व्यापक राष्ट्रीय पोषण सर्वेक्षण 2016 - 2018

भारत की प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि से सर्वाधिक संवेदनशील (भेद्य) लोगों की जीविका में काफी प्रगति हुई है| इस गतिशील प्रगति से एक दशक में 27 करोड़ 10 लाख लोग गरीबी से बहार निकल पाए, लेकिन उनके बीच गहरी आर्थिक असमानता है (OPHI, 2019) |

आंगनवाड़ी कार्यकर्ता शांता मीना (बाएं) 25 साल की लक्ष्मी आकाश मीणा (दाएं) की मां (दो - वर्षीय बेटी अक्षरा मीणा और 6 महीने की - अमित मीना बेटे) के साथ नियमित घर पर जाती हैं।
UNICEF/UN0322022/Kolari

मुख्य आकर्षण

भारत की प्रभावशाली आर्थिक वृद्धि से सर्वाधिक संवेदनशील (भेद्य) लोगों की जीविका में काफी प्रगति हुई है | इस गतिशील प्रगति से एक दशक में 27 करोड़ 10 लाख लोग गरीबी से बहार निकल पाए, लेकिन उनके बीच गहरी आर्थिक असमानता है (OPHI, 2019) | भारत की वैश्विक आर्थिक क्षमता को सीमित करने के प्रमुख कारणों में से एक कुपोषण है (कोपेनहेगेन सहमति 2012) | अन्य समाजार्थिक विषमताओं ने और अधिक वृद्धित था उससे होने वाले आर्थिक विस्तार को सीमित किया है | जहाँ उत्पादकता और कुपोषण में पिछले दो दशकों में कमी आई है (IIPS, 2017), वहीं गैर-संचारी रोग (NCD) मृत्यु का प्रमुख कारण बनके उभरे हैं (Dandona, 2017) |

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लेखक
यूनिसेफ
प्रकाशन तिथि
भाषा
अंग्रेज़ी

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