बच्चे, युवा, महिलाएँ और पुरुष, उत्साही दर्शकों सभी की निगाहें तालियाँ बजाते हुए सबकी निगाहें मैदान पर टिकी हैं। स्टेडियम खुशियों और तालियों से गूंज रहा है। आईसीसी विमेंस वर्ल्ड कप 2025 का फाइनल अपने चरम पर है। भारत और दक्षिण अफ्रीका की फाइनलिस्ट टीमें भारत और दक्षिण अफ्रीका पूरे दमखम के साथ खेलते हुए मैदान को साहस, कौशल और उत्साह से भर देती हैं। जैसे ही लड़कियाँ ट्रॉफी उठाती हैं, मुंबई के डी.वाई. पाटिल स्टेडियम की गूँज सीमाओं से कहीं दूर तक फैल जाती है।
सोशल मीडिया पर लड़कियों के बेहतरीन कैच, दमदार शॉट्स और विकेट बचाने की शानदार कोशिशों के वीडियो छाए हुए हैं। ऊर्जावान संगीत इन पलों को और खास बना देता है। टीवी और सोशल मीडिया पर लड़कियों के लिए लोगों की सोच अब बदल चुकी है, एक रेडियो जॉकी अपनी क्रिकेट रील में कहता है, “लड़कियाँ कर सकती हैं… और मौका मिले तो मैदान पर दिखा भी देती हैं।”
यह जीत सिर्फ क्रिकेट की नहीं है—यह हर उस लड़की की जीत है जो सपने देखती है, और हर उस बच्चे की, जो बराबर का मौका पाने का हकदार है।
यह पल एक प्रतीक है: याद दिलाता है कि बच्चों से किया गया हर वादा निभाना कितना जरूरी है। #PromisetoChildren.
आईसीसी और यूनिसेफ की साझेदारी कई सालों से खेल और बच्चों के अधिकारों को साथ लाने का काम कर रही है। क्रिकेट दिलों को जोड़ता है, सिनेमा दिमाग को आकार देता है। साथ मिलकर, ये दोनों प्रेरणा और बदलाव का पुल बनाते हैं।
यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री ने कहा,
“आईसीसी के साथ हमारी साझेदारी क्रिकेट की शक्ति को बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए इस्तेमाल करने में बेहद महत्वपूर्ण है।”
यूनिसेफ का ‘Promise to Children’ कैंपेन इसी भावना को आगे बढ़ाते हुए फैंस से खेल के प्रति उनका उत्साह बच्चों की भलाई के लिए कदम उठाने में बदलने की अपील करता है। चाहे वह किसी लड़की की पढ़ाई में मदद करना हो, किसी बच्चे को टीका लगवाना हो, या किसी समुदाय को सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना। हमारे लिए आपका हर वादा मायने रखता है।
यूनिसेफ के राष्ट्रीय राजदूत और बॉलीवुड स्टार आयुष्मान खुराना ने भारत-बांग्लादेश मैच में बच्चों के साथ ट्रॉफी वॉक में हिस्सा लिया। उनके साथ यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि सिंथिया मैककैफ्री भी थीं। उन्होंने कहा, “भारत में क्रिकेट सिर्फ खेल नहीं, भावना है। जब खिलाड़ी, फैंस और संगठन मिलकर बच्चों के लिए किए वादों की बात करते हैं, तो यह संदेश करोड़ों तक पहुँचता है।”
पूरे टूर्नामेंट के दौरान यह साझेदारी मैचों को बच्चों के अधिकारों की आवाज़ में बदलती रही। असम के गुवाहाटी में आयोजित क्रिकेट क्लीनिकों से लेकर, जहाँ ब्रह्मपुत्र वॉलीबॉल लीग के बच्चों ने इंग्लैंड टीम के साथ बल्लेबाजी की, मध्य प्रदेश के इंदौर में एनीमिया पर केंद्रित "बाल अधिकारों पर गोलमेज सम्मेलन" तक, इस अभियान ने नीति निर्माताओं, एथलीटों, कॉर्पोरेट नेताओं और समुदायों को बच्चों के लिए आवाज़ उठाने के लिए एक साथ लाया।
सेमीफाइनल के दौरान बच्चों के साथ ट्रॉफी वॉक में शामिल होते हुए यूनिसेफ नेशनल एम्बेसडर करीना कपूर खान ने कहा, “जब इतना बड़ा मंच बच्चों के अधिकार और समान अवसर की बात करता है, तो वह बदलाव लाने की ताकत रखता है।”
‘Promise to Children’ अभियान का लक्ष्य अधिक से अधिक लोगों को बच्चों के समर्थन के लिए जोड़ना है। इस अभियान से जुटाए गए फंड भारत के सबसे कमजोर बच्चों की शिक्षा, पोषण, सुरक्षित पानी और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले कार्यक्रमों में लगाए जाएंगे।
फ्लडलाइट्स के नीचे चमकती यह ट्रॉफी केवल एक जीत का प्रतीक नहीं है—यह उस उम्मीद का प्रतीक है कि एक दिन हर लड़की और हर लड़का अपनी खुद की ट्रॉफी उठाएगा: बराबरी की, अवसरों की, शिक्षा की, स्वास्थ्य की—और सबसे बढ़कर, उम्मीद की।