मासिक धर्म से जुड़ी वर्जनाओं को तोड़ना और कोविड उपयुक्त व्यवहार को बढ़ावा देना जारी रखेगा #RedDotChallenge
यूनिसेफ, किशोर लड़कियों, महिलाओं, भागीदारों और अधिवक्ताओं के साथ, एक ऐसी दुनिया की फिर से कल्पना करता है जहां प्राकृतिक मासिक धर्म के कारण कोई लड़की या महिला पीछे नहीं रहती है, और जहां अवधि गरीबी और कलंक इतिहास है।
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नई दिल्ली, 28 मई 2021: कोविड-19 महामारी की वजह से पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई जुड़ी स्वच्छता संबंधी चुनौतियां बढ़ गई हैं, जिसके कारण विशेष रूप से सबसे गरीब समुदायों की वंचित महिलाओं और बालिकाओं के स्वास्थ्य बुरा असर पड़ता है। इस बारे में जानकारी की कमी, मिथक व वर्जनाएं, पीरियड्स के दौरान साफ-सफाई के लिए जरुरी प्रोडक्ट्स तक सीमित पहुंच और खराब स्वच्छता अवसंरचना की वजह से भारत में महिलाओं और बालिकाओं के शैक्षिक अवसर, स्वास्थ्य और सामाजिक स्थिति पर गहरा असर पड़ रहा है।
यूनिसेफ, बालिकाओं, महिलाओं और अपने भागीदारों व समर्थकों के साथ मिलकर एक ऐसी दुनिया की परिकल्पना करता है जहां प्राकृतिक मासिक धर्म की वजह से किसी भी लड़की या महिला पीछे न छूट जाये, और जहां मासिक धर्म से जुड़े मिथक व वर्जनाएं न हो।
28 मई को मासिक धर्म स्वच्छता दिवस की शुरुआत के तीसरे साल, यूनिसेफ इंडिया सभी लोगों में सुरक्षा एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने हेतु #RedDotChallenge अभियान का नेतृत्व कर रहा है - जिसमें मासिक धर्म के दौरान जरुरी देखभाल और कोविड-19 का मुकाबला करना भी शामिल है। यह अभियान मशहूर हस्तियों और प्रभावशाली लोगों सहित सभी क्षेत्रों के लोगों को सोशल मीडिया के ज़रिए से इस मुद्दे पर आपनी बात रखने हेतु प्रोत्साहित करता है।
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ एनवायर्नमेंटल रिसर्च एंड पब्लिक हेल्थ के 'भारत में स्कूलों में मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता की तत्परता' (2020) के परिणामों में पाया गया कि आधी से भी कम लड़कियों को मासिक धर्म की उम्र से पहले मासिक धर्म के बारे में जानकारी थी। पूरे भारत में स्कूलों के बंद होने की वजह से लाखों बच्चों को भारी नुकसान हो रहा है, साथ ही पीरियड्स को कैसे मैनेज किया जाए, इसकी जानकारी भी बहुत कम ही है।
इसके अतिरिक्त, भारत में लड़कियां पर यूनिसेफ और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स के अध्ययन (2020) के रिसर्च से पता चलता है कि शहरी क्षेत्रों में गरीब घरों की लड़कियां मासिक धर्म के दौरान जरुरत की उचित स्वच्छता सुविधाओं से वंचित हैं, जिसमें हर दो में से एक लड़की अपने मासिक धर्म के दौरान पैसे की कमी की वजह से सैनिटरी नैपकिन या टैम्पोन का इस्तेमाल नहीं कर पाती।
कोविड-19 वैक्सीन को लेकर बांझपन और मासिक धर्म चक्र पर असर जैसे अफवाहों और फर्जी खबरों की वजह से भी काफी नुकसान पहुंच रहा है, हालांकि इस तरह की सूचनाओं का कोई सबूत नहीं है। मासिक धर्म से संबंधित गलत सूचना और मिथकों की वजह से महिलाएं और बालिकाएं मुफ्त टीकाकरण व स्वास्थ्य देखभाल जैसी जीवन रक्षक सेवाओं तक पहुंचने से वंचित नहीं रहनी चाहिए।
हर महीने मासिक धर्म के दौरान, कई लड़कियों को मासिक धर्म के पीछे के जैविक कारणों का पता नहीं होता है, और न ही वे अपने साथ अचानक होने वाले भेदभाव को समझ पाती हैं। भेदभाव और अलग रहने को मजबूर इन महिलाओं और बालिकाओं के पास अपने मासिक धर्म को गरिमा के साथ प्रबंधित करने हेतु सुरक्षित, स्वच्छ और किफायती साधन मौजूद नहीं होते हैं। यूनिसेफ के इस क्षेत्र में अनुभव कि वजह से यह बदल सकता है। सामुदायिक जागरूकता बढ़ाकर और मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई के लिए जरुरी प्रोडक्ट्स की आपूर्ति का समर्थन करके, इस सोच में बदलाव लाना संभव है।
यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि, डॉ. यास्मीन अली हक ने इस बारे में कहा कि, "मासिक धर्म को लेकर शर्म, गरीबी और मासिक धर्म के दौरान भेदभाव करने वाली सोच की वजह से महिलाओं और बालिकाओं के शारीरिक तथा मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। महामारी की वजह से सैनिटरी प्रोडक्ट्स की सीमित उपलब्धता और लॉकडाउन के कारण महिलाओं और बालिकाओं पर बढ़ते दबाव, गरीबी, और आवश्यक सेवाओं को पाने आ रही बाधाओं की वजह से आबादी के बड़े हिस्से पर प्रभाव पड़ा है और इससे चीजें बदतर हुई हैं। हमें इस बाधा को खत्म करना चाहिए और हर लड़की और महिला को सुरक्षित और गरिमा के साथ मासिक धर्म का प्रबंधन करने में मदद करनी चाहिए। यूनिसेफ महिलाओं और बालिकाओं तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए अपने भागीदारों के साथ काम कर रहा है और सभी से मासिक धर्म से जुड़ी इन हानिकारक मिथक व वर्जनाओं को तोड़ने और मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता प्रबंधन में निवेश बढ़ाने, मासिक धर्म स्वच्छता पर जागरूकता फैलाने और संबंधित आपूर्ति तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने हेतु साथ मिलकर काम करने का आह्वान करता है।
#RedDotChallenge अभियान का उद्देश्य सोशल मीडिया का इस्तेमाल डिजिटल इन्फ्लुएंसर Diipa Khosla की 'पोस्ट फॉर चेंज' पहल के सहयोग से सामाजिक बदलाव के लिए करना है। 28 मई को समाप्त होने वाले इस अभियान में कई मशहूर हस्तियां शामिल हो रही हैं और वो लाल निशान और मास्क के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट करके संदेश दे रही हैं। इस अभियान को Manushi Chillar और Jennifer Winget, Archita Sahu, Megha Gupta सी हस्तियों तथा अन्य युवाओं ने अपना समर्थन दिया है। Diipa Khosla, Masoom Minawala, और जूही गोडाम्बे जैसे कई अन्य डिजिटल इन्फ्लुएंसर ने भी इस अभियान का समर्थन किया है।
आज, यूनिसेफ और भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने सभी महिलाओं और बालिकाओं को मासिक धर्म के दौरान साफ-सफाई के लिए जरुरी अच्छी क्वालिटी के प्रोडक्ट्स मिलें, यह सुनिश्चित करने और इसके लिए मानदंड व मानक तय करना क्यों जरुरी है, इसपर चर्चा करने हेतु साझेदारी की है।
इसके अतिरिक्त, पूरे भारत में यूनिसेफ द्वारा मासिक धर्म स्वच्छता दिवस के दौरान ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और गुजरात में कई वेबिनार, प्रशिक्षण, पुस्तक विमोचन, प्रतियोगिताएं और परामर्श का आयोजन किया गया। महाराष्ट्र में, यूनिसेफ ने मुंबई, पुणे और नासिक के शहरी मलिन बस्तियों, गांवों और कोविड देखभाल केंद्रों में बालिकाओं, यौनकर्मियों, प्रवासियों और महिलाओं को 220,000 सैनिटरी पैड के वितरण का समर्थन किया है। स्वच्छता और सफाई के सुरक्षित तरीकों के बारे में लाखों लोगों तक इसका संदेश और समर्थन भी पहुंचाया जाएगा।
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