पोषण शक्ति नोट: समग्र राष्ट्रीय सर्वेक्षण से साक्ष्य आधार को मज़बूत करना
भारत में पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण की प्रचलन और बोझ — NAFS-5I (2019–21)
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Highlights
जीवनभर अच्छा स्वास्थ्य, पोषण और सुख-समृद्धि एक स्वस्थ और उत्पादक जीवन के लिए ज़रूरी आधार हैं। भारत में पाँच साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण का त्रि-स्तरीय बोझ देखा जाता है — माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी, अल्पपोषण, और तेजी से बढ़ता अधिक वजन/मोटापा।
बच्चों से आगे बढ़कर, देर बचपन और शुरुआती किशोरावस्था में पोषण और ऊर्जा की अधूरी जरूरतें उन्हें अल्पपोषण और माइक्रोन्यूट्रिएंट की कमी का अधिक शिकार बना सकती हैं, जबकि जरूरत से ज्यादा सेवन, अधिक वजन, मोटापा और गैर-संचारी रोगों (NCDs) का जोखिम बढ़ाता है। भारत में 5–19 वर्ष आयु समूह के 561 मिलियन बच्चे व किशोर देश की कुल जनसंख्या का लगभग एक-तिहाई (28.5%) हैं — और उनके लिए नीति एवं कार्यक्रम निवेश से सामाजिक व आर्थिक लाभ दोनों मिल सकते हैं।
2016 से पहले पोषण पर विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटा की कमी
2016 से पहले, सभी आयु वर्गों के बच्चों और किशोरों की पोषण स्थिति से जुड़ा पर्याप्त, व्यापक और विश्वसनीय राष्ट्रीय डेटा उपलब्ध नहीं था। प्रमुख समस्याएँ थीं:
- राष्ट्रीय सर्वेक्षण आमतौर पर महिलाओं, पाँच साल से कम बच्चों और 15–19 वर्ष के किशोरों तक सीमित थे। 5–14 वर्ष का पूरा आयु वर्ग लगभग शामिल ही नहीं था।
- माइक्रोन्यूट्रिएंट आकलन केवल आयरन और आयोडीन तक सीमित था।
- सर्वेक्षण विधियों में सटीकता की कमी थी—जैसे बीमारी का अनुमान लगाने के लिए परोक्ष मापों का उपयोग, याददाश्त आधारित आहार रिपोर्टिंग, सैंपलिंग में पक्षपात, और अलग-अलग सर्वेक्षणों में भिन्न तरीकों का उपयोग, जिससे तुलना करना मुश्किल हो जाता था।
- गैर-संचारी रोगों से जुड़े पोषण जोखिम-कारकों की जानकारी लगभग न के बराबर थी।