शिक्षा के साथ सबसे कमजोर आदिवासी छात्रों तक पहुँच रहा स्कूल संजोग

मनोरंजक तरीके से खेल-खेल में कमजोर आदिवासी बच्चों में शिक्षा की अलख जगा रहा 'स्कूल ऑन व्हील्स'

राधिका श्रीवास्तव
`School on Wheels’ reaches out to children from the particularly vulnerable tribal groups (PVTGs) with fun-based learning.
UNICEF India/Radhika Srivastava
15 नवंबर 2024

महामारी के कारण जब स्कूल बंद हुए तो हशिए पर रहने वाले आदिवासी समुदायों के छात्र ऑनलाइन कक्षाएं ज्वाइन नहीं कर सके। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले यह बच्चे महामारी का दौर खत्म होने और स्कूल दोबारा खुलने के बाद ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से कवर कराए गए पाठ्यक्रम में पीछे रह गये।

लंबे समय तक स्कूलों के बंद रहने से बच्चों में भी लर्निंग स्किल की कमी हो गई। नजीतन बच्चे पढ़ना-लिखना भूल चुके हैं। पढ़ाई सीखने के इस अंतर को पाटने के लिए ही यूनिसेफ ने कमजोर आदिवासी बच्चों के लिए संजोग पहल के तहत “स्कूल ऑन व्हील्स” शुरू किया है। जिसमें बच्चों को खेल-खेल में पढ़ना सीखाया जाता है।

वॉलीटियर्स 8 जिलों में 40,000 बच्चों तक पहुंचकर खुली हवा में कक्षाएं आयोजित करते हैं।

Engaging children in fun-filled learning activities in an open space.
UNICEF India/Radhika Srivastava

यूनिसेफ के साथ ओडिसा सरकार व शिक्षा विभाग से चलाया जा रहा स्कूल संजोग एक वैन या बाईक पर चलता फिरता स्कूल है। जो अपने साथ ऑडियो-विजुअल टूल, किताबें, विज्ञान किट, खेल किट, और स्वच्छता शिक्षा किट जैसी बच्चों की शिक्षण सामग्री से सुसज्जित होकर उन एरिया में पहुंचता है, जहां बच्चों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उन्हें पढ़ना लिखना सिखाना जरूरी है।

यूनिसेफ के साथ भागीदार एनजीओ भारत ज्ञान विज्ञान समिति के प्रशिक्षित वॉलीटियर्स स्वयं बच्चों को खुली जगह में ले जाकर उन्हें खेल-खेल में पढ़ना सिखाते हैं। लूडो, सांप-सीढ़ी जैसे मजेदार खेलों से बच्चों की गणित में दिलचस्पी बढ़ाते हैं, तो एनिमेटेड फिल्मों से सीखी गई शब्दावली बच्चों के लिए यादगार बन जाती है और गानों से तालिकाओं को याद करना आसान हो जाता है।

क्योंझर जिले के हरिचंदनपुर में जुंगा प्राइमरी स्कूल के छात्रों को स्कूल संजोग की पढ़ाई मजेदार लगती हैं और ये बच्चे रोजना अब इस पहियों पर चलने वाले स्कूल का उनके द्वार तक पहुंचने ता इंतजार करते हैं।

पुलिस फोर्स में अधिकारी बनने का सपना देखने वाली चौथी कक्षा की प्रतिभा कहती है कि, “यह गाड़ियों में चलने वाला स्कूल बिल्कुल स्कूल जैसा ही है, लेकिन यह स्कूल से ज्यादा मजेदार है। यहां मुझे हर बार कुछ नया सीखने को मिलता है।''

 

School Sanjog
UNICEF India/Radhika Srivastava

ओडिशा के क्योंझर जिले के हरिचंदंपुर के जुंगा प्राइमरी स्कूल में तीसरी कक्षा की छात्रा सुभास्मिता नायक बताती हैं कि, “मुझे एनिमेशन कहानियाँ पसंद हैं। मैं इन कहानियों से नए शब्द सीखती हूं और इन्हें समझना आसान होता है,'' वह बताती है कि, "मैं अपने स्कूल के दोबारा खुलने और अपने दोस्तों से मिलने का बेसब्री से इंतजार कर रही हूं।"

संजोग स्कूल को खेल-खेल में बेसिक शिक्षा और संख्यात्मक दक्षता को यादगार अनुभव के साथ सीखने के नए तरीके खोलने के लिए डिजाइन किया गया है। स्कूल संजोग कार्यक्रम बच्चों के स्वास्थ्य, शिक्षा, व्यक्तिगत स्वच्छता और समग्र कल्याण पर जागरूकता पैदा करने का भी प्रयास करता है। प्रत्येक सत्र में बच्चों को प्रैक्टिक तरीके से हाथ धोने का सही तरीका सिखाया जाता है।

गांव की एक दादी कस्तूरी जिनका पोता संजोग स्कूल में जाता है, उन्होंने बताया कि, “बच्चे गांव में बेसब्री से स्कूल संजोग टीम के गांव में आने का इंतजार करते हैं। वे अपनी स्कूल की पोशाक पहनते हैं, और अपनी किताबें तैयार करते हैं। हम देख सकते हैं कि बच्चे फिर से पढ़ाई में रुचि ले रहे हैं।” 

Children walk to school
UNICEF India/Radhika Srivastava

स्कूल संजोग में रोजाना पढ़ना सीखने आने वाले और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की जांच के लिए एक तरीका अपनाया गया है। स्कूल संजोग में वॉलिटियर्स गांव के ही बुजुर्ग होते हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि हर बच्चा स्कूल में पढ़ना सीखने पहुंचे। जिससे पढ़-लिखकर उनकी छोटी उम्र में शादी न हो और न ही उन्हें बालश्रम में धकेला जाए। स्कूल संजोग का मकसद बच्चों को भावनात्मक रूप से मजबूत बनाना और स्कूल खुलने पर उनकी पढ़ाई के गैप को पुरा करना है। 

क्योंझर जिले के हरिचंदनपुर ब्लॉक के एक युवा वॉलिटियर चैतन्य जंगा ने बताया कि, “हम खासतौर पर सबसे वंचित आदिवासी समुदायों के साथ काम करते हैं, क्योंकि हम चाहते हैं कि इन बच्चों को दोबारा स्कूलों में जाकर मुख्यधारा से जुड़ने का उचित मौका मिले।”