हर बच्चे और परिवार तक पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ
भारत में पोषण और स्वास्थ्य हस्तक्षेपों की ज़मीनी हकीकत — राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण से मिली झलकियाँ
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Highlights
पोषण-विशेष हस्तक्षेपों का उद्देश्य पहले 1000 दिनों के दौरान महिलाओं और बच्चों के खाने, स्वास्थ्य और देखभाल के माहौल को बेहतर बनाना है। ये हस्तक्षेप गर्भावस्था, जन्म के बाद और शुरुआती बचपन तक फैलते हैं और इनमें भोजन व सूक्ष्म पोषक तत्व की पूरकता, पोषण शिक्षा और/या परामर्श, वृद्धि की निगरानी और प्रोत्साहन, साथ ही नियमित टीकाकरण, कृमिनाशन और बीमारी के दौरान देखभाल शामिल हैं। अगर इन हस्तक्षेपों की कवरेज 90% हो, तो ये स्टंटिंग में 20% और गंभीर वेस्टिंग में 61% कमी लाने में योगदान दे सकते हैं।[1].
भारत का स्वास्थ्य और पोषण नीति ढांचा मज़बूत है और इसमें ज़्यादातर प्रमाण-आधारित पोषण और स्वास्थ्य हस्तक्षेप शामिल हैं। दो बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रम – एकीकृत बाल विकास सेवाएं (ICDS) और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) – मिलकर इन हस्तक्षेपों को पूरे देश में लागू करते हैं। अब भारत के पोषण हस्तक्षेपों को विस्तार देने के प्रयासों को राष्ट्रीय पोषण मिशन (POSHAN Abhiyaan) से और भी मज़बूती मिली है।
यह डेटा नोट 2015-2016 और 2019-2021 की राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) से उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रमुख पोषण और स्वास्थ्य हस्तक्षेपों की कवरेज को दर्शाता है। हस्तक्षेपों की कवरेज का आकलन करने के लिए वैश्विक परिभाषाओं पर आधारित संकेतक बनाए गए और जहाँ ज़रूरी था, उन्हें भारतीय नीतिगत संदर्भ के अनुसार अनुकूलित किया गया।
इन संकेतकों की गणना के लिए 15-49 वर्ष की प्रजनन आयु की उन महिलाओं के आंकड़े लिए गए जिनके पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चे हैं और जिनका सबसे हालिया जन्म दर्ज किया गया है। संकेतकों की परिभाषाएँ इस नोट के परिशिष्ट 1 में दी गई हैं।