यूनिसेफ की मेहनत बेजोड़, हर घर, हर गली में टीकाकरण के लिए भागदौड़
देखकर स्वस्थ बच्चे और खुश परिजन, एएनएम और आशा दीदी होती हैं ऊर्जावान
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यूनिसेफ के स्थानीय प्रशासन के साथ प्रयासों से महाराष्ट्र के नासिक और छत्रपति संभाजीनगर में हर बच्चे को वैक्सिनेशन डोज दी जा रही है। कोई पीछे न छूटे की तर्ज पर यूनिसेफ की बेजोड़ मेहनत से हर गांव और गली तक टीकाकरण का संदेश पहुंचा। आज छत्रपति संभाजीनगर का वाडर समुदाय हो या औरंगाबाद रोड का सैययद समुदाय हो, पवन नगर का ईंट भट्ठा हो या नासिक के गोसावीवाड़ी और कोकनीपुरा हो। हर जगह महिलाएं अपने बच्चों को वैक्सिनेशन के लिए सामने आ रही हैं।
बात 2021 मध्य की है, जब यूनिसेफ और छत्रपति संभाजीनगर के स्थानीय प्रशासन के साथ सहभागी हुई और अर्बन रूटीन इम्यूनाइजेशन प्रोग्राम ने रफ्तार पकड़ी। यूनिसेफ के प्रयासों से और मदद से प्रशासन हर आखिरी बच्चे को ट्रैक कर पाया। अब अपने बच्चों को स्वस्थ देखकर न केवल उनके परिजन खुश हैं, बल्कि एएनएम और आशा दीदी भी खुद को ऊर्जावान महसूस कर रहे हैं। प्रॉजेक्ट की शुरुआत ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच, मॉनिटरिंग और लोगों को साथ लेकर की गई।
यूनिसेफ ने हेल्थ वर्करों को न केवल ट्रेनिंग दी, बल्कि उनके लिए आरआई किट और अन्य जरूरी सुविधाएं देकर वैक्सीनेशन को आसान बनाया। एएनएम प्राजक्ता कहती हैं, "पहले स्थानीय बस्तियों के लोग विरोध करते थे और न जाने क्या क्या सवाल उठाते थे। हमसे जवाब देते नहीं बनता था। यूनिसेफ ने हमें ट्रेनिंग के साथ बुकलेट भी दी। लोगों के सवालों को सही जवाब भी सुझाए। इसके साथ डोर-टू-डोर कैंपेन में भी यूनिसेफ की टीम साथ रही। उनके सर्वे से भी हमें आखिरी बच्चे तक पहुंचने में मदद मिली।"
अपने बेटे को वैक्सिनेशन की डोज दिलाने के बाद छत्रपति संभाजीनगर की अनिता कहती हैं, मैं अब बहुत खुश हूं, क्योंकि वैक्सिनेशन से कई बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। इसके साथ एमसीपी कार्ड में टीकाकरण संबंधी रिकॉर्ड भी रहता है। वहीं आशा दीदी भी हमें अगली डोज के बारे में पहले से जानकारी देती हैं।"
2021 में प्रोजेक्ट की शुरुआत के बाद से ही न केवल साधारण भाषा और ग्राफिक्स में बुकलेट और पोस्टर तैयार किए गए। बल्कि, मेगाफोन, आईईसी वैन और पोर्टेबल प्रोजेक्टर के माध्यम से लोगों को वैक्सिनेशन का महत्व समझाया गया। वहीं यूनिसेफ के पोर्टेबल टेंट और इम्यूनाइजेशन किट बैग ने एएनएम और आशा दीदी के काम को आसान बनाने में बहुत मदद की।
वहीं यूनिसेफ की फील्ड टीम ने बखूबी अपनी जिम्मेदारी को निभाया। इसमें ग्राउंड पर रहकर एएनएम और आशा वर्करों के साथ इम्यूनाइजेशन सेशन में साथ रहना, लोगों से संपर्क साधना और हर प्रोग्रेस को मॉनिटर करना शामिल रहा। वहीं महिला आरोग्य समिति की भी मदद लेकर झुग्गी झोपड़ियों और बस्ती महिलाओं के साथ संपर्क साधा गया।
एएनएम ज्योति चवान कहती हैं, "यूनिसेफ द्वारा दिए गए आरआई किट बैग से आउटडोर कैंप बहुत ही आसान हो गए हैं। पहले सब कुछ एक ही बैग में पैक करना पड़ता था और सब कुछ मिल जाता था। पर अब, वैक्सीन, सिरिंज, टैबलेट और कॉटन समेत हर चीज के लिए जगह सुनिश्चित है।"
एएनएम निर्मला शिंदे और आशा ताई भावना कहती हैं, "पहले हम जब दुर्गम क्षेत्रों में जाते तो महिलाएं अपने बच्चों को लेकर जंगल और पहाड़ों की तरफ भाग जाती थीं। ये सभी दिहाड़ी का कार्य करती हैं और इन्हें लगता था कि वैक्सीन से इनका बच्चा बीमार रहेगा तो एक दो दिन काम से छुट्टी करनी पड़ेगी। धीरे धीरे हमने महिलाओं का भरोसा जीता और आज महिलाएं सभी कैंप में आती हैं।"