एआई (AI) के दौर को आकार दे रहे बच्चे और युवा

कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) अचानक से नहीं आई, यह ऐसे समय में सामने आई है, जब बच्चे और युवा पहले से ही डिजिटल दुनिया के सबसे सक्रिय उपयोगकर्ता, निर्माता और उसे आकार दे रहे हैं।

UNICEF
A young girl uses her phone while studying
UNICEF/UNI355755/Panjwani
19 मार्च 2026

दुनिया भर में बच्चे और युवा एआई टूल्स से सीख रहे हैं, डिजिटल कौशल विकसित कर रहे हैं, डेटा सिस्टम का हिस्सा बन रहे हैं और रोज़मर्रा की जिंदगी में एआई आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।

आज एआई यह तय कर रहा है कि बच्चे कैसे सीखते हैं, जानकारी और सेवाओं तक कैसे पहुंचते हैं, उनका मूल्यांकन कैसे होता है और उन्हें मौके कैसे मिलते हैं। यह भविष्य की बात नहीं है, बल्कि एआई (AI) हमारी आज की सच्चाई है।

इतनी तेज़ी से हो रहे बदलाव के बावजूद, एआई से जुड़ी वैश्विक नीतियाँ अभी भी इस बदलाव की गति से पीछे हैं। ग्लोबल एआई समिट में यूनिसेफ यह मांग कर रहा है कि एआई से जुड़ी नीतियों में हर स्तर पर बच्चों के अधिकारों को शामिल किया जाए। बच्चों और युवाओं को सिर्फ उपयोगकर्ता नहीं, बल्कि अधिकार रखने वाले और एआई सिस्टम के अहम हिस्से के रूप में पहचाना जाए।

तेजी से बदलती भूमिका

डिजिटल बदलाव के केंद्र में बच्चे और युवा हैं। दुनिया में हर तीन में से एक इंटरनेट उपयोगकर्ता 18 साल से कम उम्र का है। कई देशों में युवा नई तकनीकों को सबसे पहले अपनाते हैं और उनके इस्तेमाल के तरीके और ट्रेंड तय करते हैं।

लेकिन, डिजिटल दुनिया की एक सच्चाई यह भी है कि यहां कोई समानता नहीं है। कई बच्चों के पास सीमित संसाधन हैं। वे साझे मोबाइल और कम इंटरनेट स्पीड में काम करते हैं या ऐसी भाषाओं में प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करते हैं जो उनकी अपनी भाषा नहीं होती।

अगर एआई (AI) सिस्टम इन वास्तविकताओं को ध्यान में रखकर नहीं बनाए गए, तो वे बड़े स्तर पर भेदभाव और असमानता को और बढ़ा सकते हैं। वहीं, अगर सिस्टम बच्चों और युवाओं को ध्यान में रखकर बनाए जाएं, तो वे ज्यादा भरोसेमंद, उपयोगी और लंबे समय तक टिकाऊ साबित हो सकेंगे।

सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चे और युवा सिर्फ एआई के उपयोगकर्ता नहीं हैं। वे सीखने वाले, नवाचार करने वाले और योगदान देने वाले भी हैं। वे एआई सिस्टम को टेस्ट कर रहे हैं, कंटेंट और डेटा बना रहे हैं और नए समाधान तैयार कर रहे हैं। यानी वे पहले से ही एआई के विकास को प्रभावित कर रहे हैं।

अब ज़रूरत है सोच बदलने की

बच्चों और युवाओं की इस भूमिका को समझने के लिए हमें एआई के शासन (गवर्नेंस) को नए तरीके से समझना होगा।

“चाइल्ड-राइट्स-बाय-डिज़ाइन” यानी शुरुआत से ही बच्चों के अधिकारों को ध्यान में रखकर एआई बनाना जरूरी है। बच्चों के अधिकार, उनकी सुरक्षा, गोपनीयता, भागीदारी और विकास ऑनलाइन दुनिया में भी उतने ही जरूरी हैं जितने ऑफलाइन दुनिया में।

अगर नीतियाँ बच्चों को सिर्फ जोखिम या भविष्य के लाभार्थी मानकर बनाई जाती हैं, तो वे इस वास्तविकता को नजरअंदाज करती हैं।

इसका मतलब है कि एआई सिस्टम बनाते समय यह देखा जाए कि उनका बच्चों की पहुंच, समानता, डेटा सुरक्षा और भविष्य पर क्या असर पड़ेगा। साथ ही, ऐसे सिस्टम बनाए जाएं जो हर तरह के सामाजिक और तकनीकी हालात में काम कर सकें, न कि सिर्फ आदर्श परिस्थितियों में।

भागीदारी, पारदर्शिता और भरोसा

यह भी जरूरी है कि बच्चों और युवाओं को उनकी उम्र और जरूरतों के अनुसार एआई सिस्टम को समझने, जांचने और उसमें अपनी भूमिका निभाने का मौका मिले।

पारदर्शिता और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। बच्चों, युवाओं और उनके परिवारों को यह समझ आना चाहिए कि एआई कब और कैसे इस्तेमाल हो रही है, फैसले कैसे लिए जा रहे हैं और अगर कोई समस्या हो तो समाधान के क्या रास्ते हैं।

साथ ही, एआई सिस्टम को इस तरह डिजाइन करना जरूरी है कि वे अलग-अलग परिस्थितियों में भी काम कर सकें, न कि केवल आदर्श परिस्थितियों के लिए। स्पष्ट जानकारी और नीतियां टेक्नोलॉजी में बाधा नहीं, बल्कि भरोसा बनाने की नींव हैं।

नेतृत्व का सही समय

ग्लोबल एआई समिट एक बड़ा मौका है, जहाँ नीतियों को वास्तविकता के साथ जोड़ा जा सकता है।

अगर नेताओं के घोषणा पत्र में बच्चों और युवाओं को अधिकार रखने वाले, उपयोगकर्ता और योगदानकर्ता के रूप में स्पष्ट रूप से शामिल किया जाता है, तो यह उनकी भूमिका को सही मान्यता देगा।

यह किसी नए समूह को जोड़ने की बात नहीं है, बल्कि उस समूह को पहचानने की बात है जो पहले से ही इस बदलाव का हिस्सा है।

आगे के लिए सुझाव (Calls to Action)

एआई इम्पेक्ट समिट (AI Impact Summit 2026 के मौके पर, यूनिसेफ इंडिया का सुझाव है कि एआई से जुड़े फैसलों में बच्चों और युवाओं को केंद्र में रखा जाए:

  1. नेताओं को बच्चों और युवाओं को एआई सिस्टम के प्रमुख हितधारकों के रूप में मान्यता देनी चाहिए।
  2. सुरक्षित, उम्र के अनुसार अनुकूल एआई विकसित करने का संकल्प लेना चाहिए, जो बच्चों की भागीदारी को बढ़ावा दे। इसके साथ मजबूत डेटा सुरक्षा, पारदर्शिता, मानवीय निगरानी और शिकायत के समाधान की व्यवस्था होनी चाहिए।
  3. साथ ही, सभी बच्चों के लिए एआई तक समान पहुंच, एआई साक्षरता और कौशल विकास को बढ़ावा देना चाहिए।

बच्चे और युवा पहले से ही एआई के इस दौर को आकार दे रहे हैं। आज लिए गए फैसले तय करेंगे कि यह बदलाव एक समान, न्यायपूर्ण और भरोसेमंद भविष्य बनाएगा या फिर ऐसी असमानताएँ बढ़ाएगा जिन्हें बाद में बदलना बहुत मुश्किल होगा।

इसलिए जरूरी है कि हम आज ही सही दिशा चुनें, ताकि आने वाले समय हर बच्चे के लिए डिजिटल दुनिया में सुरक्षित, सशक्त और समान अवसरों वाला हो।