क्या स्कूल बसों में किसी की जिन्दगी बदल सकती है?

स्कूल से लगभग बाहर होने के बाद, 16 वर्षीय विनीता की किस्मत उसके दोस्तों की तरह ही चल रही थी, जिन्होंने जल्दी शादी कर ली। लेकिन स्कूल बस में एक सीट ने उसकी जिंदगी बदल दी ...

नेहा छेत्री
Vinita riding an auto with her school mates.
UNICEF India
25 अप्रैल 2018

झारखंड के गिरिडीह जिले की विनीता के गाँव में, स्कूल कम ही नहीं बहुत दूर हैंभी थे। कई बच्चों को शिक्षा पाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

Vinita walking in school.
UNICEF India

यह लड़कियों के लिए एक बड़ी समस्या है। जैसे-जैसे वे किशोरावस्था में पहुँचती हैं, कुछ को  स्कूल जाने के समय पुरुषों और लड़कों द्वारा  ईव-टीजिंग काभी सामना करना पड़ता है जिसकी वजह से वे स्कूल से नाम कटवा लेती हैं। जो लड़कियाँ जल्दी स्कूल छोड़ देते हैं उनमें से कई की शादी भी हो जाती है जबकि उनकी उम्र बहोत कम होती है। गिरिडीह जिले का भारत में बाल विवाह की सबसे अधिक दर है, जहां 10 में से 6 लड़कियों की शादी 18 साल से पहले की जाती है। इस प्रकार, ये लड़कियां बेहतर शिक्षा और उज्ज्वल भविष्य का  अपना मौका खो देती हैं। विनीता उनमें से एक थी। ईव-टीजिंग का जब वो शिकार हुई उसने कसम खाई कि वह फिर कभी स्कूल नहीं जाएगी।

और फिर कुछ अनोखा हुआ! जागो फाउंडेशन के साथ साझेदारी से यूनिसेफनेझारखंड में इस जिले में 65 गांवों को 'बाल विवाह मुक्त' बनाने की दिशा में काम करना शुरू किया।

A girl child in classroom.
UNICEF India

इस कार्यक्रम की वजह से, विनीता, ममता जैसी युवा लड़कियां और कई अन्य अब विशेष वाहन में स्कूल सेघर और घर से स्कूल  सुरक्षित रूप से यात्रा करती हैं। यही नहीं वे एक अड़ोलेसेंट ग्रुप की सदस्य भी हैं - एक ऐसी जगह जहाँ वे अपने डर को साझा कर सकती  हैं, अपनी आशाओं और सपनों के बारे में बात कर सकती हैं और कराटे जैसे उपयोगी स्किल्स भी सीख सकती हैं।

यूनिसेफ वहाँ के स्थानीय समुदाय में लड़कियों को स्कूल में रखने के लाभों और बाल विवाह के खतरों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी काम कर रहा है।

”17 साल की ममता कहती हैंकि “पहले हमें समूहों में स्कूल जानापड़ता थाक्योंकि रास्ते में लड़के और पुरुष हमें परेशान करते थे। लेकिन अब हम अपने स्कूल और घर तक सुरक्षित पहुंच सकती हैं।  

अगर विनीता और ममता जैसी लड़कियां अपनी शिक्षा पूरी कर पाती हैं, तो उनके खुशहाल, बेहतर  नागरिक बनने की संभावना बढ़ जाती है। वे नर्स, वकील, शिक्षक और माताएं हो सकती हैं, जो अपने समुदायों और अपने देश में योगदान दे सकती हैं।