शहरी भारत में बच्चों एवं किशोरों में हीनता (कमी) का स्वरुप एवं पैमाना
शहरी भारत में बच्चों एवं किशोरों में हीनता (कमी) का स्वरुप एवं पैमाना
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जनगणना के आंकड़ों एवं व्यापक सैंपल सर्वे के आधार पर यूनिसेफ के सहयोग से, आवास एवं शहरी मामले मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ अर्बन अफेयर्स ने 'शहरी भारत में बच्चों एवं किशोरों में हीनता (कमी) का स्वरुप एवं पैमाना:
एक अनुभव जन्य विश्लेषण' विषय पर एक अनुभव आधारित अध्ययन किया|यह अध्ययन उत्तर जीविता एवं पोषण, स्वास्थ्य, मूलभूत जल एवं स्वच्छता सुविधओं तक पहुँच और स्वच्छता के अभ्यास, शैक्षणिक उपलब्धि, रोज़गार एवं बच्चों और किशोरों के खिलाफ हिंसा के क्षेत्र में लैंगिक, आर्थिक श्रेणियों (गरीब बनाम गैर-गरीब) एवं आवासीय पड़ोस (झुग्गी बनाम गैर-झुग्गी बस्ती) आदि के आधार पर बच्चों और किशोरों की अन्तर गतिशीलता को समझने का प्रयास करेगा |इस अध्ययन का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में गरीब बच्चों और किशोरों की परिस्थितियों की प्रवृत्ति का विश्लेषण करना है और शहरों और नगरों के बाहरी इलाकों और झुग्गियों में रहने वाले बच्चों, किशोरों और उनके परिवारों के जीवन और उनके हित की असमानताओं को कम करने के लिए एक व्यापक रणनीति हेतु नीति निर्माण में साक्ष्य निहित अंतराल (कमियों) की पहचान करना है |
इस अध्ययन के द्वारा सामाजिक क्षेत्र में पिछले एक दशक में की गई प्रगति को उजागर किया, यद्यपि कई क्षेत्रों में गरीबों और गैर – गरीबों में व्यापक असमानता देखने को मिली, यहाँ तक कि ज्यादातर क्षेत्रों में कई संकेतकों में शहरी गरीब बच्चों की स्थति ग्रामीण गरीब बच्चों से भी ख़राब पाई गई |
इस रिपोर्ट के नीति सम्बन्धी आयामों में इस अध्ययन में सभी स्तरों पर शहरी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की तत्काल स्थापना; शहरी गरीब परिवारों और सभी के लिए जल एवं स्वच्छता की मूलभूत सेवाओं तक पहुँच में सुधार; शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक सुरक्षा के क्षेत्र में शहरी कार्यक्रमों के लिए मज़बूत साक्ष्यों के निर्माण हेतु एक समेकित प्रयास पर ज़ोर दिया गया है | कोविड जैसे संकटों में ये असमानताएं और बढ़ जाती हैं, इसलिए केंद्रीकृत और समेकित प्रयासों की आवश्यकता और बढ़ जाती है |