतें दिखाती हैं कि टिकाऊ जीवन जीना आसान है और यह बड़े शहरों में भी संभव है। वहीं, जिया ने हमें सिखाया कि कैसे ट्रेंड्स और मार्केटिंग हमें अनजाने में ओवरकंजम्पशन (ज्यादा खपत) की ओर धकेलते हैं।

लेकिन यह तुलना किसी को नीचा दिखाने के लिए नहीं है। यह सिर्फ सच्चाई बताती है —

जहाँ रिया ने टिकाऊ जीवनशैली (sustainability) को आसान और सरल बनाकर दिखाया, वहीं जिया की ज़िंदगी ने यह सच्चाई उजागर की कि कैसे आधुनिक ट्रेंड्स और भावनात्मक मार्केटिंग हमें ज़रूरत से ज़्यादा उपभोग (overconsumption) की ओर धकेल सकते हैं।

यह बात महज सुविधाओं की नहीं है, बल्कि चीज़ों के ज़रिए खुशी, आराम और अपनी पीढ़ी के बीच वैलिडेशन (मान्यता) पाने की चाह भी है। यह तुलना न तो किसी को शर्मिंदा करने के लिए है और न ही किसी को महान दिखाने के लिए। बल्कि यह एक अहम सच्चाई को सामने लाती है!

सस्टेनेबिलिटी (टिकाऊपन) कोई लग्ज़री नहीं है, न ही यह सिर्फ़ गाँवों या धीमी रफ्तार वाले जीवन जीने वालों तक सीमित है। यह एक सोच है, और सबसे बढ़कर आपका सोच-समझकर लिया हुआ निर्णय है। सस्टेनेबिलिटी सोच और संकल्प का नाम है।

असली सवाल: खपत या सोच?

हममें से बहुत से लोगों में खरीदारी से जुड़ी कितनी ही भावनाएं होती है — खालीपन भरने, ट्रेंड्स के पीछे भागने या अस्थायी खुशी पाने के लिए। लेकिन असली खुशी चीज़ें इकट्ठा करने से नहीं मिलती, बल्कि समझदारी और सोच-समझकर किए गए ऐसे फैसलों से मिलती है जो हमारे साथ-साथ धरती के लिए भी अच्छे हों।

टिकाऊ जीवन का मतलब ही यही है ज़रूरत और ज़िम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना।

Thirteen-year-old Affan Amir stands outside his home, surrounded by garbage-strewn streets.
UNICEF/UN0624603/Magray Thirteen-year-old Affan Amir stands outside his home, surrounded by garbage-strewn streets.
हम क्या कर सकते हैं? (छोटे कदम, बड़ा असर)

हम युवा ही बदलाव के असल  असल सारथी हैं। हमारे छोटे-छोटे फैसले ही संस्कृति को बदल सकते हैं, बाज़ार को नया आकार दे सकते हैं और समाज पर गहरा असर डाल सकते हैं। हमारी आदतें समाज और बाज़ार दोनों को बदल सकती हैं।

संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन) का समर्थन करते हुए हम ये कदम उठा सकते हैं:

  • फैशन में “क्वालिटी” को “क्वांटिटी” पर तरजीह दें — थ्रिफ्टेड, अपसाइक्ल्ड या टिकाऊ कपड़े चुनें।
  • हमेशा अपना रीयूजेबल बोतल, टिफिन और कटलरी साथ रखें।
  • छोटे सफर के लिए कार या ऑटो की जगह पैदल चलें या साइकिल का उपयोग करें।
  • घर में एक छोटा हर्ब गार्डन शुरू करें या रसोई के कचरे से कम्पोस्ट बनाएं।
  • अनावश्यक ऊर्जा बर्बाद न करें — जब उपयोग न हो चार्जर अनप्लग करें और बिजली के उपकरण बंद करें।
  • हर खरीदारी से पहले सोचें — क्या मुझे सच में इसकी ज़रूरत है? क्या मैं इसे एक साल बाद भी इस्तेमाल करूंगा?
  • सीखें और सिखाएँ — जागरूक जीवनशैली अपनाएँ और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करें।
सतत जीवनशैली की शुरुआत आपसे और हमसे ही होगी

सस्टेनेबिलिटी त्याग नहीं है, बल्कि सोच-समझकर किए गए छोटे-छोटे कदमों का नाम है। चाहे वह एक खाली बोतल या जार को दोबारा इस्तेमाल करना हो, घर में सब्ज़ियां उगाना हो, या किसी नए इंटरनेट ट्रेंड को “ना” कहना हो — ये सब आपके छोटे-छोटे प्रयास ही बदलाव की लहरें बनाते हैं।

🌱 याद रखिए — बदलाव बाहर से नहीं आता, वह हमारे रोज़मर्रा के चुनावों से जन्म लेता है।

आइए, बेवजह खपत से निकलकर सार्थक जीवन की ओर बढ़ें। अब “कूल” या “ट्रेंड में” होने का मतलब बदलना होगा—और वह होगा हर दिन धरती को चुनना।

टिकाऊ जीवनशैली ज़िम्मेदारी नहीं, बल्कि एक क्रांति है — और यह क्रांति हमसे शुरू होती है। सतत जीवनशैली का मतलब त्याग नहीं, बल्कि समझदारी से चुनाव करना है।

ब्लॉग के बारे में

यूनिसेफ अपने हर काम में प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देता है। अपने साझेदारों के साथ मिलकर, यूनिसेफ बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित बचपन को व्यावहारिकता में बदलने के लिए 190 देशों और क्षेत्रों में काम कर रहा है।

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