बाल एवं किशोर मानसिक स्वास्थ्य सेवा मानचित्रण: इंडिया 2024
भारत के किशोर: राष्ट्र के भविष्य की शक्ति — समग्र और युवा-केंद्रित देखभाल से मज़बूत मन और शरीर का निर्माण
- English
- हिंदी
Highlights
भारत में बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं का संपूर्ण मैपिंग करने की ज़रूरत इसलिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समूह में मानसिक स्वास्थ्य का संकट तेजी से बढ़ रहा है। कुल 436 मिलियन बच्चे और किशोर, जो हमारी आबादी का बड़ा हिस्सा हैं, हमारे भविष्य की सबसे बड़ी पूंजी हैं। लेकिन, शारीरिक स्वास्थ्य में कई प्रगति के बावजूद, बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य की सेवाएँ काफी पीछे रह गई हैं। स्वास्थ्य नीतियों पर चर्चा के दौरान मानसिक स्वास्थ्य को अक्सर कम प्राथमिकता दी जाती है। उनके मानसिक स्वास्थ्य को संभालने और मज़बूत करने के लिए जो ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) होना चाहिए, वह अभी भी बहुत अपर्याप्त है।
बच्चों और किशोरों में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएँ अक्सर पहचान में नहीं आतीं और न ही उनका समय पर इलाज हो पाता। ऐसा तब तक होता है जब तक उनकी तकलीफ़ बढ़कर उनके रोज़मर्रा के कामकाज को प्रभावित न करने लगे। इस इलाज की कमी इसलिए और बढ़ जाती है, क्योंकि बच्चे और किशोर अक्सर मदद नहीं लेते, और इसके पीछे समाज में फैला कलंक (स्टिग्मा) और जागरूकता की कमी प्रमुख कारण हैं।
एक और चिंताजनक बात यह है कि किशोरों की समस्याओं को अक्सर “बड़े होने की सामान्य प्रक्रिया” कहकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है। इससे उनकी वास्तविक भावनाएँ और अनुभव दब जाते हैं, और बिना किसी सहारे के उनकी परेशानियाँ अंदर ही अंदर बढ़ती रहती हैं।