जलदूत बने असम के युवा
जल जीवन मिशन का कर रहे नेतृत्व
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मोरीगांव जिले के ताराबोरी गांव में फरवरी की एक सुबह नौंवी कक्षा के अभिजीत पातर ने अपने चाचा को पानी का व्यर्थ इस्तेमाल करने से रोका। अभिजीत ने जब अपने चाचा को बाइक धोने के लिए पाइप्ड वाटर सप्लाई का इस्तेमाल करते देखा तो उन्हें बिना किसी हिचकिचाहट के बीच में रोककर समझाया।
अपने चाचा को समझाते हुए सुचित ने कहा, “यह पानी पीने और घर के कामों के लिए है चाचा! सरकार सभी को पानी मुहैया कराने के लिए हर किसी को 55 लीटर पानी ही देती है।”
अभिजीत पातर, नौवीं कक्षा का छात्र
पानी व्यर्थ होने से बचाने के लिए समय रहते लिया गया अभिजीत का फैसला असम में चलाये जा रहे जलदूत मिशन के प्रभाव को दर्शाता है। जल जीवन मिशन एक ऐसी पहल है जो स्कूली छात्रों को सुरक्षित जल, स्वच्छता और सफाई के लिए सशक्त बनाती है।
पातर भी असम के 3 लाख जलदूतों (जल चैंपियनों) में से एक हैं, जो 7000 जलशालाओं में प्रशिक्षित युवा स्वयंसेवक हैं। इन जलदूतों का प्रयास एकसाथ मिलकर सुरक्षित जल, स्वच्छता और जल स्वच्छता जैसी अच्छी प्रथाओं को समाज को बढ़ाव देना है।
पारंपरिक तरीकों के इतर अब ये बच्चे जलदूत बनकर अपने स्कूल, घर और समाज में लोगों को जागरूक करते हैं। जलदूत कार्यक्रम के जरिए असम प्रदेश में सात हजार स्कूलों बच्चों को प्रशिक्षण देकर जलदूत बनाया गया है, ताकि हर घर स्वच्छ पानी पहुंच सके। ये बच्चे घर घर जाकर घरेलू पानी का उपयोग, नल कनेक्शन हर चीज का आंकलन करके जमीनी स्तर पर बदलाव कर सकें।
19 मई 2023 को असम में शुरू की गई इस पहल ने जल संकट को दूर करने में अहम भूमिका निभाई। यूनिसेफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के 718 जिलों में से दो-तिहाई भूजल की कमी का सामना कर रहे हैं। 2019 में शुरू किए गए जल जीवन मिशन का उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाना है। असम का जलदूत मॉडल ने साबित किया कि स्कूली छात्रों और युवाओं को अभियान में शामिल करके जन भागीदारी को बढ़ाया जा सकता है।
असम के मोरीगांव जिले में ही 1534 जलदूत मिशन के लिए सक्रीय रूप से कार्य कर रहे हैं। JJM मिशन से पहले जिले के स्थानीय निवासी ट्यूबवेल या खुले कुओं के पानी पर ही निर्भर थे, जो अक्सर बाढ़ और तेज बारिश में दूषित हो जाते या डूब जाते थे। जिनका पानी पीने से बच्चों-बुजूर्गों को गंभीर बीमारियां होने का खतरा बना रहता था। लेकिन, अब पातर जैसे जलदूतों ने समुदाय के लोगों को सुरक्षित पीने योग्य पानी मुहैया कराने के साथ-साथ बीमारियों के प्रति जागरूक भी किया है।
"मैंने पहले कभी सुरक्षित पेयजल के बारे में नहीं सोचा था, अब मैं समझता हूं कि दूषित पानी पीने से डायरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियां हो सकती हैं। अब मैं अपने माता-पिता और पड़ोसियों को भी इसके प्रति जागरूक करता हूं।"
अभिजीत पातर
मोरीगांव में जेजेएम के जिला समन्वयक मोहिदुल इस्लाम, शिक्षा और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रशिक्षकों के सहयोग से जलशालाओं और जल अड्डों की देखरेख के लिए जलदूतों को संगठित करते हैं।
“जलदूत अपने व्यवहार से समाज में परिर्वतन ला रहे हैं। पहले लोगों में जल सुरक्षा के प्रति जागरूकता नहीं थी। जब से जलदूतों ने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाया है, ग्रामीण टेस्टिंग किट (एफटीके) से अपने घरों में पानी का परीक्षण करने लगे हैं।”
मोहिदुल इस्लाम, JJM जिला समन्वयक, मोरीगांव
अक्टूबर 2023 से ताराबोरी हाई स्कूल में 40 जलदूतों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। पातर और उसी स्कूल के एक अन्य जलदूत नबज्योति सैकिया को उनके उत्कृष्ट सामुदायिक योगदान के लिए जिला आयुक्त कार्यालय, मोरीगांव में सम्मानित किया गया। विज्ञान शिक्षिका और स्कूल की जेजेएम नोडल अधिकारी अपलाका देवी ने व्यावहारिक शिक्षण दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला।
"प्रशिक्षण के दौरान हमने सबसे पहले अपने स्कूल में छात्रों को पानी का परीक्षणकरना सिखाया। जो छात्र सत्र में भाग नहीं ले पाए, उन्हें बाद में जलदूतों ने प्रशिक्षित किया।इन छात्रों ने फिर अपने समुदायों को नए पाइप कनेक्शन को स्वच्छ बनाए रखने और पानी का जिम्मदारी से उपयोग करना सिखाया।"
अपलाका देवी, विज्ञान शिक्षिका और स्कूल की जेजेएम नोडल अधिकारी
जलदूत कार्यक्रम का प्रभाव मोरीगांव से आगे तक फैला हुआ है। लखीमपुर जिले में 2586 जलदूत मौसमके बदलाव की स्थितियों जैसे मानसून में बाढ़ और सर्दियों में सूखे के बावजूद JJM की सफलता सुनिश्चित कर रहे हैं। आज, जिले के 80% ग्रामीणों के घरों में पाइप से पानी आ रहा है, जलदूत पाइप जलापूर्ति योजनाओं (PWSS) की निगरानी कर रहे हैं और जल मित्रों (पंप ऑपरेटरों) के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
“हमारे जिले में JJM ने तेजी से प्रगति की है, और इसका सारा श्रेय जलदूतों को जाता है। वे PWSS संचालन का निरीक्षण करते हैं, घर-घर जाकर पानी की शुद्धता की जाँच करते हैं। वे पीने के पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए FTK महिला समूहों के साथ मिलकर काम करते हैं। हालाँकि यहाँ भूजल में कमी कोई बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन रासायनिक मापदंडों में उतार-चढ़ाव के कारण बार-बार जाँच जरूरी हो जाती है। पानी के इन बदलावों की निगरानी का जिम्मा जलदूतों का है। जैसे आयरन का स्तर अधिक है, और TDS (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स) का स्तर कम है, इसके लिए निरंतर निगरानी की जरूरत होती है। JJM का लक्ष्य सिर्फ़ भूजल तक पहुँच बनाना नहीं है, बल्कि हर घर के लिए BIS (भारतीय मानक ब्यूरो) के अनुरूप पीने का पानी सुनिश्चित करना है।”
छत्र प्रसाद पथौरी, जिला समन्वयक, लखीमपुर
बिहपुरिया के रौमोरिया गांव में खोरा हायर सेकेंडरी स्कूल की 15 वर्षीय छात्रा सारंगा सैकिया को 2023 में जिला स्तरीय जेजेएम कार्यक्रम में "सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जलदूत" की उपाधि मिली।
"हमने सितंबर में एक जलशाला में भाग लिया, जहाँ हमने सामुदायिक स्वयंसेवकों के रूप में प्रशिक्षण लिया और जल प्रश्नोत्तरी में भाग लिया। शुरू में, ग्रामीणों को अलग से नल के पानी के कनेक्शन अपनाने के लिए राजी करना मुश्किल था, क्योंकि लोग पारंपरिक कुओं के पानी पर निर्भर थे और उन्हें JJM जरूरी नहीं लगा। लेकिन जब हमने उन्हें समझाया कि JJM मानकीकृत सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करता है, तो वे हमारे सहायक बन गए।"
15 वर्षीय सारंगा सैकिया
असम के द्वीपीय जिले माजुली में लगातार बाढ़ के कारण जल स्रोतों के दूषित होने के कारण पानी की चुनौती गंभीरहो चुकी है। इन बाधाओं के बावजूद 702 जलदूतों ने जिले में 90% जल जीवन मिशन कवरेज हासिल किया है। माजुली की जलदूत सीमा बोरा ने इस बदलाव के बारे में विचार साझा किए।
"लोगों को एहसास नहीं था कि पानी की गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव भी होता है। अब गांव के लोग सक्रिय रूप से अपने पानी का परीक्षण करते हैं और किसी भी समस्या का समाधान करते हैं।"
माजुली में जल जीवन मिशन के जिला समन्वयक अलकेश गोगोई ने समुदाय के नजरिए में बदलाव को देखा। "शुरू में हिचकिचाने वाले ग्रामीण अब सुरक्षित पाइप से पीने के पानी के लाभों को पहचानते हैं और मिशन का समर्थन करते हैं।"