असम में बच्चे

असम की जटिल सामाजिक, राजनीतिक और भौगोलिक वास्तविकताओं ने प्रदेश में सभी बच्चों और महिलाओं के लिए समान और गुणवत्तापूण बाल विकास सेवाएँ उपलब्ध कराने की चुनौती बढ़ा दी है।

Health officials on their way to perform immunization program in a temporary health camp in Sand bar (Char area) near Tezpur Town.
UNICEF/UN0156547/Boro

चुनौती

पिछले दशक के दौरान काफी उल्लेखनीय सुधार हुए हैं जो असम के बच्चों के लिए उम्मीद जगाते हैं।

असम को आमतौर पर पूर्वोत्तर का प्रवेश द्वार कहा जाता है। यह अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा के साथ ‘सेवन सिस्टर्स’ राज्यों में से एक है, और बांग्लादेश और भूटान के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमाएँ साझा करता है। यह भारत का 14वाँ सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है, जिसके 33 जिलों में 3.55 करोड़ लोग रहते हैं।

असम में समतामूलक विकास का कार्यान्वयन अतिरिक्त जटिलताओं का सामना करता है, जिसमें इसका भूगोल, लगातार प्राकृतिक आपदाएँ, लंबे समय तक नागरिक संघर्ष, बड़ी ग्रामीण आबादी (राज्य के 81 प्रतिशत लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं), अलग-अलग संस्थागत शासन व्यवस्थाएँ (छह जिले स्वायत्त परिषदों द्वारा प्रशासित हैं) शामिल हैं।

जहाँ सेक्स अनुपात, शिशु और 5 वर्ष से कम के बच्चों की मृत्यु दरों, टीकाकरण और स्कूल नामांकन दरों में सुधार हुआ है, वहीं समग्र बाल अस्तित्व और बच्चों के खिलाफ हिंसा से संबंधित मुद्दे चिंता के प्रमुख विषय बने हुए हैं। 

यह राज्य बच्चों के लिए सरकार द्वारा तेजी से बजटीय आवंटन घटाने से बढ़ा है। 2007 में असम के बजट का लगभग 16.19 प्रतिशत बच्चों के लिए आवंटित किया गया था, लेकिन 2016 में यह हिस्सेदारी गिरकर केवल 6.01 प्रतिशत रह गयी है।

असम में व्यापक रूप से व्याप्त बाल विवाह, बाल श्रम और बाल तस्करी जैसी शोषणकारी प्रथाओं के साथ शारीरिक, भावनात्मक और यौन शोषण से बच्चों की सुरक्षा अभी भी एक गंभीर चुनौती बनी हुई है। बच्चों के खिलाफ अपराधों की घटनाएँ बढ़ रही हैं और उन बच्चों पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए जो दुर्व्यवहार की चपेट में हैं

 

दुर्व्यवहार की बढ़ती रिपोर्टिंग और सुप्रशिक्षित सेवा प्रदाताओं के साथ बच्चों के लिए सुरक्षित स्थानों के निर्माण के उद्देश्य से किया जा रहा हस्तक्षेप हर लड़की और हर लड़के के लिए स्थिति को सुधारने में एक लंबा फासला तय करेगा।

शिशु और मातृ मृत्यु दर में पर्याप्त कमी के बावजूद, असम अभी भी इन दोनों मोर्चों पर भारत का सबसे बड़ा योगदानकर्ता है। शहरी बच्चों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में 5 वर्ष से कम आयु में बच्चों की मृत्यु की संभावना 2.4 गुना अधिक है। 

शहरी क्षेत्रों में 5 वर्ष से कम आयु में मृत्यु दर 27 है जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह औसत 65 है और कुछ जिलों में 80 तक जाती है। राष्ट्रीय औसत से 100 अंक से अधिक की मातृ मृत्यु दर के साथ, गर्भवती माताओं के लिए स्थिति बहुत बेहतर नहीं है। किशोर गर्भधारण (13.6 प्रतिशत), बाल विवाह (32.6 प्रतिशत), कम परिवार नियोजन और प्रसवपूर्व देखभाल तक कम पहुँच स्थिति को और खराब कर देती है।

असम में सभी बच्चों के लिए स्वस्थ जीवन प्राप्त करने की क्षमता में एक गंभीर झटका टीकाकरण का कम कवरेज है। टीकाकरण कवरेज में वृद्धि सिर्फ दो फीसदी रही है। साक्ष्य उच्च ड्रॉप आउट दरों को भी इंगित करते हैं, यह दर्शाता है कि महज कवरेज से परे पर्याप्त चुनौतियाँ हैं।

एक तिहाई से अधिक बच्चे नाटे हैं—36.4 प्रतिशत। शहरी और उच्च धनाढ्य वर्ग के बच्चों में नाटेपन में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि से स्थिति की गंभीरता जाहिर होती है।

निम्न और उच्च प्राथमिक स्कूली बच्चों की बढ़ती प्रतिधारण दर के साथ शिक्षा में, विशेष रूप से प्राथमिक और प्राथमिक स्तरों पर, काफी प्रगति देखी गयी है। असम में लगभग 67,000 प्राथमिक विद्यालय स्थापित किए गए हैं। 

दिव्यांग क्षमताओं वाले लगभग 90,000 बच्चों को स्कूलों में मुख्यधारा में शामिल किया गया है, जबकि विशेषज्ञों और रिसोर्स पर्सन द्वारा लगभग 10,000 बच्चों को घर-आधारित शिक्षा उपलब्ध करायी गयी है। 

इस प्रगति के बावजूद असम में अभी भी 100,000 से अधिक बच्चे स्कूल से बाहर हैं। इसमें निम्न उपस्थिति, उच्च ड्रॉपआउट दर, शिक्षक की रिक्तियों की एक बड़ी संख्या और बजटीय आवंटन में कमी के मुद्दे जुड़ जाते हैं। इससे शिक्षा की गुणवत्ता और प्रसार में ठहराव आया है।

असम के बच्चों का भविष्य हितधारकों द्वारा बनायी नीतियों और निर्णयों में उन्हें दिये गये महत्व से जटिलता से जुड़ा हुआ है। जहाँ सरकार को रणनीतिक बजटीय आवंटन से लेकर सभी स्तरों पर सेवा प्रदाताओं की क्षमता बढ़ाने तक प्रभावी और टिकाऊ उपायों को अपनाना चाहिए। 

वहीं, खुद समुदायों, अभिभावकों और बच्चों द्वारा निभायी जाने वाली भूमिका को कमतर नहीं आँका जा सकता है। यदि असम के बच्चों को स्वस्थ और उत्पादक जीवन जीना है तो गुणवत्ता विकास सेवाओं की मांग की जानी चाहिए और जवाबदेही मांगी जानी चाहिए।

18 वर्ष से कम आयु की 41 प्रतिशत से अधिक आबादी के साथ, राज्य सरकार और उसके भागीदारों ने बच्चों और महिलाओं के लिए सेवाओं तक पहुँच बढ़ाकर और गुणवत्ता में सुधार करके सही दिशा में प्रगति की है। 

2016 में, असम सरकार ने सतत् विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को हासिल करने के रोडमैप के रूप में एक रणनीतिक विजन डॉक्यूमेंट ‘या असम 2030 – हमारे सपने, हमारी प्रतिबद्धता’ लॉन्च किया। 

जिसमें इस विजन का एक महत्वपूर्ण पहलू बाल विकास है। राज्य की प्रभावोत्पादकता उसके द्वारा किये गये व्यापक ढाँचागत विकास में प्रदर्शित हुई है, हालांकि ऐसा गुणवत्ता और सततता की कीमत पर हुआ है।

बच्चों के अधिकारों और कल्याण को आगे बढ़ाना यूनिसेफ हाशिए पर और दुर्गम समुदायों पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए हर बच्चे तक पहुँचने के लिए असम सरकार को समर्थन देता है।

यूनिसेफ, विशेष रूप से सर्वाधिक हाशिये पर खड़े और कमजोर बच्चों और किशोरों के सामाजिक और आर्थिक समावेशन पर प्रभावी नीतियों के विकास और कार्यान्वयन में समर्थन के लिए, और बाल अभावग्रस्तता में कमी करने को सुविधाजनक बनाने के लिए सरकारी प्रणाली और वित्तपोषण को मजबूत करने के लक्ष्य से 15 वर्षों से असम में काम कर रहा है। 

यूनिसेफ ने असम में बच्चों के स्वस्थ और समृद्ध विकास में सहायता करने वाली गुणवत्ता पूर्ण सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए राज्य और गैर-राज्य हितधारकों के साथ बहुमूल्य साझेदारी विकसित की है। हमारा काम बाल संरक्षण, शिक्षा, पोषण, स्वास्थ्य, पानी, स्वच्छता और हाइजीन (डब्लूएएसएच) और सामाजिक समावेशन पर केंद्रित है।

बच्चों के अधिकारों और कल्याण को आगे बढ़ाना

यूनिसेफ असम सरकार को हर बच्चे तक पहुँचने के लिए समर्थन देता है, जिसमें हाशिए पर और कठोर समुदायों तक विशेष ध्यान केंद्रित है।

इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की अपनी कोशिशों में, यूनिसेफ टिकाऊ समाधान बनाने के लिए कई तरह की रणनीतियों का इस्तेमाल करता है। हमारी दीर्घकालिक क्षेत्र उपस्थिति का मतलब है कि हमारे पास जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन और टिकाऊ नीति डिजाइन दोनों में तकनीकी विशेषज्ञता के साथ असम में एक अद्वितीय और लाभप्रद स्थिति है।

अनुभवजन्य डेटा का सृजन और बच्चों के लिए सार्वजनिक नीति को आकार देने में इसका प्रभाव एक सतत प्रयास रहा है। सरकार के विभिन्न स्तरों पर हितधारकों के साथ काम करते हुए, असम में यूनिसेफ ने सरकार के एजेंडे में बच्चों और महिलाओं के मुद्दों को सबसे आगे लाने के लिए व्यवस्थित प्रयास किये हैं।

असम पर यूनिसेफ का ध्यान परिवारों और समुदायों के बीच गुणवत्ता सेवाओं की मांग बनाने पर रहा है। बच्चों, अभिभावकों और सामुदायिक नेताओं के साथ व्यापक पहुँच वाले कार्यक्रमों और रणनीतिक हस्तक्षेपों के जरिये,बाल विकास मुद्दों में भागीदारी और सक्रियता में बढ़ती दर से वृद्धि हुई है।

यूनिसेफ एक ऐसे असम, जिसमें हर बच्चे को प्यार, सुरक्षा और अध्ययन, उत्कृष्टता और योगदान का अवसर मिलता है, के निर्माण के लिए नीति निर्माताओं, जनता, पेशेवर निकायों, नागरिक समाज, कॉरपोरेट्स, धार्मिक नेताओं, मीडिया, शिक्षाविदों, युवाओं, किशोरों और बच्चों का समर्थन जुटाता है।

पिछले 15 वर्षों से असम में यूनिसेफ की क्षेत्र उपस्थिति ने इसे राज्य में एक अद्वितीय और लाभकारी स्थिति पर कब्जा करने की अवसर दिया है। भारत सरकार द्वारा चिन्हित उच्च प्राथमिकता वाले जिलों में अग्रणी कार्यान्वयन भागीदार के रूप में, यूनिसेफ ने सरकार और नागरिक समाज संगठनों के साथ मजबूत साझेदारी स्थापित की है और असम में एक मजबूत क्षेत्र उपस्थिति विकसित की है।

असम में यूनिसेफ क्षेत्र कार्यालय के लिए हस्तक्षेप का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र संपूर्ण स्वास्थ्य प्रणाली में अनुभवजन्य डेटा का सृजन और महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य अधिकारों को प्राप्त करने और स्वास्थ्य प्रणाली ब्लॉक के क्षेत्र में अंतरों को भरने में अड़चन की पहचान करना और विस्तृत अंतर विश्लेषण का कार्य करना रहा है। 

इन हस्तक्षेपों ने यूनिसेफ को उन नीतियों को बनाने की अनुमति दी है जो अनुभवजन्य साक्ष्य द्वारा समर्थित हैं और वास्तविकता के धरातल पर हैं। इसके अलावा पोषण कार्यक्रमों की टिकाऊ नीति डिजाइन पर हमारा काम रहा है, जिसमें जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन भी शामिल है।

असम में शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी भागीदार, यूनिसेफ का लक्ष्य सभी बच्चों, विशेष रूप से सबसे वंचितों के लिए उपयुक्त ग्रेड स्तरों पर पढ़ने के परिणामों के साथ गुणवत्तापूर्ण बचपन और प्रारंभिक शिक्षा सुनिश्चित करना है। 

हमारे काम ने सभी स्तरों पर शिक्षकों के क्षमता निर्माण, उपयुक्त और नवाचारी पाठ्यक्रम और शिक्षणविधि के विकास, अंतर और अंतरा कार्यक्रम समन्वय और सार्वजनिक जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित किया है।

यूनिसेफ, विशेष रूप से सामुदायिक और सुविधा स्तर पर, खासकर लड़कियों समेत हाशिये पर खड़े समूहों के लिए टिकाऊ, सुरक्षित और सस्ती डब्लूएएसएच सेवाओं तक समान पहुँच और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार और नागरिक समाज के भागीदारों के साथ काम कर रहा है। हमारे समर्थन ने कार्रवाई के ढाँचे को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है जिसमें ढाँचागत विकास के साथ-साथ सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन शामिल हैं।

असम में बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक स्थापित तकनीकी विशेषज्ञ के रूप में, यूनिसेफ विभिन्न राज्यों के विभागों और नागरिक संगठनों के साथ मिलकर इन फैक्टर्स पर काम कर रहा है।

  • बाल सुरक्षा प्रणालियों को बेहतर बनाने पर।
  • सार्वजनिक वित्त तंत्र को मजबूत करने पर।
  • बाल संरक्षण कार्यबल के लिए क्षमता निर्माण करने पर।
  • बेहतर प्रशासन और जवाबदेही की पैरवी करने पर।
  • सूचित नीतिगत निर्णयों के लिए डेटा और साक्ष्यों के सृजन करने पर।
  • सांविधिक निकायों और बाल संरक्षण सेवाओं के बीच सहयोग को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है।

संसाधन

शौचालय बनाने से लेकर मल और कीचड़ के प्रबंधन तक

भारत में फीकल स्लज और सेप्टेज प्रबंधन के लिए यूनिसेफ और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की साझेदारी (2021–2024)

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यूनिसेफ और (LIXIL) की स्वच्छता व स्वास्थ्य पर अनोखी साझेदारी

भारत से बदलाव की कहानियाँ — बिहार और ओडिशा में Make a Splash! साझेदारी (2022–2024)

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भारत में स्वच्छता सेवाओं को बदलने की कोशिश

सुरक्षित, टिकाऊ स्वच्छता और सफाई कर्मचारियों की गरिमा की दिशा में आगे बढ़ते कदम

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