मासिक धर्म पर चर्चा कर वर्जनाओं को तोड़ते पुरुष
ऐसा गांव में जहां मासिक धर्म के बारे में बात करना भी वर्जित समझा जाता था, अब बसंत अपनी बेटियों को सैनिटरी नैपकिन खरीदने की जरूरत पड़ने पर खुशी-खुशी मदद करते हैं
- English
- हिंदी
मिर्ज़ापुर, भारत: यूनिसेफ मासिक धर्म पर चुप्पी तोड़ने और महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा पर बातचीत में पुरुषों को शामिल करने की आवश्यकता को पहचानता है। मिर्ज़ापुर में, बसंत लाल जैसे पुरुष बदलाव की किरण बन गए हैं, जो भेदभावपूर्ण प्रथाओं के खिलाफ खड़े हैं जो लड़कियों और युवा महिलाओं को जीने से रोकते हैं।
45 साल के बसंत ने अपने गांव में उदाहरण पेश किया है, जहां वह अपने नौ बच्चों और पत्नी के साथ एक फूस के घर में रहते हैं। कम उम्र में शादी होने के कारण, बसंत पर उनके परिवार के सदस्यों ने दबाव डाला कि जब तक उन्हें बेटा न हो जाए, तब तक बच्चे पैदा करते रहें। उनके पहले और इकलौते बेटे के जन्म से पहले, उनकी आठ बेटियाँ थीं।
"मैं केवल तीन बच्चे पैदा करना चाहती था। इससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता था कि वे लड़के हों या लड़कियाँ, लेकिन फिर मैंने भी सामाजिक दबाव के आगे घुटने टेक दिए।"
पेड़ों और भैंसों से घिरे हुए, उनकी बेटियों को घर के अंदर और बाहर, उनके छोटे से आंगन में दौड़ते हुए देखा जा सकता है। दिहाड़ी मजदूर बसंत उस समय गर्व से भर जाता है जब वह बताता है कि न्यूनतम आय होने के बावजूद वह अपनी सभी बेटियों को शिक्षा मुहैया कराने की कोशिश कर रहा है।
"मेरी सभी बेटियों को स्कूल भेज दिया गया है। ताकि वे अपना ख्याल रख सकें और अपनी आजीविका कमा सकें, मैं उनकी शिक्षा का समर्थन करने और बेहतर भविष्य के लिए उन्हें अच्छा खाना खिलाने का निश्चय करता हूं। मैं वयस्क होने से पहले उनकी शादी नहीं कर सकता।" यह उनके स्वास्थ्य और संभावनाओं को बर्बाद कर देगा,'' वे कहते हैं।
बसंत लाल का मानना है कि उनकी बेटियों को शिक्षित करने से वे स्वतंत्र हो गई हैं और घर की देखभाल या आवश्यक काम-काज का बोझ कम हो गया है।
बसंत हमेशा अपने गांव में महिलाओं के साथ होने वाले लैंगिक भेदभाव के खिलाफ खड़े रहे। लेकिन यूनिसेफ द्वारा आयोजित एक प्रशिक्षण में भाग लेने के बाद, बसंत ने भी महिलाओं के मासिक धर्म पर प्रतिबंध को समझना शुरू कर दिया और अब इसके बारे में मुखर हैं।
वह मासिक धर्म वाली महिलाओं पर लगाए गए सभी स्थानीय प्रतिबंधों को खारिज करते हैं।
“पहले के समय में, लोग ज्यादातर स्वच्छता संबंधी चिंताओं के कारण मासिक धर्म वाली महिलाओं को रसोई में प्रवेश करने की अनुमति नहीं देते थे। इसलिए, मैं अपनी बेटियों और पत्नी को हमेशा स्वच्छता पर ध्यान देने और स्वच्छ रहने के लिए प्रोत्साहित करता हूं,”
बसंत लाल कहते हैं उनकी किसी भी बेटी को मासिक धर्म के दौरान स्कूल छोड़ने के लिए नहीं कहा गया या उन्हें किसी भी जगह तक जाने से प्रतिबंधित किया गया।
बसंत की बेटी प्रिया देवी, जो अब 21 साल की है, जॉनसन एंड जॉनसन द्वारा समर्थित यूनिसेफ की एक परियोजना के लिए मासिक धर्म स्वास्थ्य प्रबंधन पर एक सहकर्मी शिक्षक बन गई। बसंत ने उसे प्रोत्साहित किया और अपनी बेटियों की बेहतर देखभाल करने के लिए महिलाओं के स्वास्थ्य के बारे में जानने के लिए उत्साहित था।
यूनिसेफ के सहयोग से, गाँव में अपनी बेटी के नेतृत्व में मासिक धर्म स्वास्थ्य कार्यशालाओं में भाग लेने के बाद, बसंत गाँव में लड़कियों के लिए मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रबल समर्थक बन गए।
"पहले के समय में लोग कमजोरी और स्वास्थ्य संबंधी चिंता के कारण माहवारी में महिलाओं को रसोई में गर्मी और असुविधा में खाना बनाने सेम ना करते थे। इसलिए, मैं अपनी बेटियों और पत्नी को हमेशा स्वच्छता पर ध्यान देने और साफ-सुथरे रहने के लिए प्रोत्साहित करता हूँ।"
कई मौकों पर, बसंत अपनी बेटी प्रिया के साथ लड़कियों के माता-पिता से मिलने गए हैं, जो मासिक धर्म के संबंध में अपने व्यवहार और मान्यताओं को बदलने के लिए तैयार नहीं हैं।
आठ बेटियों के पिता के रूप में बसंत ने अन्य परिवारों के साथ अपना अनुभव साझा किया है और कई परिवारों को लिंग भेदभाव प्रथाओं को छोड़ने के लिए राजी किया है।
प्रिया बताती हैं, "कभी-कभी माता-पिता अपनी बेटियों को मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता पर प्रशिक्षण के लिए नहीं भेजते हैं। ऐसे परिवारों को समझाने के लिए मैंने अपने पिता को भी साथ लिया है।"
बसंत की बेटियों को अपने मासिक धर्म स्वास्थ्य विवरण अपने पिता के साथ साझा करने में कोई शर्म नहीं है। वे समझते हैं कि उनके पोषण और अन्य आवश्यकताओं का ध्यान रखना आवश्यक है।
जिस गांव में मासिक धर्म के बारे में बात करना भी वर्जित माना जाता है, वहां बसंत अपनी बेटियों को सैनिटरी नैपकिन खरीदने की जरूरत पड़ने पर खुशी-खुशी उनकी मदद करते हैं। बसंत और उनकी पत्नी को गर्व है कि उनकी बेटियां पढ़ सकती हैं, काम कर सकती हैं और अपने गांव में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं। प्रिया ने छोटी बेटियों को मासिक धर्म स्वास्थ्य पर शिक्षित किया है, और माता-पिता ने यह सुनिश्चित किया है कि वे उनकी शिक्षा या स्वतंत्रता में बाधा न डालें।
“कभी-कभी लोग मुझे पैड खरीदते हुए देखकर मेरा मजाक बनाएंगे, लेकिन मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता। मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं दिखता.'' बसंत लाल
“Sometimes people will mock me when they see me buying pads, but I don’t mind. I don’t see anything wrong with it."