भारत में स्वच्छता के लिए यूनिसेफ द्वारा किए जा रहे कार्यों का इतिहास

पिछले 70 वर्षों से यूनिसेफ भारत सरकार और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर ये सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है भारत में हर बच्चे को साफ़ पानी, सामान्य शौचालय उपलब्ध हो और वे स्वच्छता सम्बन्धी व्यव्हार का पालन करें |

इदरीस अहमद
देवराज (6) प्रशिक्षण प्राप्त करते हुए। ए डबल्यू डबल्यू (AWW) मधु बाईरा और सी एच ओ (CHO ) जस्टिन परमार द्वारा कोविड लॉकडाउन के बाद ममता दिवस सत्र (VHND)  के दौरान बच्चों के लिए हैंडवाशिंग सत्र आयोजित किया गया। स्थान: ग्राम कुंडली, रायबर, दाहोद, गुजरात
विनय पंजवानी
16 अक्तूबर 2020

आज हम ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे मना रहे हैं | एक ऐसा दिन जब हम खुद से एक बार फिर ये सुनिश्चित करने के लिए वादा करें कि भारत में हर बच्चे को पानी उपलब्ध हो, जिससे वो साबुन और पानी से अपना हाथ धो सके। ताकि,  बीमारियों से वो दूर रहे और उसका जीवन सुरक्षित रहे |

पिछले 70 वर्षों से यूनिसेफ भारत सरकार और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर ये सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है भारत में हर बच्चे को साफ़ पानी, सामान्य शौचालय उपलब्ध हो और वे स्वच्छता संबंधी व्यव्हार का पालन करें |

आज, आइए हम इतिहास का पहिया एक बार फिर घुमाते हैं और आपको एक रोचक यात्रा पर ले चलते हैं जिसमे आप जानेंगे कि पिछले सात दशकों में भारत में यूनिसेफ की क्या सबसे प्रमुख उपलब्धियां रही हैं |

भारत में सूखा
यूनिसेफ़
प्रतिरूप चित्र

1966  -बिहार का सूखा

1966 की गर्मी में, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश ने, इस क्षेत्र में 20 वीं सदी के, सबसे भयानक सूखों में से एक का सामना किया | लगभग 6 करोड़ लोग खाने और पानी की ज़बरदस्त कमी से पीड़ित थे | प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के आह्वान पर यूनिसेफ ने सरकार के सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के प्रयासों को तेज करने के लिए खुदाई की मशीनें उपलब्ध करायीं |

आकस्मिक कार्यक्रम के रूप में शुरू किया गया ये कार्यक्रम, एक निश्चित समय में, विस्तृत रूप लेकर राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम बन गया, जिसमे यूनिसेफ एक प्रमुख भागीदार था |

मार्क II हैंडपंप
यूनिसेफ़

1970 – 1980 जल क्रांति

1970 के दशक में यूनिसेफ, विश्व के सबसे बड़े ग्रामीण जल आपूर्ति कार्यक्रम में भारत सरकार का प्रमुख सहयोगी बना | यूनिसेफ ने कड़ी चट्टानों में खुदाई करने लायक खुदाई मशीने मंगाई | सरकार ने हैण्डपम्पों की आपूर्ति की | इसी समय एक समस्या आ गई |

एकल परिवारों के प्रयोग के लिए बनाये गए हैंडपंप 500 से ज्यादा के समुदाय द्वारा प्रयोग लायक नहीं थे | भारत में स्थानीय रूप से बने मज़बूत और आसान रख-रखाव वाले हैंडपंप की ज़रुरत थी |

मार्क II हैंडपंप
यूनिसेफ़

इस आवश्यकता के चलते विश्व के सर्वाधिक प्रसिद्ध इंडिया मार्क II हैंडपंप का निर्माण हुआ | सरकार के मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गेनाईजेशन और भारत सरकार की एक इंजीनियरिंग कंपनी रिचर्डसन एंड क्रुडास के साथ मिलकर यूनिसेफ ने इंडिया मार्क II बनाने पर काम किया, लेकिन इस कहानी की शुरुआत महाराष्ट्र से हुई जहाँ शोलापुर पंप पहले से ही प्रयोग किये जा रहे थे | ये पंप मज़बूत थे और अच्छी इंजीनियरिंग से तैयार किये गए थे और ये इंडिया मार्क II की डिजाईन का आधार बने |

इंडिया मार्क II और उसके बाद इंडिया मार्क III आज दुनिया के 40 से अधिक देशों को निर्यात किये जाते हैं |

गिनी वर्म उन्मूलन कार्यक्रम
यूनिसेफ़
गिनी वर्म

1983 – गिनी वर्म उन्मूलन कार्यक्रम

गिनी वर्म से होने वाली तकलीफदेह बीमारी से छुटकारा पाने के लिए यूनिसेफ ने भारत सरकार के राष्ट्रीय कार्यक्रम में अपने सहयोग दिया | यह परियोजना ऑपरेशन द्वारा गिनी वर्म निकालने की पद्धति शुरू करने में सहायक साबित हुई जो पहले भारत में और उसके बाद पूरे विश्व में स्वीकार की गयी | 2000 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भारत को गिनी वर्म मुक्त घोषित किया |

 

महिला हैंडपम्प मैकेनिक
यूनिसेफ़

1992 - महिला हैंडपम्प मैकेनिक

भारत में खुदाई कर के हैंडपम्प का निर्माण पारम्परिक रूप से पुरुषों का कार्य माना जाता था | खुदाई और हैंडपंप के मरम्मत के काम में महिलाएं कभी भी आगे नहीं आ सकीं क्योंकि पुरुष इसके मत के खिलाफ थे | यूनिसेफ के मदद से एक परियोजना चलाई गई, जिसका उद्देश्य इस कौशल एवं अधिक श्रम वाले कार्य  के लिए महिला हैंडपंप मैकेनिकों का क्षमता वर्धन करना था |

सचिन हैंड वॉशिंग
यूनिसेफ़

2008 - ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे को समर्थन

ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे की शुरुआत 2008 में हुई और यूनिसेफ इंडिया ने 15 अक्टूबर को होने वाले इन आयोजनों को सभी क्षेत्रीय कार्यालयों और स्कूलों में समर्थन किया | स्कूलों में विभिन्न प्रकार की गतिविधियाँ कराना ही सालों साल इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस रहा है | 

भारतीय क्रिकेट की महान हस्ती और यूनिसेफ के राजदूत सचिन तेंदुलकर और उनकी टीम के सदस्य, 2008 में प्रथम ग्लोबल हैंड वॉशिंग डे पर बेहतर स्वास्थ्य और स्वच्छता पर ज़ोर देने के लिए पूरे देश में लगभग 10 करोड़ बच्चों से जुड़े |

इससे इसके आयोजन को बहुत प्रोत्साहन मिला | कोविड महामारी के खिलाफ लड़ाई में इस वर्ष हैंड वाशिंग हमारी सुरक्षा का प्रमुख हथियार बन गया है, और वैश्विक स्तर पर और पूरे देश में इसका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है |

हैंड वॉशिंग
प्रशान्त विश्वनाथन

2014: स्कूलों में हैंड वॉशिंग को बढ़ावा देना

2009 में पारित शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आर टी ई) में स्कूलों के लिए लिंगानुसार अलग अलग शौचालय और पीने के पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कराना अनिवार्य कर दिया गया | मिड-डे मील खाने के स्थान के समीप हैंड वॉशिंग स्थल के निर्माण के प्रावधान के साथ साबुन से हाथ धोने को 2013 में मिड डे मील योजना का एक भाग बना दिया गया |

चुने हुए विशेष प्राथमिकता वाले ज़िलों के स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और स्वास्थ्य देखभाल सुविधा कार्यक्रमों में जल, एवं स्वच्छता कार्यक्रम (वाश) में यूनिसेफ ने सहयोग एवं हिमायत करने में भाग लिया | सामूहिक रूप से हाथ धोने की धारणा यूनिसेफ द्वारा बनाई एवं विकसित की गई |

भारत को खुले में शौच से मुक्त
धीरज सिंह

2019: भारत को खुले में शौच मुक्त बनाने में मदद

अब से कुछ वर्षों पूर्व, 2015 में, भारत की लगभग आधी जनसँख्या, 56.8 करोड़ लोग, जो कि दक्षिण एशिया के ऐसे 90 प्रतिशत और पूरे विश्व के 120 करोड़ लोगों के आधे थे जो खुले में शौच करते थे | 

भारत ने स्वच्छ भारत अभियान नाम से एक व्यापक स्वच्छता कार्यक्रम की शुरुआत की, जिसके अंतर्गत 2015 से 2019 के बीच 10.5 करोड़ लोगों तक शौचालय और उसके द्वारा 52.5 करोड़ लोगों की शौचालय तक पहुँच सुनिश्चित की गई | 

ये एक महान उपलब्धि है, जो केवल प्रधानमंत्री के नेतृत्व में चलाये जा रहे अभियान और सभी की व्यापक सहभागिता के साथ उसका क्रियान्वयन तथा राष्ट्रव्यापी जीवंत जन-आंदोलन के कारण ही संभव हो सका | 

यूनिसेफ स्वचछ भारत अभियान का सहयोगी बनकर गर्वान्वित महसूस करता है |