‘मदर्स डे’ (मातृ दिवस) पर यूनिसेफ ने दुनिया भर में अमीरों और गरीबों के बीच "स्तनपान अंतर" को कम करने का आह्वान किया
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न्यू यॉर्क, 10 मई 2018 - यूनिसेफ ने आज जारी किए गए एक नए विश्लेषण में कहा कि स्तनपान से वंचित रहने वाले बच्चों की संख्या अभी भी अधिक है, विशेष रूप से दुनिया के सबसे अमीर देशों में |। दुनिया भर में, हर साल लगभग 76 लाख बच्चों को स्तनपान नहीं कराया जाता।
यह विश्लेषण बताता है कि यद्यपि माँ का दूध जीवन रक्षा करता है, शिशुओं और माताओं को जानलेवा बीमारियों से बचाता है, और बेहतर बौद्धिक स्तर और शैक्षिक परिणाम सुनिश्चित करता है, फिर भी उच्च आय वाले देशों में अनुमानित 21 प्रतिशत बच्चे कभी स्तनपान नहीं करते हैं। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, यह दर 4 प्रतिशत है।
यूनिसेफ की डिप्टी एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (उप-कार्यकारी निदेशक), ऐ. आई., शाहिदा अज़फर ने कहा कि "स्तनपान सबसे अच्छा उपहार है, जो एक माँ, अमीर या गरीब, अपने बच्चे को, व खुद को, दे सकती है"। "मातृ दिवस मनाते समय हमें दुनिया भर की माताओं को स्तनपान कराने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन देने का संकल्प भी दोहराना चाहिए।"
यह विश्लेषण दर्शाता है कि आयरलैंड (55%), संयुक्त राज्य अमरीका (74%) या स्पेन (77%) जैसे देशों में पैदा होने वाले बच्चों की तुलना में भूटान (99%), मेडागास्कर (99%) और पेरू (99%) जैसे कम-और-मध्यम-आय वाले देशों में अधिक संख्या में शिशुओं को कम-से-कम एक बार स्तनपान कराया जाता है (तालिका देखें)। उच्च आय वाले देशों के 26 लाख शिशुओं, जिन्हें कभी स्तनपान नहीं कराया जाता, में से एक-तिहाई से अधिक बच्चे सिर्फ संयुक्त राज्य अमरीका में हैं।
हालांकि आंकड़े यह दर्शाते हैं कि निम्न-मध्यम-आय वाले देशों में, संपत्ति की असमानता यह प्रभावित करती है कि एक माँ अपने बच्चे का स्तनपान कब तक जारी रखेगी,। सबसे गरीब परिवारों के बच्चों को स्तनपान जारी रखने का समय 2 साल है, जो सबसे अमीर परिवारों से 1.5 गुना अधिक है। यह अंतर पश्चिम और मध्य अफ्रीका में, और लैटिन अमरीका और कैरेबियन में सबसे अधिक है , जहां सबसे गरीब परिवारों के बच्चों के स्तनपान जारी रखने का समय 2 साल है, जो कि धनी परिवारों से लगभग दोगुना है।
शाहिदा अज़फर ने कहा, "हम जानते हैं कि गरीब देशों में धनी माताओं के स्तनपान कराने की संभावना कम होती है, लेकिन कुछ हद तक विरोधाभासी रूप से यह संकेत मिल रहे हैं कि धनी देशों में, गरीब माताओं के स्तनपान कराने की संभावना सबसे कम है। स्तनपान में हर आय स्तर पर अंतर एक महत्वपूर्ण संकेत है कि विभिन्न देश, चाहे वह कितने भी संपन्न हो, हर माँ को अपने बच्चे को स्तनपान कराने के लिए सूचित और सशक्त नहीं कर रहे हैं।”
अधिक स्तनपान दर के लिए प्रत्येक देश में अलग-अलग कारण होते हैं। भारत और वियतनाम जैसे देशों ने स्तनपान को बचाने और बढ़ावा देने के लिए मजबूत नीतियां बनाई हैं। अन्य देशों, जैसे तुर्कमेनिस्तान में, बच्चों के लिए अनुकूल अस्पतालों में जन्म देने वाली माताओं की दर बहुत अधिक है **। न्यूजीलैंड और श्रीलंका की लगभग सभी माँएँ बच्चों के अनुकूल सुविधाओं में जन्म देती हैं। इसके साथ ही, सांस्कृतिक और राजनीतिक माहौल, जिसमें पिता, परिवार, नियोक्ता और समुदायों का समर्थन/सहयोग शामिल है, एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
अपने वैश्विक अभियान ‘एव्री चाइल्ड अलाइव’ (EveryChildALIVE) के माध्यम से, जो दुनिया के नवजात शिशुओं की ओर से समाधान की मांग करता है, यूनिसेफ सरकारों, निजी क्षेत्र और नागरिक समाज से आग्रह करता है कि:
• जन्म से दो साल तक की उम्र तक स्तनपान दर बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता और जागरूकता को बढ़ावा दें।
• शिशु फार्मूला और माँ के दूध के अन्य विकल्पों के साथ-साथ बोतल और टीट की मार्केटिंग को विनियमित करने के लिए मजबूत कानूनी उपायों को अपनाएं।
• वेतन सहित पारिवारिक अवकाश दें और कार्यस्थल पर स्तनपान-सम्बन्धी नीतियां बनाएं, जिनमें स्तनपान के लिए अवकाश शामिल हो।
• मातृत्व सुविधाओं में सफल स्तनपान के लिए दस कदमों को लागू करें, और बीमार नवजात शिशुओं के लिए माँ का दूध उपलब्ध कराएं।
• सुनिश्चित करें कि माताओं को स्वास्थ्य सुविधाओं में और प्रसव के बाद पहले सप्ताह में कुशल स्तनपान परामर्श प्राप्त हो।
• स्वास्थ्य सुविधाओं और समुदायों के बीच संबंधों को मजबूत करें, ताकि माताओं को स्तनपान के लिए निरंतर सहायता मिले।
• स्तनपान नीतियों, कार्यक्रमों और प्रथाओं में सुधार को परखने के लिए निगरानी प्रणाली में सुधार लाएं।
‘एव्री चाइल्ड अलाइव’ 128 से अधिक देशों में मई में मनाये जाने वाले मातृ दिवस के अवसर पर, माताओं और शिशुओं और गर्भावस्था, प्रसव और जन्म के दौरान उनके समर्थन प्राप्त करने के अधिकार का जश्न मना रहा है।
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रिपोर्ट और मल्टीमीडिया यहाँ डाउनलोड करें।
पेरू, माली, मंगोलिया और बांग्लादेश से पुरस्कार विजेता फ़ोटोग्राफ़र इलवि जिओकिकजीएन द्वारा माताओं और शिशुओं के फ़ोटोग्राफ़ के लिए, यहाँ क्लिक करें।
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यह विश्लेषण 123 देशों के विभिन्न डाटा स्रोतों पर आधारित है। निम्न- और मध्यम-आय वाले देशों का डाटा यूनिसेफ के ग्लोबल डाटाबेस से हैं। उच्च-आय वाले देशों का डाटा 2016 की स्तनपान पर आधारित लांसेट श्रृंखला से है; जबकि बारबाडोस, ओमान, कतर, संयुक्त राज्य अमरीका और उरुग्वे के डाटा यूनिसेफ से हैं। केवल 2010 या उसके बाद के अनुमानों को प्रत्येक देश के लिए प्रस्तुत किया जाता है, सिर्फ चीन को छोड़कर जिसके अनुमान 2008 से है।
संपादकों के लिए टिपण्णी:
भारत में, स्तनपान एक सांस्कृतिक परम्परा है और 95 प्रतिशत [1] बच्चों को उनके शुरुआती वर्षों में स्तनपान कराया जाता है। हालांकि, 79 प्रतिशत से अधिक महिलाएं स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराती हैं, उनमें से आधे से कम महिलाएं (41.6 प्रतिशत) जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान कराती हैं। इस तरह कई बच्चे, जो प्रारंभिक स्तनपान से लाभान्वित हो सकते हैं - जो कि जीवन रक्षक है - यह सुनहरा अवसर गँवा बैठते हैं। जन्म के एक घंटे के भीतर जिन बच्चों को स्तनपान नहीं कराया जाता है, उनमें नवजात मृत्यु दर का जोखिम 33 प्रतिशत अधिक होता है।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों से पता चलता है कि 54.9 प्रतिशत बच्चे केवल स्तनपान कर रहे हैं और केवल स्तनपान औसतन 2.9 महीनों के लिए होता है। इस तरह के स्तनपान को बंद करने का एक मुख्य कारण पानी और अन्य तरल पदार्थों का उपयोग है।
डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ के दिशानिर्देश उचित स्तनपान सुनिश्चित करने के लिए तीन कदमों पर ज़ोर देते हैं। इनमें शामिल है स्तनपान का शीघ्र आरम्भ - जन्म के तुरंत बाद अपनी माँ के साथ नवजात शिशु का त्वचा से त्वचा का संपर्क, और जीवन के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने के लिए माताओं की सहायता करना; फिर विशेष स्तनपान - 6 महीने तक नवजात शिशुओं को केवल स्तनपान कराना, न कि कोई अन्य भोजन, तरल पदार्थ या पानी तक देना; और अंत में स्तनपान जारी रखना - दो साल या उससे अधिक समय तक, और छह महीने की आयु पूरी होने पर स्तनपान के अलावा पर्याप्त और सुरक्षित ठोस, अर्ध-ठोस या नरम भोजन देना।
दुनिया भर में, स्वास्थ्य सुविधाओं, घरों और कार्यस्थलों में माताओं को प्रोत्साहन देने वाली नीतियों और कार्यक्रमों ने स्तनपान दर में उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई देती है।
यूनिसेफ इंडिया की प्रतिनिधि डॉ. यास्मीन अली हक ने कहा, “स्तनपान सभी लड़कियों और लड़कों को जीवन में सबसे स्वस्थ शुरुआत देता है। यह मस्तिष्क के विकास को प्रेरित करता है, उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाता है, और बढ़ती आयु में दीर्घकालिक बीमारियों से बचाने में मदद करता है। स्तनपान मानव पूंजी को बढ़ावा देने, आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करने और हर बच्चे को पनपने का समान अवसर प्रदान करने के लिए एक उत्तम प्रयास है।"
* यूनिसेफ के ग्लोबल डाटाबेस से 2010-2017 के बीच 73 देशों के असामग्र डाटा पर आधारित विश्लेषण।
** बच्चे के अनुकूल अस्पताल या मातृत्व सुविधाएं स्तनपान के लिए उच्च-गुणवत्ता का समर्थन प्रदान करती हैं, और बच्चे के अनुकूल अस्पताल की पहल के सफल स्तनपान के दस चरणों का पालन करती हैं (Ten Steps to Successful Breastfeeding of the Baby-friendly Hospital Initiative) ।
[1] राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण - 4 (2015-16)
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