असम में 'जीवन की धारा को पार करना ही होगा' कहावत से साहसी प्रेरणा

यूनिसेफ की प्राथमिकता अपने कामों को बढ़ावा देना, और सहयोगियों की मदद से समुदायों की प्रगति में मदद करने के नये तरीके खोजना

सिंथिया मैककैफ्रे, प्रतिनिधि, यूनिसेफ इंडिया
Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, at the Dinjoy Tea Garden Model Anganwadi in north-eastern Indian state of Assam, where mothers and fathers are guided by the frontline workers on the best start to a child's life
UNICEF Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, at the Dinjoy Tea Garden Model Anganwadi in the north-eastern Indian state of Assam, where mothers and fathers are guided by the frontline workers on the best start to a child's life.
02 जुलाई 2025

असम के हरे-भरे चाय बागानों में घूमते हुए मैंने पाया कि यूनिसेफ किस तरह से लोगों के जीवन में सुधार ला रहा है। डिब्रूगढ़ जिले के डिकॉम से दिनजॉय तक के इस सफर में मैंने भारत को करीब से जाना। इस दौरान मुझे लोगों से मिलने और उनकी दिनचर्या में हो रहे सुधार को नजदीक से देखने का मौका मिला।

बच्चों, महिलाओं और युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में असम सरकार, समुदाय, श्रेत्र प्रतिनिधियों, निजी सहयोगियों का सहयोग मील का पत्थर साबित हुआ। अब हम एक नये भविष्य के निर्माण की ओर अपने कदम बढ़ा रहे हैं।

जब मैं विशाल ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर बाढ़ में डूबे हरे मैदानों को देख रही थी तो मुझे टीम के एक सदस्य ने कहावत सुनाई, “जीबोन एति नोदिर सुत, जी पार कोरी जाबो लागे,” जिसका अर्थ है - “जीवन नदी की धारा की तरह है, जिसे पार करना ही होगा।” 

यह कहावत असम में जलवायु परिवर्तन और बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों को सटीक रूप से दर्शाती है। यूनिसेफ़ का मानना है कि अब एकजुट होकर बच्चों के भविष्य के लिए ठोस समाधान खोजे जाने का समय आ गया है।

नदी के बढ़ते जलस्तर ने मुझे पूरे असम के लिए यूनिसेफ की तरफ से बाढ़ नियंत्रण के लिए योजना बनाने और तैयारी करने पर मजबूर कर दिया

इन तैयारियों में सबसे कमजोर बच्चों और समुदायों के लिए हमारे द्वारा किये जाने वाले हर काम शामिल होंगे। जिसमें सुरक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा और वॉश (WASH) शामिल हैं।

हमारा यही लक्ष्य मुझे असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा तक लेकर गया। उन्होंने भी मेरी बात का समर्थन करते हुए माना कि यूनिसेफ के कार्यक्रमों को बढ़ावा देना आवश्यक है। बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा को बेहतर ढ़ग से आगे बढ़ाने में यूनिसेफ की सहायता की जरूरत है।

Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, with the Honourable Chief Minister of Assam, Mr. Himanta Biswa Sarma, who acknowledged that scaling up and integrating UNICEF’s programmes can better support children’s health, education and protection in Assam.
UNICEF/2025/BijuBoro Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, with the Honourable Chief Minister of Assam, Himanta Biswa Sarma, who acknowledged that scaling up and integrating UNICEF’s programmes can better support children’s health, education and protection in Assam.
205 चाय बागान में एक दशक का प्रभाव

यूनिसेफ़ वर्ष 2007 से, असम के चाय बागान में उन बुनियादी कमियों को दूर करने की दिशा में निरन्तर काम कर रहा है, जहाँ प्रथम बागान श्रम अधिनियम के प्रावधानों को, प्रभावी रूप से लागू नहीं किया गया था। इन प्रयासों का प्रत्यक्ष असर आज युवाओं की ज़िन्दगी में दिखाई देता है। 

16 वर्षीय पूजा ओरंग गर्व से बताती हैं, “मैंने सिर्फ़ 15 मिनट में अपना बैंक खाता खोल लिया! अब मैं छात्रवृत्ति पाना चाहती हूँ और बचत करके ज़रूरतमंदों की मदद करना चाहती हूँ.”

यूनिसेफ़ और असम राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (ASRLM) की साझेदारी से आज महिलाएँ और युवतियाँ, अपने वित्तीय निर्णय स्वयं ले रही है।

यह पहल पाँच चाय ज़िलों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देती है और महिलाओं को जलवायु आपदाओं के दौरान शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का सीधा लाभ प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।

स्कूलों में आपदा-तैयारी और जलवायु शिक्षा

इसके बाद मैंने देखा कि थोड़ी दूरी पर स्थित बारबरूआ लोअर प्राइमरी स्कूल में प्राकृतिक आपदाओं की तैयारी चल रही है। यहां 10 वर्षीय बिनीता घाटोवर और उसके साथी कक्षा में बैठकर भूकम्प की स्थिति में अपनाई जाने वाली सावधानियों को अपने मस्तिक में उकेरने की कोशिश कर रहे थे।

तभी अचानक आपदा अलार्म बजा - और बच्चे लोमड़ी-सी फुर्ती से मेज़ के नीचे छिप गए। कुछ ही क्षणों बाद, जब शिक्षकों ने सभी के सुरक्षित होने की पुष्टि की, तो बच्चे अनुशासित ढंग से बाहर आए और अपने बैग सिर पर रखकर रोल कॉल के लिए लाइन में खड़े हो गए। 

तभी एक बच्चे की आवाज़ गूँजती है - “पेड़ के बगल में शरण मत लो!” यह सब देखकर मुझे अहसास हुआ कि ये बच्चे कितने समझदार हैं।

Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, at the Barbaruah Lower Primary School in north-eastern Indian state of Assam, where 193 young learners participate in a mock-drill, taking precautions in case of an earthquake
UNICEF/2025/BijuBoro Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, at the Barbaruah Lower Primary School in north-eastern Indian state of Assam, where 193 young learners participate in a mock-drill, taking precautions in case of an earthquake

यह दृश्य दर्शाता है कि अब बच्चे सिर्फ़ पाठ्यक्रम नहीं पढ़ रहे, बल्कि आपदाओं से सुरक्षित रहने के लिए व्यवहारिक ज्ञान भी अर्जित कर रहे हैं।

यूनिसेफ़ द्वारा चलाए जा रहे जलवायु अनुकूलन शिक्षा कार्यक्रम, स्कूलों में बच्चों को बदलते पर्यावरणीय जोखिमों से निपटने के लिए तैयार कर रहे हैं। ताकि, उन्हें स्कूली शिक्षा के साथ-साथ इसके लिए भी तैयार किया जा सके।

सिंथिया ने अनुभव साझा करते हुए कहा, “मैंने 193 युवा शिक्षार्थियों को देखा, जो अपनी उम्र के अनुसार दी जा रही व्यावहारिक शिक्षा के ज़रिए जागरूक और आत्मविश्वासी बन रहे हैं।”

आज यूनिसेफ़ के सहयोग से 419 चाय बागान-प्रबंधित स्कूल असम की राज्य शिक्षा प्रणाली में शामिल हो चुके हैं - जहाँ बच्चों को पाठ्यपुस्तकों के साथ-साथ स्वच्छ जल, शौचालय, और नियमित आपदा तैयारी की सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जा रही हैं।

जब हम दिनजॉय टी गार्डन मॉडल आंगनवाड़ी में गए तो हमें छाते की जरूरत पड़ी। मानसून से पहले की बारिश ने हम पर पानी बरसा दिया! लेकिन, अंदर पहुंचते ही मैंने हर जगह धूप की छोटी-छोटी किरणें देखीं। ये केंद्र जीवन के शुरुआती क्षणों से ही माताओं और उनके बच्चों के लिए एक जीवन रेखा का काम करता है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता संगीता कुर्मी ने बताया कि, "अब हमने घर पर होने वाले प्रसव को अस्पतालों में स्थानांतरित कर दिया है, एनीमिया को कम किया है और हाथ धोना सिखाया है।" अब राज्य भर में 60,000 से अधिक आंगनवाड़ियों में आपसी तालमेल दिखाई देता है।

आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की बदौलत चाय बागानों में एक हजार से अधिक महिलाओं ने आयरन फोलिक एसिड की खपत में एक चौथाई की वृद्धि की है। आज लगभग सभी महिलाएं स्वास्थ्य सुविधाओं में ही बच्चों को जन्म देती हैं - जो मां और बच्चे दोनों के लिए बेहतर है।

मुझे डिकोम चाय बागान में जोनाकी सेंटर में बच्चों और उनकी मांताओं ने मिलने का अवसर मिला। इन बच्चों को जीवन में सर्वोत्तम शुरुआत मिलने से ये बड़े होकर उज्ज्वल, आत्मविश्वासी और अभिव्यक्त करने वाले किशोर बनेंगे। 

स्वरांजलि, रूपांजलि और नेहा जैसी यंग चेंजमेकर बाल विवाह के खिलाफ अपनी लड़ाई पुरजोर तरीके से लड़ रही हैं। ये युवा शक्तियां अपनी कहानी हर जुबान तक पहुंचाने और नेताओं व समाज से जवाबदेही के लिए स्थानीय समाचार पत्र मुक्ता आकाश की शक्ति का उपयोग कर रही हैं। ये लड़कियाँ महज बदलाव की बात नहीं करती, बल्कि उसके लिए अथक प्रयास भी कर रही हैं।

यूनिसेफ के सहयोग से चाय बागानों सुरक्षित सामुदायिक केंद्र बनाए गये हैं। जहां युवा लड़कियां और लड़के समान रूप से मानसिक स्वास्थ्य, लैंगिक समानता और उनके दैनिक जीवन में आने वाले बदलावों को सकारात्मक रूप में अपनाते हैं।

यूनिसेफ ने तेजपुर विश्वविद्यालय और समग्र शिक्षा अभियान के साथ मिलकर पारंपरिक लोककथाओं को बदलाव के रूप में इस्तेमाल किया है। यूनिसेफ 4,300 से अधिक स्कूलों में अधिकारों और समानता को बढ़ावा देने का काम करता है। अब 800,000 से अधिक छात्र इस बदलाव के साथी बन चुके हैं।

हमारी यह जर्नी यहीं नहीं रूकेगी। यहां के यंग रिपोर्टर अपने समुदायों की कुप्रथाओं और स्थानीय मुद्दों को अपनी लेखनी के जरिए मुद्दों को लीडर्स और नेताओं के समक्ष लाकर उनपर बदलाव के लिए दबाव बनाते हैं। 

यह प्रगति केवल यूनिसेफ़ के प्रयासों की देन नहीं है, बल्कि ये टीमवर्क और हमारे सहयोगियों के दम पर ही संभव हो पाया है। जिन्होंने असम के आपदा जोखिम न्यूनीकरण रोडमैप 2030, मिशन वात्सल्य और बाल विवाह समाप्ति मिशन जैसे मुद्दों पर संजीदा होकर काम किया।

इन्होंने एकजुटता की शक्ति के बल पर सच्चाई को सबके सामने लाकर रख दिया, बदलाव तभी शुरू होता है जब बच्चों से लेकर युवा और समुदाय एकसाथ सशक्त होकर काम करते हैं।

Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, with Harmeet Singh, IPS, Director General of Police, Assam and the team from Assam Police Sishu Mitra Programme, an award winning largest child friendly policing program in the country
UNICEF/2025/BijuBoro Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, with Harmeet Singh, IPS, Director General of Police, Assam and the team from Assam Police Sishu Mitra Programme, an award winning largest child friendly policing program in the country

इसी पर एक कहावत याद आती है, “जीवन चुनौतियों से भरा है!” - और उन्हें पार करना ही हमारी सामूहिक चुनौती है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि जलवायु परिवर्तन असम में अब अस्तित्व के लिए खतरा बन चुका है। राज्य में 35 जिलों आधे भारत के सबसे अधिक जलवायु-संवेदनशील स्थानों में शामिल हैं।

जलवायु परिवर्तनों के मौजूदा हालातों को देखते हुए 2045 तक खतरा बढ़ने की आशंका है। जलवायु परिवर्तन हमारी मौजूदा कमज़ोरियों को भी दर्शाता है, जिसमें निम्न शिक्षा स्तर, डिजिटल साक्षरता अंतराल और सीमित नौकरी के अवसर शामिल हैं।

इसलिए हमें साथ मिलकर समझदारी से काम करने, और समझदारी से निवेश करने की ज़रूरत है। हम साथ मिलकर बहिष्कार और गरीबी के चक्र को तोड़ सकते हैं और हमें एकजूट होकर ऐसे भविष्य का निर्माण करना चाहिए, जिसमें कोई भी पीछे न छूटे।

भविष्य-केंद्रित विजन: परिवर्तन के अवसर

आगे बढ़ते हुए  हमारी प्राथमिकताएँ स्पष्ट होनी चाहिए, हम जो काम कर रहे हैं, वो अधिक और तेजी से आगे बढ़ाने की जरूरत है। अपने भागीदारों के सहयोग से समुदायों को बेतहर बनाने में मदद करने के लिए नए तरीके खोजने के लिए एकसाथ मिलकर काम करें।

यूनिसेफ जलवायु-स्मार्ट समाधानों में निवेश को बढ़ाकर स्कूलों को सुरक्षित बनाने और जलवायु संकट के लिए बच्चों को प्रशिक्षित करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। हम संगीता जैसी महिलाओं को कौशल और ज्ञान के साथ शिक्षित करना चाहते हैं, ताकि वे आपदाओं के दौरान भी माताओं और बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रख सकें।

हम अपने साथ युवाओं को साझेदार के रूप में शामिल करना चाहते हैं, ताकि उन्हें मार्केटेबल स्किल्स सिखाये जा सकें। जिससे वह अच्छी नौकरियां पाकर समृद्ध भविष्य का निर्माण कर सकें।

इस प्रयास में हमारे भागीदार मजबूती से हमारा सहयोग कर रहे हैं। असम सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जॉन एक्का ने भी सहमति जताई कि “बच्चे हमारा सबसे बड़ा मिशन हैं।” असम डॉन बॉस्को विश्वविद्यालय की डॉ. बिभरानी स्वर्गियारी जैसे शिक्षाविदों ने समाधान निकालने के लिए साक्ष्यों की आवश्यकता का समर्थन किया। वहीं, कामाक्या तासा और संजय किशन जैसे कानूनविदों ने बाल-केंद्रित नीतियों के लिए यूनिसेफ के जनादेश को दोहराया।

आह्वान: बाल अधिकारों के लिए गठबंधन

यूनिसेफ के बाल अधिकारों के अपने मिशन और कहावत पर विचार करते हुए मेरा मानना है कि ब्रह्मपुत्र के पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। असम के बच्चे बाढ़, गर्मी, तूफान और भूकंप का सामना करने को मजबूर हैं और वे अकेले इन बाधाओं को पार नहीं कर सकते।

इसीलिए हम सभी को आगे बढ़कर एकजुटता से कदम उठाने चाहिए। यह समय भागीदारों के साथ गठबंधन बनाने का है, जिससे सरकार आगे बढ़े, निजी क्षेत्र मज़बूत हो और इसमें समुदाय हिस्सा लें तथा मीडिया जागरूकता बढ़ाए। हम सभी को एकसाथ मिलकर इसमें निवेश करने की आवश्यकता है। मुझे विश्वास है कि, हम सब एकजुट होकर कार्य कर सकते हैं।

Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, with UNICEF colleagues in north-eastern Indian state of Assam
UNICEF/2025/BijuBoro Cynthia McCaffrey, Representative, UNICEF India, with colleagues in the north-eastern Indian state of Assam.
हम साथ मिलकर असम के चाय बागानों को ऐसी जगह बना सकते हैं, जहाँ बच्चे न केवल जलवायु परिवर्तन से होने वाली चुनौतियों से बच सकेंगे। बल्कि, संधारणीय भविष्य को आकार दे सकें। हम आपके साथ मिलकर हर बच्चे के लिए उन शाब्दिक और प्रतीकात्मक धाराओं पर पुल बन सकते हैं।

ब्लॉग के बारे में

यूनिसेफ अपने हर काम में प्रत्येक बच्चे के अधिकारों और कल्याण को बढ़ावा देता है। अपने साझेदारों के साथ मिलकर, यूनिसेफ बच्चों के अधिकारों और सुरक्षित बचपन को व्यावहारिकता में बदलने के लिए 190 देशों और क्षेत्रों में काम कर रहा है।

यूनिसेफ इंडिया के और इसके कामों के बारे में अधिक जानकारी के लिए https://www.unicef.org/india/hi पर विजिट करें।

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