बच्चे के लिए अमृत है मां का दूध

बच्चे के लिए प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है मां का दूध

Unicef
mother breastfeeding her baby
UNICEF
06 अगस्त 2024

शिशु के लिए मां का दूध एक प्राकृतिक और आवश्यक पोषण है, इसको लेकर कई प्रकार की भ्रांतियां व्याप्त हैं, जिन्हें दूर करने के लिए सटीक ज्ञान और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।

- डा. कनीनिका मित्र एवं आस्था अलंग

प्रत्येक वर्ष, अगस्त माह के पहले सप्ताह के दौरान विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य शिशुओं के स्वास्थ्य और विकास में स्तनपान की भूमिका को महत्व देना है। यह कार्यक्रम स्तनपान के प्रति जागरूकता पैदा करने के अलावा, इसको लेकर व्याप्त भ्रांतियों को दूर करके दुनिया भर में शिशुओं के लिए स्तनपान को बढ़ावा देता है। इस वर्ष के स्तनपान सप्ताह का थीम है, ‘‘क्लोजिंग द गैपः ब्रेस्टफीडिंग सपोर्ट फॉर ऑल’’। यह स्तनपान को लेकर एक समावेशी सहायता प्रणाली प्रदान करने के महत्व को रेखांकित करता है, ताकि सभी मां और बच्चे को स्तनपान का लाभ मिल सके।

स्तनपान बच्चे के लिए कुदरत का एक अनमोल उपहार है, जो मां और बच्चे दोनों को पोषण और भावनात्मक लगाव प्रदान करता है। हालांकि, कई माताओं को इसको लेकर चुनौतियों और समाज में व्याप्त भ्रांतियों का भी सामना करना पड़ता है, जिसके कारण उन्हें बच्चे को स्तनपान कराने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इन मुद्दों का समाधान करना और इसको लेकर आवश्यक जानकारी और सहायता प्रदान करना बहुत ही आवश्यक एवं महत्वपूर्ण है।

भ्रांतियों को दूर करना होगा

स्तनपान को लेकर उचित जानकारी, सहायता की कमी तथा भिन्न-भिन्न प्रकार की भ्रांतियों के कारण महिलाओं के लिए बच्चे को स्तनपान कराना आसान नहीं होता। ये कारण उन्हें बच्चों को स्तनपान कराने के लिए हतोत्साहित करती है, इस वजह से बहुत सारे बच्चे आवश्यक पोषण से वंचित रह जाते हैं। एक प्रचलित भ्रांति है कि बच्चों को स्तनपान कराना हर मां के लिए आसान और स्वाभाविक है, जो कि सही नहीं है। बच्चे को स्तनपान कराने के लिए मां और बच्चे दोनों को अभ्यास और सहायता की आवश्यकता होती है। फॉर्मूला फीडिंग या बोतल बंद दूध को लेकर भी मान्यता है कि यह बच्चों के लिए मां के दूध के समान ही लाभकारी है, जो कि बिल्कुल गलत है।

सच्चाई यह है कि मां का दूध बच्चे के लिए सर्वोपरि है, क्योंकि मां के दूध से न केवल बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता और मानसिक क्षमता का विकास होता है, बल्कि उन्हें भरपूर पोषण भी मिलता है। मां का दूध शिशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए भी एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करता है। एक धारणा यह भी है कि जन्म के तुरंत बाद नवजात को मां से अलग कर देना चाहिए, ताकि मां को आराम मिल सके। जबकि हकीकत यह है कि जन्म के पहले घंटे के अंदर मां का स्पर्श और स्नेह नवजात के शरीर को गर्म रखने और मां के साथ भावनात्मक लगाव पैदा करने के लिए जरूरी है। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि गर्मी के दिनों में शिशु को स्तनपान के साथ पानी या अन्य तरल पदार्थ देना चाहिए, ताकि उनकी पानी की जरूरतों को पूरी की जा सके, लेकिन सच यह है कि बच्चे को मां के दूध के अलावा और किसी चीज की जरूरत नहीं होती है। एक मान्यता यह भी है कि कामकाजी माताएं व्यस्तता के चलते बच्चों को दूध नहीं पिला सकती, जबकि यदि परिवार के सदस्यों या स्वास्थ्य कर्मियों का सहयोग मिले तो देखभाल कर्ता के सहयोग से मां का दूध निकालकर और उसे अच्छी तरह संग्रहित करके रखा जा सकता है और मां की अनुपस्थिति में भी बच्चे को पिलाया जा सकता है। इसके अलावा, और भी बहुत सारे भ्रम और धारणाएं स्तनपान को लेकर हैं, जिन्हें समय रहते दूर करने की आवश्कता है, ताकि माताएं सही जानकारी के द्वारा बिना किसी भ्रांति और संदेह के अपने बच्चे को उसका सर्वोत्तम आहार प्रदान कर सकें।

बच्चों के लिए सुनहरा पल

बच्चे के जन्म के पहले एक घंटे को गोल्डन ऑवर या सुनहरा पल कहा गया है, क्योंकि इस एक घंटे के अंदर बच्चे को स्तनपान कराना काफी महत्वपूर्ण और आवश्यक है। यूनिसेफ तथा डब्ल्यूएचओ, माताओं को इस बात के लिए प्रोत्साहित करता है कि जन्म के पहले एक घंटे के दौरान बच्चे को जरूर स्तनपान कराना चाहिए तथा अगले छह माह तक बच्चे को स्तनपान के अलावा कुछ नहीं देना चाहिए। इसके अलावा, छह माह के बाद मां के दूध के साथ-साथ बच्चे को उपरी आहार देना शुरू करना चाहिए और दो साल तक बच्चे को स्तनपान जारी रखना चाहिए। ऐसा करने से बच्चे को न केवल भरपूर स्वास्थ्य और पोषण मिलेगा, बल्कि उसे कई बीमारियों से सुरक्षा भी मिलेगी। 

माताओं को कई लाभ मिलते हैं

स्तनपान से माताओं को कई लाभ मिलते हैं। बच्चों को स्तनपान कराने से मां के अंदर ऑक्सीटोसिन नामक हार्मोन रिलीज होता है, जो मां और बच्चे के बीच बांडिंग बढ़ाने का काम करता है। बच्चे को स्तनपान कराने से माताओं में कुछ खास किस्म की कैंसर और डायबिटिज जैसी बीमारियों के विकसित होने की संभावना भी कम हो जाती है। इसके अलावा, यह फार्मूला फिडिंग की तुलना में समय और पैसे की भी बचत करता है और बच्चे के लिए एक सुविधाजनक तथा हमेशा उपलब्ध रहने वाला भोजन का स्रोत उपलब्ध कराता है। ये सारे लाभ माताओं को अपने शिशुओं के साथ जुड़ाव को मजबूत करने के साथ-साथ मां और बच्चे के स्वास्थ्य एवं बेहतरी को भी सुनिश्चित करने में अहम भूमिका अदा करते हैं। 
लेकिन दुर्भाग्यवश, स्तनपान के इतने सारे प्रमाणित लाभों के बावजूद, दुनिया भर में लाखों बच्चों को जन्म के पहले छह महीने के दौरान विशेष रूप से स्तनपान नहीं कराया जाता है, जो कि उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। यह इस बात को अनुभव करने का सही समय है कि माताओं को अपने नवजात शिशु के पालन-पोषण की यात्रा में अपने परिवार के साथ-साथ कार्यस्थलों और समाज के सहयोग और समर्थन की भी आवश्यकता है।

समावेशी सहयोग की जरूरत
बच्चे को स्तनपान कराने में सहयोग के लिए मां को परिवार के सदस्यों के साथ-साथ विशेष रूप से जीवनसाथी के सहयोग और समर्थन की भी आवश्यकता होती है। वे घर के कामों और बड़े बच्चों की देखभाल में सहयोग प्रदान करके अपनी भूमिका अदा कर सकते हैं, ताकि मां अपने बच्चे को स्तनपान कराने पर ध्यान केंद्रित कर सके और उसे पर्याप्त आराम मिल सके। कामकाजी माताओं के लिए स्तनपान के अनुकूल कार्यस्थल बनाना भी महत्वपूर्ण है। इसके लिए नियोक्ताओं को काम के घंटों में लचीलापन तथा घर से काम करने के विकल्प और स्तनपान कक्ष की सुविधा प्रदान करने चाहिए। बच्चे के जन्म के बाद देखभाल के लिए पेड लीव तथा काम के दौरान स्तनपान के लिए अतिरिक्त समय प्रदान करना भी महत्वपूर्ण हैं।
बच्चे को स्तनपान कराने में सहयोग प्रदान करने में समुदाय की अहम भूमिका है। समुदाय इसके लिए समाज में एक सकारात्मक तथा उत्साहजनक वातावरण पैदा करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। स्वयंसेवी संगठन तथा स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता भी स्तनपान अभियान का आयोजन करके तथा इसके महत्व एवं आवश्यकता के बारे में जागरूकता पैदा करके समाज में इसको लेकर स्वीकृति और सहयोग को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका अदा कर सकते हैं। स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी माताओं को इस हेतु प्रभावी ढंग से सहयोग करने हेतु प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। सार्वजनिक स्थलों पर बच्चे को स्तनपान कराने के लिए व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि माताएं सुविधा जनक तरीके से स्तनपान करा सकें।
यूनिसेफ अपने कार्यक्रमों तथा पहलों के माध्यम से स्तनपान का सक्रिय रूप से समर्थन करता है। निश्चित रूप से हमारा यह सामूहिक प्रयास सभी बच्चों के लिए एक अधिक स्वस्थ एवं समतापूर्ण भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा।

डॉ. कनीनिका मित्र यूनिसेफ झारखंड की प्रमुख हैं एवं आस्था अलंग यूनिसेफ झारखंड की कम्यूनिकेशन स्पेशलिस्ट हैं।