ओडीशा के बच्चे

भारत में नवजात मृत्यु के मामले में राज्य की दर उच्चतम है - जिसे बदलने के लिए हम साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

ECCE center has a balance of age-appropriate structured, guided activities and free play for children.
UNICEF/UN0325826/Hajra

चुनौती

ओडिशा लगभग 42 मिलियन की आबादी के साथ भारत का ग्यारहवां सबसे बड़ा राज्य है, उनमें से ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में एवं केवल 17 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। यहां देश में तीसरी सबसे बड़ी जनजातीय आबादी है। 

2011 की जनगणना के अनुसार, ओडिशा में 40 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति है। राज्य में 13 विशेष रूप से कमजोर आदिवासी निवास करते हैं।

2016-17 में ओडिशा आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार विकास दर 10.4 प्रतिशत थी। सकारात्मक आर्थिक विकास के बावजूद, 32.6 प्रतिशत आबादी अभी भी गरीबी रेखा से नीचे रहती है।

राज्य चक्रवात, बाढ़ और सूखे की आपदा से त्रस्त है। 30 में से 14 जिले बाढ़ की चपेट में हैं, तटीय क्षेत्र में चक्रवात और राज्य के पश्चिमी हिस्से में 11 जिलों में सूखे की आशंका बनी रहती है। पश्चिम, उत्तर और दक्षिण बड़े पैमाने पर आदिवासी, पहाड़ी और जंगल हैं, जबकि पूर्व में छह प्रमुख नदियों के साथ उपजाऊ तटीय मैदान हैं।

ओडिशा में देश में सबसे अधिक नवजात मृत्यु दर प्रति 1000 बच्चों में 32 (नमूना पंजीकरण प्रणाली 2016) के साथ गहरी शहरी-ग्रामीण विषमताएं हैं। लिंग असमानता, विशेष रूप से महिला नवजात शिशुओं के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयों में कम प्रवेश भी चिंता का विषय है। 

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 4 के अनुसार, ओडिशा में भारत में प्रति 1000 जन्मे बच्चों में 13 बच्चे मृत पैदा होते हैं। मातृ मृत्यु अनुपात प्रति 100,000 जन्मे बच्चों में 180 है। 14 आदिवासी बहुल जिलों में लगभग 800,000 बच्चों का आंशिक रूप से टीकाकरण हुआ है या बिना टीकाकरण के हैं।

खाद्य असुरक्षा एक संवेदनशील जोखिम बना हुआ है, विशेष रूप से सबसे वंचित आदिवासी समूहों में, आदिवासी बच्चों में स्टंटिंग और अंगों का कमजोर होना अधिक होता है। 

महिलाओं और किशोर लड़कियों की खराब पोषण स्थिति बाल स्टंटिंग में एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता बनी हुई है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस) 4 के अनुसार, 15-18 वर्ष की आयु की किशोर लड़कियों में अनुमानित 52 प्रतिशत बुरी तरह से कुपोषित हैं। 15-49 वर्ष की आयु की लगभग 51 प्रतिशत महिलाएँ एनीमिक हैं।

अधिकांश सीमांत समूहों के बीच बच्चों की भेद्यता उच्च स्तर की गरीबी, कठोर सामाजिक मानदंडों और सांस्कृतिक प्रथाओं, परिवारों के विस्थापन, अक्सर प्राकृतिक आपदाओं और वामपंथी उग्रवाद की उपस्थिति के साथ गहराती है। बाल देखभाल संस्थानों में बच्चे, देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता वाले बच्चों और कानून के साथ संघर्ष में उन लोगों को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। बाल श्रम और बच्चों के खिलाफ हिंसा लगातार जारी है।

ओडिशा ने ग्रेड 1-5 में सकल / शुद्ध नामांकन दरों में ऊपर पहुंच गया है और 6-14 आयु वर्ग के बीच स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में काफी कमी आई है। इसकी चुनौती शिक्षा की गुणवत्ता और मध्य और माध्यमिक विद्यालय स्तर पर नामांकन में तेज गिरावट है।

शिक्षकों और छात्रों के बीच शिक्षण प्रक्रिया और लेनदेन की गुणवत्ता को मजबूत करना एक महत्वपूर्ण आवश्यकता है, जबकि राज्य नियमित रूप से उपस्थिति और स्कूल छोड़ने वाले सभी बच्चों को स्कूल में वापस लाने पर जोर देता है। 3-6 वर्ष की आयु के 20 प्रतिशत बच्चे किसी भी प्रकार के प्री-स्कूल में प्रवेश नहीं लेते।

समग्र स्वच्छता कवरेज में वृद्धि हुई है फिर भी लोग अभी भी ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच करते हैं। शौचालय के उपयोग और रखरखाव को बढ़ावा देने के लिए व्यवहार परिवर्तन लाना राज्य के लिए एक चुनौती बना हुआ है। जबकि अधिकांश घरों में एक बेहतर पेयजल स्रोत तक पहुंच है, केवल 19 प्रतिशत परिवारों के पास घरेलू परिसर में पीने के पानी की सुविधा है।

बच्चों के अधिकारों और उनके कल्याण की दिशा में काम करना

यूनिसेफ बाल विकास और किशोरों के सशक्तीकरण में योगदान देता है, शुरुआती वर्षों में निवेश के महत्व को पहचानता है और किशोरों के लिए अवसरों का दूसरा मौका प्रदान करता है।

राज्य सरकार, शिक्षाविदों, गैर-सरकारी संगठनों, समुदाय आधारित संगठन (सीबीओ), धार्मिक समूहों, युवा समूहों, निर्वाचित प्रतिनिधियों और ओडिशा में निजी क्षेत्र के साथ मिलकर यूनिसेफ स्वास्थ्य सेवाओं के वितरण की गुणवत्ता में सुधार लाने, आवश्यक पोषण हस्तक्षेपों के पैमाने में सुधार, खुले में शौच करने की गतिविधि में कमी लाने और सुरक्षित पेयजल और पानी की गुणवत्ता तक पहुँच में सुधार करना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और बाल संरक्षण प्रणालियों और तंत्रों की सहायता करता है जो सुरक्षा संरक्षण कानून को लागू करने में मदद करते हैं। 

इसे क्षमता विकास, प्रणाली सुदृढ़ीकरण, सामुदायिक गतिशीलता, साक्ष्य-आधारित नीति और साझेदारी जैसी रणनीतियों के माध्यम से निष्पादित किया जाता है।

यूनिसेफ सुविधा आधारित नवजात शिशु देखभाल इकाइयों के कवरेज को बढ़ाने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करता है और कंगारू मदर केयर इकाइयों सहित और अधिक विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाइयां स्थापित करने और राज्य में नियमित टीकाकरण को मजबूत करने, दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों पर ध्यान केंद्रित करने की सुविधा प्रदान करता है। 

बच्चे खुश और व्यस्त दिख रहे हैं। बच्चे कभी भी आराम से शिक्षकों / देखभालकर्ताओं के पास चले जाते हैं। जिला गंजम, ओडिशा।
UNICEF/UN0325776/Hajra बच्चे खुश और व्यस्त दिख रहे हैं। बच्चे कभी भी आराम से शिक्षकों / देखभालकर्ताओं के पास चले जाते हैं। जिला गंजम, ओडिशा।

हम सरकार के नेतृत्व वाले माइक्रोन्यूट्रिएंट सप्लीमेंटेशन कार्यक्रम में सहायता करते हैं, जिसमें साप्ताहिक आयरन एंड फॉलिक एसिड सप्लीमेंटेशन (डब्ल्यूआईएफएस) प्रोग्राम शामिल है। 

स्वयं सहायता समूहों के साथ साझेदारी में, यूनिसेफ ने महिलाओं और किशोरियों के पोषण को संबोधित करने के लिए एक पूरक भोजन कार्यक्रम शुरू किया है। यह पोषण पुनर्वास केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में तीव्र कुपोषण के समुदाय-आधारित प्रबंधन की शुरुआत में राज्य के प्रयासों में सहायता करता है।

यूनिसेफ खुले में शौच की प्रथा को कम करने और व्यवहार परिवर्तन संचार के माध्यम से शौचालय के उपयोग को बढ़ाने और स्वच्छता के लिए सामुदायिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के अपने प्रयासों में राज्य की सहायता करता है। 

यह आगे चलकर स्कूलों में पानी और स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित पेयजल और पानी की गुणवत्ता तक पहुंच बनाने, हाथ धोने की प्रथाओं, पानी के संचालन और रखरखाव, स्वच्छता और सफाई के बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने और यह सुनिश्चित करने के लिए काम करता है कि स्वास्थ्य सुविधाओं में कार्यात्मक पानी, स्वच्छता और सफाई बुनियादी ढांचा है।

ओडिशा में हम शिक्षण परिणामों को मजबूत करने के लिए शिक्षक शिक्षा सुधारों का समर्थन करते हैं। यह समावेशी शिक्षा, लिंग संवेदनशील शिक्षा और तंत्र पर जोर देता है ताकि वे सभी बच्चे जो स्कूल आना बंद कर सकते हैं उनकी पहचान और निगरानी की जा सके। यह प्रारंभिक बाल शिक्षा का समर्थन करता है, मातृभाषा पर आधारित प्रारंभिक बाल देखभाल और शिक्षा पर जोर देता है।

यूनिसेफ राज्य में बाल संरक्षण संरचनाओं और तंत्रों की स्थापना, बाल संबंधित कानूनों के कार्यान्वयन की वकालत और क्षमता निर्माण का समर्थन करता है। यह न्यायपालिका, विशेष रूप से उड़ीसा उच्च न्यायालय में किशोर न्याय समिति, नागरिक समाज संगठनों, नेटवर्क और सार्वजनिक वकालत प्लेटफार्मों के साथ मिलकर उन मुद्दों को संबोधित करता है जो बाल श्रम, बाल विवाह जैसे बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं।

हम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और नागरिक समाज संगठनों के अंतर-एजेंसी समूह के साथ मिलकर काम करते हैं ताकि जोखिम में कमी और आपदा प्रबंधन और प्रतिक्रिया पर ओडिशा के प्रयासों की सहायता की जा सके।

संसाधन

राजस्थान में जल संरक्षण मुहिम की अगुवाई कर रही 'जल सहेलियां'

पश्चिमोत्तर भारत के इस सूखाग्रस्त राज्य में परंपरागत जल स्रोत 'नाड़ी' को फिर से ज़िंदा कर रही 'फ्रेंड्स ऑफ वॉटर'

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