मयनागुड़ी, पश्चिम बंगाल में प्लास्टिक प्रदूषण पर रोक: एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की राह

एक स्वच्छ और टिकाऊ भविष्य की राह: प्लास्टिक कचरे से बनी सड़कें बना रही हैं एक स्वच्छ, सुरक्षित और सतत समुदाय

निरमा बोरा, क्लाइमेट चेंज कंसल्टेंट और वीनीता मिश्रा, संचार अधिकारी
A sixth grader, Rahul Rai recently developed a passion for skating but lacked a proper surface to practice—until the new plastic-bitumen road was built in Saptibari village of Maynaguri block, in Jalpaiguri district.
UNICEF/UNI812055/Biswas
08 दिसम्बर 2025

कल्पना कीजिए एक ऐसी सड़क की, जो सिर्फ बच्चों को स्कूल या किसी माँ को स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं ले जाती—बल्कि एक बड़े उद्देश्य को भी साथ लेकर चलती है। एक ऐसा उद्देश्य जिसमें कभी नष्ट होने वाले प्लास्टिक कचरे, जो नदियों को जाम कर देते थे और रास्तों पर बिखरे रहते थे, अब तरक्की की राह को मजबूत बना रहे हैं।

पश्चिम बंगाल के ग्रामीण इलाकों में फेंके हुए प्लास्टिक—खासकर सिंगल-यूज़ और मल्टी-लेयर प्लास्टिक—को नई ज़िंदगी मिली है। इन्हें बिटुमिनस सड़कों में मिलाकर बनाई गई सड़कें सिर्फ इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं, बल्कि एक सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक हैं।

13 वर्षीय राहुल के लिए, उसके गाँव की ऊबड़-खाबड़ सड़क अब स्केटिंग का मैदान बन गई है, जहाँ वह आज खुशी से फिसलता है।

“पहले स्केटिंग करने के लिए ठीक जगह नहीं थी। अब मैं दिन में दो बार स्केटिंग कर पाता हूँ।”
— 13 वर्षीय राहुल, साप्तिबाड़ी गाँव

यह पहल, जलपाईगुड़ी जिला प्रशासन द्वारा लागू की जा रही पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं में से एक है। स्वच्छ भारत मिशन के 2024 के विभागीय आदेश के अनुसार, प्लास्टिक कचरे के सुरक्षित प्रबंधन के लिए प्लास्टिक-बिटुमिनस सड़कें एक महत्वपूर्ण समाधान बनकर उभरी हैं।

स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) फेज-II के दिशा-निर्देशों के अनुसार, हर ब्लॉक में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन इकाई (PWM) होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से मयनागुड़ी ब्लॉक के खग्राबाड़ी-II ग्राम पंचायत में अक्टूबर 2024 से एक (PWM) पीडब्ल्यूएम यूनिट कार्यरत है।

Workers segregate plastic from biodegradable waste at the SWM unit in Nagrakata block, Jalpaiguri district, West Bengal.
UNICEF/UNI812072/Biswas Workers segregate plastic from biodegradable waste at the SWM unit in Nagrakata block, Jalpaiguri district, West Bengal.

यह यूनिट प्रतिदिन लगभग 600 किलोग्राम प्लास्टिक संग्रह करती है—15 ग्राम पंचायतों और एक नगरपालिका से। इनमें अधिकतर लो-डेंसिटी पॉलीएथिलीन (LDPE) एलडीपीई होता है, जो पॉलिथीन बैग और खाद्य पैकेजिंग में पाया जाता है।

इस कचरे को छोटे टुकड़ों या ग्रैन्यूल्स में बदलकर सड़क निर्माण के लिए ठेकेदारों को दिया जाता है।

Workers at the PWM unit of Khagrabari-II gram panchayat, Maynaguri block, Jalpaiguri, West Bengal, shred segregated plastics using a shredding machine.
UNICEF/UNI812050/Biswas Workers at the PWM unit of Khagrabari-II gram panchayat, Maynaguri block, Jalpaiguri, West Bengal, shred segregated plastics using a shredding machine.

(PWM) पीडब्ल्यूएम यूनिट में पाँच पुरुष और दो महिला कर्मचारी काम करते हैं, जिन्हें 202 रुपये दैनिक मजदूरी मिलती है। उसी परिसर में 2021 से एक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट (SWM) एसडब्ल्यूएम यूनिट भी चल रही है। शुरुआत में युवा जुड़ने में हिचकिचाते थे, क्योंकि कचरा प्रबंधन को अक्सर अशुद्ध और असुरक्षित माना जाता था।

लेकिन सुरक्षा उपकरणों, नियमित स्वास्थ्य जांच और रोजगार के सीमित अवसरों के बीच, यह काम उनके लिए आय और सम्मान दोनों का माध्यम बन गया।

Workers from the Plastic Waste Management (PWM) unit under Khagrabari-II Gram Panchayat in Maynaguri block, Jalpaiguri district of West Bengal, pose for a group portrait at the facility in Maynaguri, where they are engaged in processing and managing local plastic waste.
UNICEF/UNI812067/Biswas Workers with supervisor from the Plastic Waste Management (PWM) unit under Khagrabari-II Gram Panchayat in Maynaguri block along with Mr Nilesh Sinha (sitting left), SBM Nodal Maynaguri with the supervisor and workers of the PWM unit, Jalpaiguri district of West Bengal, pose for a group portrait at the facility in Maynaguri, where they are engaged in processing and managing local plastic waste.

35 वर्षीय चैताली मोदक, दो बच्चों की माँ, ने जब यह काम चुना तो समाज ने उन पर सवाल उठाए। लेकिन उनका संकल्प अडिग रहा।

“अगर हम यह ‘गंदा’ काम करेंगे, तो समाज सुधरेगा और मेरे बच्चों का भविष्य बेहतर होगा।”
— चैताली मोदक, स्वच्छता कर्मी

समय के साथ, चैताली का सोच बदली, घर की आदतें बदलीं—और आज वे पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक हैं। यही बदलाव (PWM) पीडब्ल्यूएम और (SWM) एसडब्ल्यूएम यूनिट के अन्य 21 कर्मचारियों में भी देखा जा सकता है। उनकी मेहनत से गाँव में कूड़ा-कचरा कम हुआ है और जर्डा नदी का किनारा भी साफ हुआ है।

जो शुरुआत एक नौकरी की तरह हुई थी, वह धीरे-धीरे एक शांत, लेकिन प्रभावी आंदोलन बन गई—मयनागुड़ी की ओर से स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम। जिला प्रशासन भी इस पहल को एक मिसाल मानता है:

Sita Rai, of Dhumpara village in Nagrakata block, Jalpaiguri, is seen emptying her household dustbin into the SWM units e-cart.
UNICEF/UNI812055/Biswas Sita Rai, of Dhumpara village in Nagrakata block, Jalpaiguri, is seen emptying her household dustbin into the SWM units e-cart.

“यह परियोजना दिखाती है कि कैसे हम पर्यावरणीय चुनौती को अवसर में बदल सकते हैं—लैंडफिल दबाव कम करते हुए, नदियों को बचाते हुए, और बेहतर सड़कें बनाते हुए जो ग्रामीण संपर्क और आर्थिक विकास को बढ़ाती हैं।”
— श्री रौनक अग्रवाल, एडीएम और एईओ, जलपाईगुड़ी जिला परिषद

Plastic waste litter roads in Jalpaiguri, West Bengal, highlighting the challenge of effective waste management.
UNICEF/UNI812055/Biswas Plastic waste litter roads in Jalpaiguri, West Bengal, highlighting the challenge of effective waste management.

भारत जैसे देश में, जहाँ प्लास्टिक कचरे की समस्या गंभीर है, यह पहल केवल समाधान नहीं—बल्कि एक परिवर्तनकारी सोच है। कचरे को सड़क में बदलना नवाचार, स्थिरता और स्थानीय आर्थिक सशक्तिकरण को जोड़ता है।

यूनिसेफ ने पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर क्षमता निर्माण, मॉनिटरिंग और प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 2023–24 से यूनिसेफ ने (ODF Plus) ओडीएफ प्लस, (SLWM) एसएलडब्ल्यूएम और (PWM) पीडब्ल्यूएम पर कई राज्यस्तरीय प्रशिक्षण और (ToT) सत्र आयोजित किए हैं।

अब तक 244 किमी सड़कें प्लास्टिक-बिटुमिनस तकनीक से बनाई जा चुकी हैं। 221 प्रतिभागियों को (PWM) पीडब्ल्यूएम यूनिट के संचालन का प्रशिक्षण दिया गया है। 1,331 स्वच्छता कर्मियों को मैदान-स्तरीय कार्यों के लिए प्रशिक्षित किया गया है।

Plastic-bituminous Road in making in Jalpaiguri (Photo Courtesy - Jalpaiguri Zilla Parishad Office)
UNICEF/UNI812055/Biswas Plastic-bituminous Road in making in Jalpaiguri (Photo Courtesy - Jalpaiguri Zilla Parishad Office)

राज्य अब (SLWM) एसएलडब्ल्यूएम, (PWM) पीडब्ल्यूएम, (SWM) एसडब्ल्यूएम और (GWM) जीडब्ल्यूएम के लिए नीति और तकनीकी दिशानिर्देश भी अंतिम रूप दे रहा है।

कचरे को बदलाव के साधन में बदलकर, मयनागुड़ी एक स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ भविष्य की ओर बढ़ रहा है—एक-एक प्लास्टिक-बिटुमिनस सड़क के साथ।