भारत में नौनिहालों की जीवन रक्षा में बड़ी छलांग

02 फ़रवरी 2026
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नई दिल्ली -  संयुक्त राष्ट्र बाल मृत्यु अनुमान समूह (UN IGME) की हाल ही में जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने, पाँच साल से कम आयु के बच्चों की जीवन रक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक प्रगति दर्ज की है।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में, वर्ष 2015 से 2023 के बीच, पाँच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर, प्रति 1,000 पर, 48 से घटकर 28 पर आ गई है।

इसी अवधि में नवजात शिशु मृत्यु दर में भी उल्लेखनीय गिरावट आई है, जो 28 से घटकर 17 प्रति 1,000 पर आ गई है।

यह गिरावट भारत में लाखों बच्चों की ज़िन्दगियों को बचाने के लिए किए गए, व्यापक और निरंतर प्रयासों का सशक्त प्रमाण है।

2015 में सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की शुरुआत के बाद से, भारत में पाँच साल से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 42% की कमी हासिल की गई है. जोकि दक्षिण एशिया में 33% और विश्व स्तर पर 14% के औसत से अधिक है।

नवजात शिशु मृत्यु दर में 39% की कमी हासिल की गई है, जो दक्षिण एशिया के लिए 28% और विश्व स्तर पर 11% से बेहतर है।

स्वास्थ्य तंत्र की मज़बूती

रिपोर्ट कहती है कि भारत की इस सफलता के पीछे बहुस्तरीय और बहु-क्षेत्रीय रणनीतियों का समन्वय है। स्वास्थ्य प्रणाली को मज़बूत बनाना, जीवन रक्षक कार्यक्रमों की पहुँच बढ़ाना, माताओं और बच्चों को जीवनभर स्वास्थ्य सेवाएँ सुनिश्चित करना - ये सभी प्रयास इस परिवर्तन के मूल में हैं।

स्वच्छ भारत मिशन और पोषण अभियान जैसी योजनाएँ, मातृ और बाल स्वास्थ्य को सशक्त बनाने में सहायक रही हैं।

विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा योजना मानी जाने वाली आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत लाखों परिवारों को मुफ़्त मातृ एवं बाल स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।

इसमें संस्थागत प्रसव, आवश्यक दवाओं की आपूर्ति, निदान, पोषण सहायता और स्वास्थ्य एवं कल्याण केन्द्रों के माध्यम से प्राथमिक देखभाल शामिल है।

प्रशिक्षण और नवाचार की भूमिका

भारत ने घरों में सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करने के लिए प्रशिक्षित प्रसव सहायकों की तैनाती को प्राथमिकता दी है. गुणवत्तापूर्ण नवजात और बाल देखभाल के लिए मानव संसाधन का प्रशिक्षण और वितरण एक महत्वपूर्ण पहलू रहा है।

भारत, इसके साथ ही डेटा-संचालित निर्णय, डिजिटल निगरानी प्रणालियों का उपयोग और अग्रणी अनुसंधान की सहायता से, अपनी नीतियों को लगातार बेहतर बना रहा है. उद्देश्य है - रोकथाम योग्य बाल मृत्यु दर को और कम करना।

यूनिसेफ़ की साझेदारी

इस प्रगति में यूनिसेफ भारत सरकार का अहम साझीदार रहा है। भारत में यूनीसेफ़ की प्रतिनिधि, सिंथिया मैक्कैफ़्री ने भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को बधाई देते हुए कहा, “बाल मृत्यु दर में कमी लाने का भारत का सफ़र इस बात का सशक्त प्रमाण है कि प्रतिबद्धता, निवेश और समन्वित कार्रवाई के ज़रिये बच्चों को जीवनदान देना सम्भव है।”

उन्होंने कहा, “यूनीसेफ़ में हम हर बच्चे को जीवित रहने और समृद्ध होने का अवसर देने, हर माँ को गुणवत्तापूर्ण देखभाल तक पहुँच उपलब्ध कराने और किसी भी समुदाय को पीछे नहीं छोड़ने की हमारी साझा प्रतिबद्धता पर अटल हैं।”

मुख्य आँकड़े (डेटा विश्लेषण):

पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर (Under-5 Mortality)

· 1990 से 2023 के बीच पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भारत में 78 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई, जो कि दक्षिण एशिया (73.2 प्रतिशत) और वैश्विक स्तर (60.6 प्रतिशत)
से अधिक है।

· वैश्विक स्तर पर पाँच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु में भारत की हिस्सेदारी 1990 में 27 प्रतिशत से घटकर 2023 में 13.5 प्रतिशत रह गई है।

नवजात मृत्यु दर (Neonatal Mortality)

· 1990 से 2023 के बीच नवजात मृत्यु दर में भारत में 70.2 प्रतिशत की कमी आई,
जबकि दक्षिण एशिया में यह कमी 63.2 प्रतिशत और वैश्विक स्तर पर 54.1 प्रतिशत रही।

· वैश्विक नवजात मृत्यु में भारत की हिस्सेदारी 1990 में 30.7 प्रतिशत से घटकर 2023 में 17.6 प्रतिशत हो गई है।

* UN IGME द्वारा प्रस्तुत ये अनुमान भारत के आधिकारिक आँकड़े नहीं हैं।
भारत में मृत्यु दर से संबंधित आधिकारिक आँकड़ों का स्रोत महानिबंधक एवं जनगणना आयुक्त (ORGI) के अंतर्गत नमूना पंजीकरण प्रणाली (SRS) है।

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