सी-सेक्शन डिलीवरी के एक घंटे के भीतर स्तनपान जरूरी
तेलंगाना सरकार और यूनिसेफ की अनूठी अस्पताल पहल सी-सेक्शन माताओं के लिए स्तनपान में परिवर्तनकारी कदम
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हैदराबाद, भारत: हैदराबाद के किंग कोटी जिला अस्पताल में माँ बनी उषा रानी की देखभाल करने वाली नर्स ने खुशी से कहा, "बधाई हो, हमने यह कर दिखाया- यह एक हरे रंग की मुहर है!" इसके अनुसार, उषा की अस्पताल फ़ाइल पर हरे रंग की मोहर लगाई गई, जो यह दर्शाता है कि उसके बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान कराया गया था।
यह उषा की पहली डिलीवरी थी और जटिलताओं के कारण उसे सिजेरियन सेक्शन करवाना पड़ा। लेकिन इससे उसे जन्म के पहले घंटे में अपने बच्चे को स्तनपान कराने से नहीं रोका जा सका, यह अस्पताल की एक अनूठी पहल की बदौलत संभव हुआ जो मातृत्व देखभाल अभ्यास में एक बड़ा बदलाव है।
जबकि WHO नवजात शिशु के जीवन की सबसे अच्छी शुरुआत सुनिश्चित करने के लिए जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने की सलाह देता है, सी-सेक्शन माताओं को आमतौर पर ऐसा करने के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है। और जब स्तनपान में देरी होती है, तो परिणाम जीवन के लिए खतरा हो सकते हैं, और नवजात शिशुओं को जितना अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है, जोखिम उतना ही अधिक होता है।
ऐसा वातावरण बनाने के लिए, जहां हर नवजात शिशु को सर्वोत्तम शुरुआत मिल सके, यूनिसेफ और तेलंगाना सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण आयुक्तालय ने किंग कोटि जिला अस्पताल में मातृ देखभाल विशेषज्ञों से परामर्श किया, ताकि सामान्य और सी-सेक्शन दोनों प्रसवों के लिए स्तनपान की प्रारंभिक शुरुआत की प्रणाली को लागू किया जा सके।
यह बात सामने आई कि प्रसव कक्ष के कर्मचारी प्रसव के तुरंत बाद सामान्य प्रसव के लिए स्तन रेंगना और त्वचा से त्वचा का संपर्क का पालन करते हैं। फिर भी, सी-सेक्शन द्वारा प्रसव कराने वाली महिलाओं के मामले में, बच्चे को तब तक दूध के लिए इंतजार करना पड़ता है जब तक कि माँ को प्रसवोत्तर वार्ड में स्थानांतरित नहीं कर दिया जाता - लगभग दो महत्वपूर्ण घंटों या उससे अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है।
एक साधारण सवाल ने इस चुनौती को हल कर दिया: क्या ऑपरेशन थियेटर में ही स्तनपान शुरू किया जा सकता है?
किंग कोटी अस्पताल के सिविल सर्जन स्पेशलिस्ट, एचओडी, ओबीजीवाईएन डॉ. जलाजा ने ऑपरेशन थियेटर में अगले ही दिन इस विचार का परीक्षण करने के लिए प्रसूति रोग विशेषज्ञों, स्त्री रोग विशेषज्ञों, बाल रोग विशेषज्ञों और नर्सों की एक टीम को नियुक्त करने पर सहमति जताई।
अस्पताल की प्रशिक्षित स्टाफ नर्सों ने सी-सेक्शन से प्रसव कराने वाली मां को जन्म के एक घंटे के भीतर ऑपरेशन थियेटर में बच्चे को दूध पिलाने में सहायता की।
डॉ. जलजा ने कहा "यह एक आसान प्रक्रिया है। इसके लिए तकनीक की किसी सहायता की आवश्यकता नहीं है। यह सोचने का एक अलग तरीका है जिसने माताओं और उनके नवजात शिशुओं के बीच के बंधन को मजबूत करने में मदद की है। हम इस बात से बहुत खुश हैं कि हमारे सहयोगियों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सहयोग से यह संभव हो सका,"।
किंग कोटि अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर में अपने बच्चे को स्तनपान कराने वाली पहली मां उषा रानी, अपने नए टांकों में दर्द महसूस करते हुए भी मुस्कुराये बिना नहीं रह सकीं।
उषा कहती हैं, "ऑपरेशन के बाद मैं बिल्कुल भी होश में नहीं थी, लेकिन कुछ अद्भुत हुआ और मैं दर्द के बावजूद खुश रही। मुझे उम्मीद नहीं थी कि सी-सेक्शन के तुरंत बाद मैं बच्चे के इतने करीब रहूंगी।"
वह आगे कहती हैं, "प्रसव के तुरंत बाद नर्सों ने मुझे बच्चे को स्तनपान कराने में मदद की। यह एक बेहतर अनुभव था।"
प्रत्येक बच्चे और मां को सर्वोत्तम देखभाल प्रदान करने के लिए मातृ एवं नवजात शिशु देखभाल विशेषज्ञों द्वारा इस तरह के कई अन्य हस्तक्षेप प्रतिदिन किए जाते हैं।
प्रारंभिक स्तनपान को बढ़ावा देने की दिशा में एक तार्किक अगले कदम के रूप में, तेलंगाना सरकार, भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी, निलोफर अस्पताल और यूनिसेफ ने भारतीय स्तनपान संवर्धन नेटवर्क (बीपीएनआई) के साथ मिलकर चुनिंदा स्वास्थ्य सुविधाओं को संवेदनशील बनाने, प्रशिक्षित करने और 'शिशु अनुकूल अस्पताल' के रूप में बीपीएनआई मान्यता के साथ प्रमाणित करने के लिए सहयोग किया है।
माँ और बच्चे का जुड़ाव दो शरीर एक जान का होता है, जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञों, सरकार और सहयोगियों को सहायता के लिए एक साथ लाकर और अधिक मजबूत किया जा सकता है।