परिवार की देखभाल से वंचित बच्चों की सुरक्षा

माता-पिता की देखरेख के बिना रहने वाले बच्चों के लिए परिवार से अलगाव को रोकना और परिवार-आधारित वैकल्पिक देखभाल को मज़बूत बनाना

13-year-old Dharmendar (Name Changed), was one of the survivors who were rescued from bangle making factory in Hyderabad in 2015.
UNICEF/UN0280908/Vishwanathan

परिवार किसी भी बच्चे के विकास के लिए सबसे पोषण देने वाला, देखभाल करने वाला और सुरक्षित वातावरण होता है। माता-पिता की देखरेख से दूर रहने वाले बच्चे सबसे कमज़ोर और जोखिम में रहने वाले समूहों में से एक हैं।

हालाँकि, भारत में बड़ी संख्या में बच्चे माता-पिता की देखरेख के बिना जी रहे हैं। इनमें से कई बाल देखभाल संस्थाओं में रह रहे हैं, तो कई सड़कों पर, परिवहन केंद्रों पर, बाल मज़दूरी में, प्रवास पर, मानव तस्करी के शिकार, या किसी अपराध में दोषी ठहराए गए बच्चे हैं।

इसमें वे बच्चे भी शामिल हैं जो शोषणपूर्ण पारिवारिक माहौल में हैं या जिन्हें उनके माता-पिता ने छोड़ दिया है। सामाजिक टूटन, संघर्ष, गरीबी, असुरक्षित प्रवास और दिव्यांगता जैसी परिस्थितियाँ परिवार से अलगाव के खतरे को और बढ़ा देती हैं।

भारत सरकार सभी बच्चों के लिए परिवार-आधारित देखभाल को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) संशोधन अधिनियम 2021 इन्हीं सिद्धांतों पर ज़ोर देता है और संस्थागत देखभाल को केवल अंतिम विकल्प के रूप में मान्यता देता है।

2018 में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MWCD) द्वारा बाल देखभाल संस्थाओं (CCIs) की राष्ट्रव्यापी समीक्षा में पाया गया कि 3,70,227 बच्चे देखभाल और संरक्षण की ज़रूरत में थे और 7,422 बच्चे कानून से संघर्ष की स्थिति में CCIs में रह रहे थे।

अप्रैल 2020 में, जब भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने COVID-19 महामारी के कारण बच्चों को संस्थाओं से बाहर करने का आदेश दिया, उस समय संस्थागत देखभाल में 2,27,518 बच्चे देखभाल और संरक्षण की ज़रूरत में थे और 8,614 बच्चे कानून से संघर्ष की स्थिति में थे।

हालाँकि, भारत में गैर-संस्थागत देखभाल को बढ़ावा देने के प्रयासों के बावजूद, परिवार-आधारित देखभाल की रफ़्तार देश में अब तक सीमित ही रही है।

"हर बच्चा एक परिवार के प्यार और सुरक्षा का हकदार है। क्योंकि, संस्थाएँ सिर्फ आश्रय दे सकती हैं, लेकिन एक परिवार ही बच्चे के सपनों को साकार कर सकता है।"

मिशन वात्सल्य के दिशा-निर्देशों ने इस दृष्टिकोण और प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से सामने रखा और परिवार से अलगाव को रोकने तथा बच्चों के समग्र विकास के लिए एक सुरक्षित, पोषणपूर्ण और संरक्षित वातावरण को बढ़ावा देने पर ध्यान, दृश्यता, फंडिंग और जोर को और बढ़ाया।

यूनिसेफ ने कई राज्यों में राज्य सरकारों को परिवार-आधारित वैकल्पिक देखभाल के अभिनव मॉडल जैसे पालक देखभाल (Foster Care) और नातेदारी देखभाल (Kinship Care) — विकसित करने और लागू करने में सहयोग दिया है।

राज्य सरकारों के साथ मिलकर यूनिसेफ संस्थागत देखभाल को कम करने और परिवार से अलगाव को रोकने के लिए रणनीतिक कार्य योजनाएँ भी तैयार कर रहा है।

इसमें विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और सेवाओं के ज़रिए परिवारों को मज़बूत बनाना भी शामिल है। यूनिसेफ ने संस्थागत देखभाल छोड़ने वाले युवाओं (Care-Leaving Youth) के लिए आफ्टरकेयर में भी सहयोग दिया है।

जागरूकता और सामूहिकीकरण के प्रयासों के ज़रिए एक राष्ट्रीय केयर लीवर्स नेटवर्क (National Care Leavers Network) का गठन हुआ है और रोज़गार तैयारी व व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए निजी क्षेत्र के साथ जुड़ाव भी स्थापित किया गया है।

इन मॉडलों में देश भर में परिवार-आधारित वैकल्पिक देखभाल को मज़बूत करने के लिए बड़े पैमाने पर विस्तार और दोहराए जाने की अपार संभावनाएँ हैं। 17 राज्य सरकारों के साथ यूनिसेफ के सहयोग ने परिवार से अलगाव को रोकने, परिवार-आधारित वैकल्पिक देखभाल, संस्थागत देखभाल को कम करने और बच्चों को आफ्टरकेयर सहायता प्रदान करने के काम को और मज़बूती दी है।

बाल संरक्षण का ध्यान प्रतिक्रिया से रोकथाम की ओर और संस्थागत देखभाल से परिवार-आधारित देखभाल की ओर स्थानांतरित करने के लिए, यूनिसेफ राज्य सरकारों के साथ मिलकर संस्थागत देखभाल को कम करने और परिवार-आधारित वैकल्पिक देखभाल (FBAC) को बढ़ावा देने पर एक व्यापक योजना और दिशा-निर्देश तैयार करने के लिए सहयोग करता है।

राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर काम करते हुए, परिवार और समुदाय-आधारित वैकल्पिक देखभाल प्रणालियों की ओर बदलाव की इच्छाशक्ति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसके लिए बाल संरक्षण प्रणाली के भीतर मौजूदा पदों और कार्य प्रोफाइल का पुनर्मूल्यांकन और संशोधन आवश्यक है। साथ ही उन भूमिकाओं को निभाने के लिए ज़रूरी ज्ञान, कौशल और दक्षताओं में भी बदलाव की ज़रूरत है।

यूनिसेफ की भूमिका

यूनिसेफ राज्यों में सरकार के साथ साझेदारी से संस्थागत देखभाल को कम करने और परिवार-आधारित वैकल्पिक देखभाल (Family Alternative Care) पर विकास, योजना निर्माण, प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और परिणामों की निगरानी में सहयोग कर रहा है।

साक्ष्य विकसित करने, साझेदारों को एकजुट करने और माता-पिता की देखरेख से वंचित बच्चों की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए अभिनव मॉडल तैयार करने की आवश्यकता को समझते हुए, यूनिसेफ ज्ञान निर्माण, साझाकरण और सीखने की प्रक्रिया को संस्थागत रूप देने के लिए (India Alternative Care Network) का समर्थन करता है।

परिवार-आधारित वैकल्पिक देखभाल में नियोजन बढ़ाने, पुनर्मिलन के लिए परिवार की तलाश और शोषण, हिंसा तथा दुर्व्यवहार के प्रति संवेदनशील बच्चों की पहचान करने में यूनिसेफ के केस प्रबंधन प्रणालियों को बेहतर बनाने, क्षमता निर्माण और परिवार सुदृढ़ीकरण सेवाओं के समर्थन के प्रयासों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।